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विश्व मोहिनी को देख सम्मोहित हुए नारद
Updated Wed, 31 Oct 2018 01:25 AM IST
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सिकरारा। क्षेत्र के जमालपुर गांव में सोमवार से रामलीला मंचन आरंभ हो गया। पहले दिन नारद मोह और राम जन्म का मंचन किया गया। विश्वमोहिनी पर मोहित देवर्षि नारद अपने बंदर रूप से अनजान स्वयंवर में इस आस में टकटकी लगाए बैठे थे कि वरमाला उनके गले में ही पड़ेगी। पूर्व में महर्षि का जप तप दिखा।
हिमालय पर नारद तपस्या कर रहे हैं। इससे भयभीत होकर इंद्र कामदेव को अप्सराओं के साथ नारद की तपस्या भंग करने भेजते हैं। कामदेव को सफलता नहीं मिलती और क्षमा मांग कर लौट जाते हैं। विश्वमोहिनी की हस्तरेखा देखकर नारद मोहित हो जाते हैं और श्रीहरि का रूप मांगते हुए कहते हैं जेहिं विधि होइ नाथ हित मोरा, करहुं सो वेगि दास मैं तोरा। भगवान विष्णु ने पूरी काया सुदर दी परतु मुख वानर का दे दिय। इससे अनजान नारद विश्वमोहिनी के स्वयंवर में जाते है तो विश्वमोहिनी भगवान विष्णु को वरमाला पहनाती है। पूरा पडाल श्री हरि के जयघोष से गुंजायमान हो जाता है। भगवान विष्णु वास्तविक रूप दिखाते है तो नारद श्राप देते हैं कि जो रूप हमें दिया है वही बानर आपके संकट में काम आएंगे। उधर राजा दशरथ के यहां राम जन्म होने से अयोध्यावासी चहक उठते है ।पूरे राज्य में खुशियां मनाई जाती है। नारद की भूमिका रंग बहादुर यादव,विष्णु की संजय यादव, पृथ्वी की डब्बल यादव, ब्रह्मा की वहाब शाह, शिव की भूमिका लाल बाबू शाह, रावण की अभिनय रमाशंकर यादव, विश्वमोहिनी सत्यम यादव ने अभिनीत किया। प्रारम्भ में मुख्य अतिथि एआरटीओ औरैया विनय पांडेय व विशिष्ट अतिथि एआरटीओ कानपुर देहात सुनील दत्त यादव ने फीता काट कर आरती पूजन के साथ शुभारम्भ किया। संचालन रामकृष्ण यादव ने किया।
हिमालय पर नारद तपस्या कर रहे हैं। इससे भयभीत होकर इंद्र कामदेव को अप्सराओं के साथ नारद की तपस्या भंग करने भेजते हैं। कामदेव को सफलता नहीं मिलती और क्षमा मांग कर लौट जाते हैं। विश्वमोहिनी की हस्तरेखा देखकर नारद मोहित हो जाते हैं और श्रीहरि का रूप मांगते हुए कहते हैं जेहिं विधि होइ नाथ हित मोरा, करहुं सो वेगि दास मैं तोरा। भगवान विष्णु ने पूरी काया सुदर दी परतु मुख वानर का दे दिय। इससे अनजान नारद विश्वमोहिनी के स्वयंवर में जाते है तो विश्वमोहिनी भगवान विष्णु को वरमाला पहनाती है। पूरा पडाल श्री हरि के जयघोष से गुंजायमान हो जाता है। भगवान विष्णु वास्तविक रूप दिखाते है तो नारद श्राप देते हैं कि जो रूप हमें दिया है वही बानर आपके संकट में काम आएंगे। उधर राजा दशरथ के यहां राम जन्म होने से अयोध्यावासी चहक उठते है ।पूरे राज्य में खुशियां मनाई जाती है। नारद की भूमिका रंग बहादुर यादव,विष्णु की संजय यादव, पृथ्वी की डब्बल यादव, ब्रह्मा की वहाब शाह, शिव की भूमिका लाल बाबू शाह, रावण की अभिनय रमाशंकर यादव, विश्वमोहिनी सत्यम यादव ने अभिनीत किया। प्रारम्भ में मुख्य अतिथि एआरटीओ औरैया विनय पांडेय व विशिष्ट अतिथि एआरटीओ कानपुर देहात सुनील दत्त यादव ने फीता काट कर आरती पूजन के साथ शुभारम्भ किया। संचालन रामकृष्ण यादव ने किया।
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