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नियम ताख पर रख,खेतों में जलाए जा रहे फसलों के अवशेष
Updated Tue, 13 Nov 2018 12:47 AM IST
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जौनपुर। प्रदूषण रोकने के क्रम में सुप्रीम कोर्ट के सख्ती के बाद भी जिले में फसलों के अवशेषों (पराली) को जलाने पर रोक नहीं लग पा रही है। किसान धान की कटाई करने के बाद खेतों में फसलों के अवशेषों को जला रहे हैं। इसे रोकने के लिए तहसील स्तर पर एसडीएम के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम गठित की गई है लेकिन इसका कोई असर देखने को नहीं मिल रहा है।
जिले में एक लाख 59 हजार हेक्टेयर खेत में धान की रोपाई की गई थी। एक नवंबर से धान की खरीद शुरु होने के कारण किसान इस समय जोर शोर से धान की फसल को काटना शुरु कर दिए हैं। साथ ही गेहूं की समय से बुआई करने के लिए खोतों में छूटे धान के अवशेषों को जलाने का कार्य भी कर रहे हैं। जबकि पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने फसलों के अवशोषों को जलाने पर रोक लगाया है। साथ ही इसका उलंघन करने वालों के विरुद्घ जुर्माना व जेल का भी प्रविधान किया गया है। वहीं इस पर लगाम लगाम लगाने के लिए तहसील स्तर पर एसडीएम, उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी व सहायक विकास अधिकारी कृषि की टीम बनाई गई है। लेकिन टीम के चुप्पी साधने से किसान धड़ल्ले से धान फसल के अवशोषों को जलाले का कार्य किया जा रहा है। उधर कृषि विभाग भी इसको लेकर उदासीन बना हुआ है। उसके द्वारा फसलों के अवशेषों को जलाने से होने वाले नुकसान व अवशेषों को नहीं जलाने से होने वाले लाभ से संबंधित एडवाइजरी भी किसानों को नहीं दी गई है।
ढ़ाई हजार से लेकर 15 हजार तक जुर्माना
जौनपुर। फसलों के अवशेषों को जलाले पर सरकार द्वारा जुर्माना भी निर्धारित किया गया है। अगर दो एकड़ तक फसलों के अवशेषों को जलाने पर ढ़ाई हजार रुपये, दो से पांच एकड़ तक फसलों के अवशेषों को जलाने पर पांच हजार और पांच एकड़ से अधिक तक फसलों के अवशेषों को जलाने पर 15 हजार रुपया जुुर्माने का प्राविधान है।
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उर्वरा शक्ति का होता है नुकसान
जौनपुर। कृषि वैज्ञानिक डा.सुरेश कन्नौजिया बताया कि फसलों के अवशेषों को जलाने से खेतों की जीवाश्म कार्बन नष्ट हो जाती है।जबकि यह खेतों की आत्मा होती है। फसलों के उत्पादन में उपयोगी मित्र कीट भी मर जाते हैं।जिससे फसल के उत्पादन पर भी असर पड़ता है। इस लिए किसान को फसलों के अवशेषों को नहीं जलाना चाहिए। बल्कि अवशेषों की जुताई कर यूरिका का छिड़काव कर देना चाहिए। जिससे अवशेष खेत में सड़ जाते हैं। जिससे फसल का उत्पादन भी बढ़ जाता है। खेतों में उर्वरा शक्ति भी बनी रहती है।
खेतों में फसलों के अवशेषों को जलाना कानूनन जुर्म है। इससे पर्यावरण प्रदूषण होने के साथ ही खेतों की उर्वरा शक्ति भी नष्ट होती है। इसे रोकने के लिए सरकार द्वारा जुर्माना भी निर्धारित किया गया है। वहीं तहसील स्तर पर एसडीएम के नेतृत्व में टीम भी गठित हैं।
जय प्रकाश
उप निदेशक कृषि
जिले में एक लाख 59 हजार हेक्टेयर खेत में धान की रोपाई की गई थी। एक नवंबर से धान की खरीद शुरु होने के कारण किसान इस समय जोर शोर से धान की फसल को काटना शुरु कर दिए हैं। साथ ही गेहूं की समय से बुआई करने के लिए खोतों में छूटे धान के अवशेषों को जलाने का कार्य भी कर रहे हैं। जबकि पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने फसलों के अवशोषों को जलाने पर रोक लगाया है। साथ ही इसका उलंघन करने वालों के विरुद्घ जुर्माना व जेल का भी प्रविधान किया गया है। वहीं इस पर लगाम लगाम लगाने के लिए तहसील स्तर पर एसडीएम, उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी व सहायक विकास अधिकारी कृषि की टीम बनाई गई है। लेकिन टीम के चुप्पी साधने से किसान धड़ल्ले से धान फसल के अवशोषों को जलाले का कार्य किया जा रहा है। उधर कृषि विभाग भी इसको लेकर उदासीन बना हुआ है। उसके द्वारा फसलों के अवशेषों को जलाने से होने वाले नुकसान व अवशेषों को नहीं जलाने से होने वाले लाभ से संबंधित एडवाइजरी भी किसानों को नहीं दी गई है।
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ढ़ाई हजार से लेकर 15 हजार तक जुर्माना
जौनपुर। फसलों के अवशेषों को जलाले पर सरकार द्वारा जुर्माना भी निर्धारित किया गया है। अगर दो एकड़ तक फसलों के अवशेषों को जलाने पर ढ़ाई हजार रुपये, दो से पांच एकड़ तक फसलों के अवशेषों को जलाने पर पांच हजार और पांच एकड़ से अधिक तक फसलों के अवशेषों को जलाने पर 15 हजार रुपया जुुर्माने का प्राविधान है।
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उर्वरा शक्ति का होता है नुकसान
जौनपुर। कृषि वैज्ञानिक डा.सुरेश कन्नौजिया बताया कि फसलों के अवशेषों को जलाने से खेतों की जीवाश्म कार्बन नष्ट हो जाती है।जबकि यह खेतों की आत्मा होती है। फसलों के उत्पादन में उपयोगी मित्र कीट भी मर जाते हैं।जिससे फसल के उत्पादन पर भी असर पड़ता है। इस लिए किसान को फसलों के अवशेषों को नहीं जलाना चाहिए। बल्कि अवशेषों की जुताई कर यूरिका का छिड़काव कर देना चाहिए। जिससे अवशेष खेत में सड़ जाते हैं। जिससे फसल का उत्पादन भी बढ़ जाता है। खेतों में उर्वरा शक्ति भी बनी रहती है।
खेतों में फसलों के अवशेषों को जलाना कानूनन जुर्म है। इससे पर्यावरण प्रदूषण होने के साथ ही खेतों की उर्वरा शक्ति भी नष्ट होती है। इसे रोकने के लिए सरकार द्वारा जुर्माना भी निर्धारित किया गया है। वहीं तहसील स्तर पर एसडीएम के नेतृत्व में टीम भी गठित हैं।
जय प्रकाश
उप निदेशक कृषि