{"_id":"5bf5a13bbdec2269b96ca00c","slug":"154282429810-jaunpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"ह्रदय में भक्ति से खुलता है मोक्ष का द्वार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ह्रदय में भक्ति से खुलता है मोक्ष का द्वार
Updated Wed, 21 Nov 2018 11:55 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सतहरिया। महाराष्ट्र के संत आचार्य मनोज पाण्डेय ने कहा कि भाव भक्ति ही प्रभू का आहार है। जिस व्यक्ति के ह्रदय में नारायण के प्रति भाव भक्ति जागृत हो जाता है तो भगवान खुद उसके भक्त हो जाते है। भरी सभा में जब दुर्योधन द्वारा चीरहरण किया जा रहा था तो द्रोपदी ने लाज बचाने के लिए भगवान कृष्ण को पुकारा। भगवान के प्रति भाव भक्ति तथा अनुराग का प्रतिफल रहा कि द्रोपदी की लाज बचाने के लिए कृष्ण नंगें पांव दौड़े चले आए। वह मुंगराबादशाहपुर मोहल्ला कटरा के बलिभद्र पैलैस में श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन भक्तों के बीच प्रवचन कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि द्रोपदी के चीर हरण को बचाना उनके वस्त्रावतार की लीला थी। भगवान अजन्मा है। भक्त की रक्षा के लिए सारे नियमों को तोड़ कर भगवान कृष्ण ने उत्तरा के पेट में प्रवेश किया। गर्भ में पल रहे गर्भ को धारण कर उसे सुरक्षा प्रदान की। बहन सुभद्रा से भगवान ने कुछ मांगने को कहा तो उन्होंने उनसे चरण वंदना मांगी। वहीं कुंती ने दु:ख इस लिए मांगा था कि भगवान का वियोग न झेलना पड़े। उन्होंने कहा कि पिता धर्म, माता श्रद्धा, पुत्र विवेक, पत्नी शांति, पुत्री सुमति के प्रतीक हैं। ऐसा घर मंगल कारी होता हैै और ऐसे घरों में भगवान का वास होता है। मुख्य यजमान राजेंद्र तिवारी परिवार के साथ कथा का श्रवण कर रहे हैं।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि द्रोपदी के चीर हरण को बचाना उनके वस्त्रावतार की लीला थी। भगवान अजन्मा है। भक्त की रक्षा के लिए सारे नियमों को तोड़ कर भगवान कृष्ण ने उत्तरा के पेट में प्रवेश किया। गर्भ में पल रहे गर्भ को धारण कर उसे सुरक्षा प्रदान की। बहन सुभद्रा से भगवान ने कुछ मांगने को कहा तो उन्होंने उनसे चरण वंदना मांगी। वहीं कुंती ने दु:ख इस लिए मांगा था कि भगवान का वियोग न झेलना पड़े। उन्होंने कहा कि पिता धर्म, माता श्रद्धा, पुत्र विवेक, पत्नी शांति, पुत्री सुमति के प्रतीक हैं। ऐसा घर मंगल कारी होता हैै और ऐसे घरों में भगवान का वास होता है। मुख्य यजमान राजेंद्र तिवारी परिवार के साथ कथा का श्रवण कर रहे हैं।
विज्ञापन