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पति-पत्नी और एक दिव्यांग को मिलेगी पीएचडी डिग्री
Updated Mon, 05 Nov 2018 12:21 AM IST
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जौनपुर। वीर बहादुर पूर्वांचल विश्वविद्यालय 22 वें दीक्षांत समारोह में पति-पत्नी और एक दिव्यांग को पीएचडी की डिग्री मिलेगी। तीनों शोध छात्रों ने रविवार को होने वाले पूर्वाभ्यास में हिस्सा लिया। शोध उपाधि को लेकर छात्रों में काफी उत्साह है। सोमवार को होने वाले दीक्षांत समारोह के लिए एक दिन पहले से ही छात्र तैयारी में जुटे हैं।
महाराष्ट्र के औरंगाबाद स्थित व्होखर्ड कंपनी में वैज्ञानिक के पद पर तैनात धीरेंद्र प्रताप सिंह और उनकी पत्नी रीना सिंह एक साथ पीएचडी की उपाधि पाएंगे। इसे लेकर दोनों में काफी उत्साह हैं।धीरेंद्र प्रताप सिंह ने राष्ट्रीय पीजी कॉलेज जमुहाई के डा. एसपी त्रिपाठी एवं रीना सिंह ने केएनपीजी कॉलेज ज्ञानपुर के डा. ओपी सिंह के निर्देशन में शोध किया है।उधर, एटा निवासी राधेश्याम प्रजापति को दोनों आंख से नहीं दिखता है। वह एटा के एक इंटर कॉलेज में प्राध्यापक हैं। आंखों में रोशनी नहीं होने के बावजूद हिम्मत नहीं हारी। काफी मेहनत करके दूसरे लोगों से मदत लेकर थीसिस तैयार किया। वह सोमवार को 22 वें दीक्षांत समारोह में पीएचडी की उपाधि पाएंगे। राधेश्याम प्रजापति ने गांधी स्मारक त्रिवेणी महाविद्यालय के डा. हृदय नारायण शास्त्री के निर्देशन में शोध कार्य किया है। उनका विषय हिंदी दलित कला तथा कारों के उपन्यासों का समीक्षात्मक विश्लेषण था। बातचीत में उन्होंने कहा कि पढ़ने-पढ़ाने का शौक पहले से ही रहा। शोध विषय पर अपने छात्रों से पुस्तकालय से किताबों को मंगवाकर पढ़ कर ज्ञान का विस्तार किया। उन्होंने कहा कि कभी हिम्मत नहीं हारना चाहिए। अगर मेहनत किया जाए तो सब कुछ हासिल किया जा सकता है।
महाराष्ट्र के औरंगाबाद स्थित व्होखर्ड कंपनी में वैज्ञानिक के पद पर तैनात धीरेंद्र प्रताप सिंह और उनकी पत्नी रीना सिंह एक साथ पीएचडी की उपाधि पाएंगे। इसे लेकर दोनों में काफी उत्साह हैं।धीरेंद्र प्रताप सिंह ने राष्ट्रीय पीजी कॉलेज जमुहाई के डा. एसपी त्रिपाठी एवं रीना सिंह ने केएनपीजी कॉलेज ज्ञानपुर के डा. ओपी सिंह के निर्देशन में शोध किया है।उधर, एटा निवासी राधेश्याम प्रजापति को दोनों आंख से नहीं दिखता है। वह एटा के एक इंटर कॉलेज में प्राध्यापक हैं। आंखों में रोशनी नहीं होने के बावजूद हिम्मत नहीं हारी। काफी मेहनत करके दूसरे लोगों से मदत लेकर थीसिस तैयार किया। वह सोमवार को 22 वें दीक्षांत समारोह में पीएचडी की उपाधि पाएंगे। राधेश्याम प्रजापति ने गांधी स्मारक त्रिवेणी महाविद्यालय के डा. हृदय नारायण शास्त्री के निर्देशन में शोध कार्य किया है। उनका विषय हिंदी दलित कला तथा कारों के उपन्यासों का समीक्षात्मक विश्लेषण था। बातचीत में उन्होंने कहा कि पढ़ने-पढ़ाने का शौक पहले से ही रहा। शोध विषय पर अपने छात्रों से पुस्तकालय से किताबों को मंगवाकर पढ़ कर ज्ञान का विस्तार किया। उन्होंने कहा कि कभी हिम्मत नहीं हारना चाहिए। अगर मेहनत किया जाए तो सब कुछ हासिल किया जा सकता है।
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