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भूप सहस दस एकहि बारा, लगे उठावन टरहि न टारा
Updated Thu, 18 Oct 2018 12:11 AM IST
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सिकरारा। खानापट्टी के आदर्श राम लीला समिति के मंच पर बीती सीता स्वयंवर का दृश्य देखकर लोग भाव-विभोर हो गए। मंच पर नवोदित व पुराने पात्रों ने अपने अभिनय के उत्कृष्ट प्रदर्शन से पंडाल में बैठे लोगों को रोमांचित कर दिया। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने ज्यों ही शिव धनुष तोड़ा, तालियों की गड़गड़ाहट के साथ पूरा पंडाल जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा।
रामलीला की प्रथम निशा के मंचन में राक्षस मारीच और सुबाहू के साथ ताड़का के आतंक से ऋषियों का पूजा - पाठ करना दुर्लभ हो गया था। ताड़का का वध करने के बाद गुरु विश्वामित्र के साथ मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम जनकपुर पहुंचते है। वहां लक्ष्मण के नगर भृमण की लालसा जानकर गुरु ने उनको जाने की आज्ञा दे दिया। दोनों भाई नगर में पहुंचे तो बालक उनको नगर की सुंदरता के बारे में बताते हुए दुकानदारों का परिचय कराया। माली के बचीचे में पुष्प लेने के लिए जब दोनों भाईं पहुंचे तो माली ने अपनी बगिया का बखान करते हुए %चम्पा और चमेली कुंद, केतकी कनेर बेला% गीत के साथ सभी को भाव विभोर कर दिया। सखियां सीता के साथ गौरी पूजन किया। जनकपुर में सीता स्वयंवर में शिवधनुष उठाने के लिए देश विदेश के राजा महाराजा आए पर शिव धनुष नही उठा सके। लंकापति रावण भी भेष बदलकर सभा में पहुंचे पर वे भी शिवधनुष हिला नहीं सके। बाणासुर के साथ उनका सम्बाद सुनकर दर्शक रोमांचित हो गए। गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर राम ने शिव धनुष उठाकर तोड़ दिया। देवताओं ने स्वर्ग से पुष्पवर्षा किया। सीता स्वयंबर की खुशियां चल रही थी तभी सभा मे परशुराम पहुंचे और टूटे हुए शिवधनुष को देखकर आग बबूला हो गए। लक्ष्मण और परशुराम का सम्बाद देर रात तक लोगों को पंडाल में बांधे रखा। राम का अभिनय कर रहे सुनील सिंह व लक्ष्मण का अभिनय कर रहे रजनीश के साथ परशुराम का अभिनय कर रहे शैलेंद्र सिंह की जमकर सराहना किया। इसके पहले जिला पंचायत अध्यक्ष राज बहादुर यादव ने फीता काटकर रामलीला का उद्घाटन किया। प्रबंधक विनय सिंह ने रामलीला के इतिहास के बारे में बताते हुए अभ्यागतों का स्वागत किया।
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रामलीला की प्रथम निशा के मंचन में राक्षस मारीच और सुबाहू के साथ ताड़का के आतंक से ऋषियों का पूजा - पाठ करना दुर्लभ हो गया था। ताड़का का वध करने के बाद गुरु विश्वामित्र के साथ मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम जनकपुर पहुंचते है। वहां लक्ष्मण के नगर भृमण की लालसा जानकर गुरु ने उनको जाने की आज्ञा दे दिया। दोनों भाई नगर में पहुंचे तो बालक उनको नगर की सुंदरता के बारे में बताते हुए दुकानदारों का परिचय कराया। माली के बचीचे में पुष्प लेने के लिए जब दोनों भाईं पहुंचे तो माली ने अपनी बगिया का बखान करते हुए %चम्पा और चमेली कुंद, केतकी कनेर बेला% गीत के साथ सभी को भाव विभोर कर दिया। सखियां सीता के साथ गौरी पूजन किया। जनकपुर में सीता स्वयंवर में शिवधनुष उठाने के लिए देश विदेश के राजा महाराजा आए पर शिव धनुष नही उठा सके। लंकापति रावण भी भेष बदलकर सभा में पहुंचे पर वे भी शिवधनुष हिला नहीं सके। बाणासुर के साथ उनका सम्बाद सुनकर दर्शक रोमांचित हो गए। गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर राम ने शिव धनुष उठाकर तोड़ दिया। देवताओं ने स्वर्ग से पुष्पवर्षा किया। सीता स्वयंबर की खुशियां चल रही थी तभी सभा मे परशुराम पहुंचे और टूटे हुए शिवधनुष को देखकर आग बबूला हो गए। लक्ष्मण और परशुराम का सम्बाद देर रात तक लोगों को पंडाल में बांधे रखा। राम का अभिनय कर रहे सुनील सिंह व लक्ष्मण का अभिनय कर रहे रजनीश के साथ परशुराम का अभिनय कर रहे शैलेंद्र सिंह की जमकर सराहना किया। इसके पहले जिला पंचायत अध्यक्ष राज बहादुर यादव ने फीता काटकर रामलीला का उद्घाटन किया। प्रबंधक विनय सिंह ने रामलीला के इतिहास के बारे में बताते हुए अभ्यागतों का स्वागत किया।
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