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कैमरे तो लगाएं, लेकिन नहीं दिया ट्रेनिंग
Updated Wed, 03 Oct 2018 12:48 AM IST
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जौनपुर। जिला कारागार में सुरक्षा को देखते हुए सीसीटीवी कैमरा तो कोने-कोने पर लगाया गया है लेकिन इसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है। जिसकी वजह से कई कैमरे खराब पड़े हुए हैं। दो बंदी रक्षकों को सेंट्रल जेल वाराणसी में इसके लिए ट्रेंड किया जाना था। लेकिन जो प्रस्ताव थे उसे स्थगित कर दिया गया। एक सिपाही के भरोसे किसी तरह कैमरे चल रहे हैं।
जेल प्रशासन ने प्रथम चक्र में 20 सीसीटीवी कैमरे लगाए। जिसमें 13 कैमरे सक्रिय हैं। इसके बाद दस अतिरिक्त कैमरा लगाया गया जिसमें दो कैमरे खराब पड़े हैं। चलते-चलते कैमरे अचानक काम करना बंद कर देते हैं। इसे ठीक कैसे किया जाए इसकी जानकारी किसी बंदी रक्षक को नहीं है। जिसकी वजह से इसकी उपयोगिता पर सवाल खड़ा हो रहा है। बंदी रक्षक रत्नेश पांडेय को थोड़ी बहुत जानकारी है। जिसके भरोसे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी हो रही है। अभी भी नौ कैमरे खराब पड़े हुए हैं। जिसे ठीक करने के लिए जेल प्रशासन कई बार प्रयास कर चुका लेकिन कैमरे ठीक नहीं हो सके हैं। मुख्य द्वार से लेकर बैरकों के गेट और चहारदीवारी के पीछे लगाए गए कैमरे उपयोगी सिद्ध हो रहे थे। लेकिन तकनीकी खराबी की वजह से इसकी उपयोगिता नहीं रह गई है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक एके मिश्र का कहना है कि कैमरों के खराब होने पर उसे बाहर से तकनीकी जानकारों को बुलाकर ठीक कराया जाता है। उन्होंने कहा कि कोई बंदी रक्षक ट्रेंड नहीं है। इनकी ट्रेनिंग दिलाने के लिए जेल मुख्यालय को पत्र लिखा गया है।
जेल प्रशासन ने प्रथम चक्र में 20 सीसीटीवी कैमरे लगाए। जिसमें 13 कैमरे सक्रिय हैं। इसके बाद दस अतिरिक्त कैमरा लगाया गया जिसमें दो कैमरे खराब पड़े हैं। चलते-चलते कैमरे अचानक काम करना बंद कर देते हैं। इसे ठीक कैसे किया जाए इसकी जानकारी किसी बंदी रक्षक को नहीं है। जिसकी वजह से इसकी उपयोगिता पर सवाल खड़ा हो रहा है। बंदी रक्षक रत्नेश पांडेय को थोड़ी बहुत जानकारी है। जिसके भरोसे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी हो रही है। अभी भी नौ कैमरे खराब पड़े हुए हैं। जिसे ठीक करने के लिए जेल प्रशासन कई बार प्रयास कर चुका लेकिन कैमरे ठीक नहीं हो सके हैं। मुख्य द्वार से लेकर बैरकों के गेट और चहारदीवारी के पीछे लगाए गए कैमरे उपयोगी सिद्ध हो रहे थे। लेकिन तकनीकी खराबी की वजह से इसकी उपयोगिता नहीं रह गई है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक एके मिश्र का कहना है कि कैमरों के खराब होने पर उसे बाहर से तकनीकी जानकारों को बुलाकर ठीक कराया जाता है। उन्होंने कहा कि कोई बंदी रक्षक ट्रेंड नहीं है। इनकी ट्रेनिंग दिलाने के लिए जेल मुख्यालय को पत्र लिखा गया है।
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