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गायन और मृदंग के संगम से श्रोता हुए मंत्रमुग्ध
Updated Mon, 08 Oct 2018 12:04 AM IST
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जौनपुर । वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के महंत अवैद्यनाथ संगोष्ठी हाल में शनिवार को आयोजित सांस्कृतिक में कुलपति प्रो. राजाराज त्रिपाठी मृदंग की लय के साथ लहरा देने बैठे तो हाल तालियों से गूंज उठा। उन्होंने भजनों की भी प्रस्तुति की। मृदंगाचार्य पंडित अवधेश महाराज ने रामचंद्र रघुवंश गीत के बोल सुनाए। संगीत संध्या के दूसरे दिन मृदंग वादन और ठुमरी गायन खूब जमा।
मध्य प्रदेश के छतरपुर से आए मृदंगाचार्य पंडित अवधेश महराज ने रामचंद्र रघुवंश गीत के बाद उन्होंने शिव तांडव और कृष्ण परन सुनाई। मृदंगाचार्य की सधी उंगलियों ने लय का ऐसा जादू बिखेरा कि सब आनंद में डूब गए। हारमोनियम पर संगति कुलपति प्रो. राजाराम यादव ने की। कुलपति प्रो. राजाराम यादव ने कहा कि मृदंग के बोल भगवान शंकर के डमरू से निकले हैं। किसी को आनंद प्राप्त करना है तो उसे संगीत के पास आना होगा। उन्होंने राग काफी में ‘करत जोहार मोरे सैयां’ के बाद ठुमरी ‘कौन गली गयो श्याम’ सुनाया। राग मालकौंस में तराना पेश किया। इसके बाद अयोध्या से आए पंडित सत्य प्रकाश मिश्र का शास्त्रीय गायन हुआ। उनके साथ तबले पर संगत पंडित अवधेश ने की। ‘नदिया किनारे मोरा गांव रे सांवरिया आ जइयो’ सुनाया। इसके बाद कथावाचक आचार्य शांतनुजी महाराज ने तीनों कलाकारोँ को स्मृतिचिह्न देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर नवरात्र की तैयारी पर चर्चा हुई। कुलसचिव सुजीत कुमार जायसवाल, वित्त अधिकारी एमके सिंह ,प्रो. अविनाश पार्थीडकर,प्रो. राम नारायण, डा. सतेंद्र प्रताप सिंह, डा. मनराज यादव, डा. वीरेंद्र विक्रम यादव, डा. सुरेंद्र त्रिपाठी, डा. विजय तिवारी, डा. अलोक सिंह, डा. दिग्विजय सिंह राठौर, डा. पुनीत धवन, डा. सुनील कुमार, डा. सुधीर उपाध्याय , डॉ मनीष गुप्ता आदि मौजूद थे।समारोह का संचालन डा. मनोज मिश्र ने किया ।
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मध्य प्रदेश के छतरपुर से आए मृदंगाचार्य पंडित अवधेश महराज ने रामचंद्र रघुवंश गीत के बाद उन्होंने शिव तांडव और कृष्ण परन सुनाई। मृदंगाचार्य की सधी उंगलियों ने लय का ऐसा जादू बिखेरा कि सब आनंद में डूब गए। हारमोनियम पर संगति कुलपति प्रो. राजाराम यादव ने की। कुलपति प्रो. राजाराम यादव ने कहा कि मृदंग के बोल भगवान शंकर के डमरू से निकले हैं। किसी को आनंद प्राप्त करना है तो उसे संगीत के पास आना होगा। उन्होंने राग काफी में ‘करत जोहार मोरे सैयां’ के बाद ठुमरी ‘कौन गली गयो श्याम’ सुनाया। राग मालकौंस में तराना पेश किया। इसके बाद अयोध्या से आए पंडित सत्य प्रकाश मिश्र का शास्त्रीय गायन हुआ। उनके साथ तबले पर संगत पंडित अवधेश ने की। ‘नदिया किनारे मोरा गांव रे सांवरिया आ जइयो’ सुनाया। इसके बाद कथावाचक आचार्य शांतनुजी महाराज ने तीनों कलाकारोँ को स्मृतिचिह्न देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर नवरात्र की तैयारी पर चर्चा हुई। कुलसचिव सुजीत कुमार जायसवाल, वित्त अधिकारी एमके सिंह ,प्रो. अविनाश पार्थीडकर,प्रो. राम नारायण, डा. सतेंद्र प्रताप सिंह, डा. मनराज यादव, डा. वीरेंद्र विक्रम यादव, डा. सुरेंद्र त्रिपाठी, डा. विजय तिवारी, डा. अलोक सिंह, डा. दिग्विजय सिंह राठौर, डा. पुनीत धवन, डा. सुनील कुमार, डा. सुधीर उपाध्याय , डॉ मनीष गुप्ता आदि मौजूद थे।समारोह का संचालन डा. मनोज मिश्र ने किया ।
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