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बजट के अभाव में थम गई विकास की रफ्तार
Updated Thu, 11 Oct 2018 12:12 AM IST
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जौनपुर। जिला योजना समिति में मंजूर होने के बाद भी बजट न मिलने के कारण विकास की रफ्तार थम सी गई। धन के अभाव में पेयजल, सड़क, लघु सिंचाई सहित अन्य विभागों की योजनाओं को अपेक्षित गति नहीं मिल सकी। एक तरफ जिले की तमाम सड़कें गड्ढा मुक्त होने का बाट जोहती रही तो गांव गांव में बिगड़े इंडिया मार्का टू हैंडपंपों की मरम्मत भी नहीं हो सकी। नहरों की सफाई का काम भी बाधित रहा।
जिला योजना समिति हर साल जिले के विकास का लंबा चौड़ा खाका तैयार कर उसके लिए बजट मंजूर करती है लेकिन साल बीत जाता है और बजट के अभाव में विकास परियोजनाएं अधूरी रह जाती हैं। पेयजल, सिंचाई, और लोक निर्माण विभाग की अधूरी पड़ी कई परियोजनाएं इसी बात की गवाही दे रही हैं। अमर उजाला ने ऐसी ही अधूरी परियोजनाओं की पड़ताल की।
वर्ष 2017 की जिला योजना में नगरीय पेयजल के लिए समिति ने 65 करोड़ का बजट मंजूर किया था। लेकिन वर्ष के अंत तक महज 1.10 करोड़ का ही बजट मिल सका। यानी जितना बजट जिला योजना समिति ने पास किया था उसका महज 1.69 फीसदी ही बजट मिला। जिसका नतीजा रहा कि शहर में मोहल्ला मीरमस्त, मुल्ला टोला, अबीरगढ़ टोला समेत ऊंचाई वाले कई इलाकों में पाइर लाइन बिछाने, और नए पंप लगाने काम काम अजतक पूरा नहीं हो सका। इसी प्रकार वर्ष 2017 की जिला योजना में ग्रामीण पेयजल ग्राम्य विकास के लिए 55.55 करोड़ का बजट मजूर किया था। लेकिन वर्ष के अंत तक 16.66 करोड़ 75 हजार का ही बजट मिल सका। जिसका नतीजा रहा कि गांवों में बिगड़े पड़े 800 से अधिक इंडिया मार्का टू हैंडपंप आज भी रीबोर कराने और अन्य मरम्मत कार्य की बाट जोह रहे हैं। इसी प्रकार पर्यटन विकास के लिए जिला योजना समिति ने 1.75 करोड़ का बजट पास किया था लेकिन वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक पर्यटन विकास के लिए सिर्फ सात लाख रुपये ही मिल सके थे। राजकीय लघु सिंचाई के लिए 42.31लाख के सापेक्ष 20.68 लाख और निजी लघु सिंचाई के लिए 628.20 लाख के सापेक्ष 204.52 लाख ही मिल सके थे। जिसका नतीजा है कि बरपुर, मोथहा, सुल्तानपुर पंप कैनाल समेत कई माइनर की सफाई नहीं हो सकी। जिससे आज भी इन माइनरों में टेल तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है।
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जिला योजना समिति विभिन्न विभागों की योजनाओं के लिए बजट पास जरूर करती है पर धन शासन से जारी किया जाता है। धन के हिसाब से ही विकास कार्य कराया जाना संभव हो पाता है।
गौरव वर्मा
सीडीओ/सचिव जिला योजना समिति
जिला योजना समिति हर साल जिले के विकास का लंबा चौड़ा खाका तैयार कर उसके लिए बजट मंजूर करती है लेकिन साल बीत जाता है और बजट के अभाव में विकास परियोजनाएं अधूरी रह जाती हैं। पेयजल, सिंचाई, और लोक निर्माण विभाग की अधूरी पड़ी कई परियोजनाएं इसी बात की गवाही दे रही हैं। अमर उजाला ने ऐसी ही अधूरी परियोजनाओं की पड़ताल की।
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वर्ष 2017 की जिला योजना में नगरीय पेयजल के लिए समिति ने 65 करोड़ का बजट मंजूर किया था। लेकिन वर्ष के अंत तक महज 1.10 करोड़ का ही बजट मिल सका। यानी जितना बजट जिला योजना समिति ने पास किया था उसका महज 1.69 फीसदी ही बजट मिला। जिसका नतीजा रहा कि शहर में मोहल्ला मीरमस्त, मुल्ला टोला, अबीरगढ़ टोला समेत ऊंचाई वाले कई इलाकों में पाइर लाइन बिछाने, और नए पंप लगाने काम काम अजतक पूरा नहीं हो सका। इसी प्रकार वर्ष 2017 की जिला योजना में ग्रामीण पेयजल ग्राम्य विकास के लिए 55.55 करोड़ का बजट मजूर किया था। लेकिन वर्ष के अंत तक 16.66 करोड़ 75 हजार का ही बजट मिल सका। जिसका नतीजा रहा कि गांवों में बिगड़े पड़े 800 से अधिक इंडिया मार्का टू हैंडपंप आज भी रीबोर कराने और अन्य मरम्मत कार्य की बाट जोह रहे हैं। इसी प्रकार पर्यटन विकास के लिए जिला योजना समिति ने 1.75 करोड़ का बजट पास किया था लेकिन वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक पर्यटन विकास के लिए सिर्फ सात लाख रुपये ही मिल सके थे। राजकीय लघु सिंचाई के लिए 42.31लाख के सापेक्ष 20.68 लाख और निजी लघु सिंचाई के लिए 628.20 लाख के सापेक्ष 204.52 लाख ही मिल सके थे। जिसका नतीजा है कि बरपुर, मोथहा, सुल्तानपुर पंप कैनाल समेत कई माइनर की सफाई नहीं हो सकी। जिससे आज भी इन माइनरों में टेल तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है।
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जिला योजना समिति विभिन्न विभागों की योजनाओं के लिए बजट पास जरूर करती है पर धन शासन से जारी किया जाता है। धन के हिसाब से ही विकास कार्य कराया जाना संभव हो पाता है।
गौरव वर्मा
सीडीओ/सचिव जिला योजना समिति