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भगवान विष्णु ने नारद का मोह भंग किया
Updated Tue, 23 Oct 2018 11:46 PM IST
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थानागद्दी। प्रभु श्रीराम का जन्म होते ही जहां समूचा पंडाल राम के जयकारे से गुंजायमान हो गया वहीं महिलाओं ने भगवान श्रीराम के बाल रूप की आरती उतारी और मंगल गीत गाकर वातावरण राममय बना दिया।
थानागद्दी बाजार में श्री रामलीला नाटक समिति के बैनर तले चल रहे नौ दिवसीय रामलीला मंचन के दूसरे दिन रामजन्म एवं नारद मोह की लीला का मंचन किया गया। महादेव की आरती से लीला का मंचन शुरू होता है। उसके बाद देवर्षि नारद तपस्या में लीन हो जाते है। नारद की कठिन तपस्या देख स्वयं भगवान इंद्र घबरा जाते है। उनकी तपस्या भंग करने के लिए कामदेव का सहारा लेते हैं। जब माया का चक्र चलता है तो नारद को अपने रूप पर गुरूर एवं मोह हो जाता है। इसी अवसर का लाभ उठाकर भगवान विष्णु चाल चलते हैं और देवर्षि को बंदर जैसा चेहरा प्रदान कर देते हैं। इस रूप में नारद जब विश्वमोहिनी के सामने जाते है तो उन्हें लज्जित होना पड़ा। बस यही देवर्षि का मोह भंग हो जाता है। कुपित नारद ने भगवान विष्णु को श्राप देते है कि यही बानर और भालू आपके अगले जन्म में मददगार होंगे। रामावतार में यही सच साबित हुआ। इधर अयोध्या नरेश राजा दशरथ को चौथेपन की चिन्ता होने पर शृंगी ऋषि के पुत्रेष्ठि यज्ञ के बाद श्रीराम का जन्म होता है। प्रभु श्रीराम के दर्शन को आतुर स्वयं महादेव वेश बदलकर बालक हनुमान के साथ प्रकट होते हैं। निर्देशन शशिधर मिश्र तथा दर्शकों के प्रति आभार शिवब्रत पाठक ने जताया।
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थानागद्दी बाजार में श्री रामलीला नाटक समिति के बैनर तले चल रहे नौ दिवसीय रामलीला मंचन के दूसरे दिन रामजन्म एवं नारद मोह की लीला का मंचन किया गया। महादेव की आरती से लीला का मंचन शुरू होता है। उसके बाद देवर्षि नारद तपस्या में लीन हो जाते है। नारद की कठिन तपस्या देख स्वयं भगवान इंद्र घबरा जाते है। उनकी तपस्या भंग करने के लिए कामदेव का सहारा लेते हैं। जब माया का चक्र चलता है तो नारद को अपने रूप पर गुरूर एवं मोह हो जाता है। इसी अवसर का लाभ उठाकर भगवान विष्णु चाल चलते हैं और देवर्षि को बंदर जैसा चेहरा प्रदान कर देते हैं। इस रूप में नारद जब विश्वमोहिनी के सामने जाते है तो उन्हें लज्जित होना पड़ा। बस यही देवर्षि का मोह भंग हो जाता है। कुपित नारद ने भगवान विष्णु को श्राप देते है कि यही बानर और भालू आपके अगले जन्म में मददगार होंगे। रामावतार में यही सच साबित हुआ। इधर अयोध्या नरेश राजा दशरथ को चौथेपन की चिन्ता होने पर शृंगी ऋषि के पुत्रेष्ठि यज्ञ के बाद श्रीराम का जन्म होता है। प्रभु श्रीराम के दर्शन को आतुर स्वयं महादेव वेश बदलकर बालक हनुमान के साथ प्रकट होते हैं। निर्देशन शशिधर मिश्र तथा दर्शकों के प्रति आभार शिवब्रत पाठक ने जताया।
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