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सिद्ध पीठ महाकाली मंदिर से भक्तों की है अपार श्रद्धा
Updated Wed, 17 Oct 2018 12:33 AM IST
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सिंगरामऊ। क्षेत्र के सिंगरामऊ बाजार में स्थित ऐतिहासिक प्राचीनतम सिद्ध पीठ महाकाली धाम मंदिर पर भक्तों का आवागमन पूरे वर्ष रहता है।भक्तों पर माता का विशेष आशीर्वाद बना रहता है यहां प्रत्येक मंगलवार और नवरात्र में श्रद्धालुओं का मेला लगा रहता है।
प्राचीनतम सिद्ध पीठ महाकाली धाम मंदिर का निर्माण राजा राय रणधीर सिंह ने कराया था। तभी से मां के चरणों में अर्पण से शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। प्राचीनतम सिद्ध पीठ महाकाली मंदिर श्रद्धा विश्वास व आस्था का संगम है । वर्ष 1857 में बैसवंशीय क्षत्रिय शिरोमणि की इष्ट देवी के रूप में स्थापित किया। मंदिर पौराणिक ऐतिहासिक और धार्मिक आस्था को अपने में समेटे हुए है। मंदिर की आधार शिला एवं मूर्ति प्रतिष्ठा सिंगरामऊ स्टेट के तात्कालिक शासक ने कराया था। यह काफी प्राचीनतम मंदिर है। यहां प्रत्येक मंगलवार को विशाल मेला लगता है, जहां पर श्रद्धालु कढ़ाई चढ़ाकर प्रसाद बांटते है।क्षेत्र के लोग कोई भी शुभ काम की शुरुआत माता के दरबार पर आकर ही करते हैं। मंदिर की स्थापना के समय की मूर्ति चोरी हो गई है। बाद में रियासत द्वारा दूसरी मूर्ति स्थापित की गई। आज भी लोग पूरी श्रद्धा से शीश नवाकर मन्नते मांगते हैं । यह सिद्ध पीठ पूरे क्षेत्र के लिए आस्था का प्रतीक है। मन से मांगिए तो मनोकामना अवश्य पूर्ण होगी। हर वर्ष यहां कई जोड़ों का विवाह भी इस परिसर में होता है
प्राचीनतम सिद्ध पीठ महाकाली धाम मंदिर का निर्माण राजा राय रणधीर सिंह ने कराया था। तभी से मां के चरणों में अर्पण से शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। प्राचीनतम सिद्ध पीठ महाकाली मंदिर श्रद्धा विश्वास व आस्था का संगम है । वर्ष 1857 में बैसवंशीय क्षत्रिय शिरोमणि की इष्ट देवी के रूप में स्थापित किया। मंदिर पौराणिक ऐतिहासिक और धार्मिक आस्था को अपने में समेटे हुए है। मंदिर की आधार शिला एवं मूर्ति प्रतिष्ठा सिंगरामऊ स्टेट के तात्कालिक शासक ने कराया था। यह काफी प्राचीनतम मंदिर है। यहां प्रत्येक मंगलवार को विशाल मेला लगता है, जहां पर श्रद्धालु कढ़ाई चढ़ाकर प्रसाद बांटते है।क्षेत्र के लोग कोई भी शुभ काम की शुरुआत माता के दरबार पर आकर ही करते हैं। मंदिर की स्थापना के समय की मूर्ति चोरी हो गई है। बाद में रियासत द्वारा दूसरी मूर्ति स्थापित की गई। आज भी लोग पूरी श्रद्धा से शीश नवाकर मन्नते मांगते हैं । यह सिद्ध पीठ पूरे क्षेत्र के लिए आस्था का प्रतीक है। मन से मांगिए तो मनोकामना अवश्य पूर्ण होगी। हर वर्ष यहां कई जोड़ों का विवाह भी इस परिसर में होता है
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