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एक साल में ही खराब हो गई पचास फीसदी से अधिक लाइटें
Updated Sun, 07 Oct 2018 11:56 PM IST
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जौनपुर। 3.42 करोड़ की लागत से शहर की प्रकाश व्यवस्था को सुसज्जित करने के नाम पर भारी खेल हुई है। शहर के मुख्य मार्गों पर लगी जिस लाइट को पांच साल तक रखरखाव की जिम्मेदारी एजेंसी की है वह लाइटें एक साल भी नहीं चल पा रही है। एक साल के भीतर ही पचास फीसदी से अधिक लाइटें खराब हो गई। सभासदों ने भी घटिया लाइट लगाने की शिकायत नगरपालिका अध्यक्ष से की है। घटिया क्वालिटी की लाइट लगाकर शासकीय धन का गोलमाल किया गया है।
शहर की प्रकाश व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए तकरीबन डेढ़ साल पहले टेंडर हुआ था। चंद्रिका इंटर प्राइजेज ने शहर के मुख्य मार्गों पर लाइट लगाने का टेंडर लिया था। करीब 3.42 करोड़ की लागत से शहर में एक हजार लाइट लगनी है। शहर में लगने वाली लाइट के लिए पहली किश्त में जौनपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन से लेकर चहारसू और ओलंदगंज, पालिटेक्निक से लाइन बाजार, चहारसू चौराहे से शाही किला होते हुए सिपाह आदि स्थानों पर तकरीबन 300 लाइटें लगाई गई है। लाइट के लिए बजट की दूसरी किश्त आ चुकी है और बाकी स्थानों पर भी लाइट लगाने का काम शुरू किया गया है। तकरीबन एक साल पहले जितनी लाइटें लगाई गई थी उसमें से पचास फीसदी से अधिक लाइटें खराब हो चुकी हैं। बारिश के समय में भी जगह-जगह लाइट खराब होने से शहर के लोग अंधेरे में रहे। मानिक चौक से सिपाह के बीच करीब पचास लाइटें लगाई गई हैं जिसमें से आधे से अधिक लाइट खराब पड़ी हैं। अमूमन यही हाल जौनपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन से सब्जी मंडीू, नवाब यूसुफ रोड से कोतवाली, चहारसू तक लगाई गई लाइटों की भी है। जबकि एजेंसी को इस शर्त के साथ टेंडर मिला है कि पांच साल तक सभी लाइटों का रख-रखाव और उसकी मरम्मत का काम एजेंसी ही करेंगी। लेकिन सभासदों की शिकायत के बाद भी खराब लाइटों को बदला नहीं जा रहा है। दो चार स्थानों पर खराब लाइट की शिकायत हुई तो वहां सीएफएल लाइट लगा दी गई। जबकि एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाना चाहिए।
जौनपुर। शहर की गलियों में स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए राज्य मुख्यालय से ही टेंडर हुआ है। जौनपुर में लाइट लगाने की जिम्मेदारी ई-एसएल कंपनी को मिला है। जिन पोलों पर पहले से क्लैंप लगे हैं उसी स्थान पर लाइट लगा दी जा रही है। जबकि टेंडर में क्लैंप लगाने की भी शर्त है।
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शहर में जिन स्थानों पर लाइट खराब होने की शिकायत मिली है उसे ठीक करने के लिए एजेंसी को पत्र लिखा गया है।
कृष्ण चंद्र
अधिशासी अधिकारी नगरपालिका परिषद जौनपुर
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शहर की प्रकाश व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए तकरीबन डेढ़ साल पहले टेंडर हुआ था। चंद्रिका इंटर प्राइजेज ने शहर के मुख्य मार्गों पर लाइट लगाने का टेंडर लिया था। करीब 3.42 करोड़ की लागत से शहर में एक हजार लाइट लगनी है। शहर में लगने वाली लाइट के लिए पहली किश्त में जौनपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन से लेकर चहारसू और ओलंदगंज, पालिटेक्निक से लाइन बाजार, चहारसू चौराहे से शाही किला होते हुए सिपाह आदि स्थानों पर तकरीबन 300 लाइटें लगाई गई है। लाइट के लिए बजट की दूसरी किश्त आ चुकी है और बाकी स्थानों पर भी लाइट लगाने का काम शुरू किया गया है। तकरीबन एक साल पहले जितनी लाइटें लगाई गई थी उसमें से पचास फीसदी से अधिक लाइटें खराब हो चुकी हैं। बारिश के समय में भी जगह-जगह लाइट खराब होने से शहर के लोग अंधेरे में रहे। मानिक चौक से सिपाह के बीच करीब पचास लाइटें लगाई गई हैं जिसमें से आधे से अधिक लाइट खराब पड़ी हैं। अमूमन यही हाल जौनपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन से सब्जी मंडीू, नवाब यूसुफ रोड से कोतवाली, चहारसू तक लगाई गई लाइटों की भी है। जबकि एजेंसी को इस शर्त के साथ टेंडर मिला है कि पांच साल तक सभी लाइटों का रख-रखाव और उसकी मरम्मत का काम एजेंसी ही करेंगी। लेकिन सभासदों की शिकायत के बाद भी खराब लाइटों को बदला नहीं जा रहा है। दो चार स्थानों पर खराब लाइट की शिकायत हुई तो वहां सीएफएल लाइट लगा दी गई। जबकि एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाना चाहिए।
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जौनपुर। शहर की गलियों में स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए राज्य मुख्यालय से ही टेंडर हुआ है। जौनपुर में लाइट लगाने की जिम्मेदारी ई-एसएल कंपनी को मिला है। जिन पोलों पर पहले से क्लैंप लगे हैं उसी स्थान पर लाइट लगा दी जा रही है। जबकि टेंडर में क्लैंप लगाने की भी शर्त है।
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शहर में जिन स्थानों पर लाइट खराब होने की शिकायत मिली है उसे ठीक करने के लिए एजेंसी को पत्र लिखा गया है।
कृष्ण चंद्र
अधिशासी अधिकारी नगरपालिका परिषद जौनपुर