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पितरों को तर्पण देने का सिलसिला है जारी
Updated Sat, 29 Sep 2018 12:44 AM IST
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सतहरिया। मुंगरा बादशाहपुर कस्बे सहित आसपास के इलाकों से पितृ पक्ष अश्विन कृष्ण प्रतिपर्दा से गया जाने, पितरों को तर्पण देने, पिण्ड दान करने वश्राद्ध कर्म करने का सिलसिला शुरू हो गया है। घरों व तालाबों पर अपने पितरों को याद करते हुए लोगों ने पिंडदान व कुश, अक्षत के साथ पुष्पांजलि दी। गुरुवार की देर शाम को मुंगराबादशाहपुर कस्बे के विभिन्न मोहल्लों से तुलसी राम स्वर्णकार, अनिल कुमार गोलन, शिवप्रसाद गुप्त, राधेश्याम मल्लू, बद्री प्रसाद साहू सहित दर्जन भर लोग अपने पत्नी के साथ पिंडदान हेतु गया ( विहार) के लिए प्रस्थान किए। श्राद्ध कर्म यात्रा धूमधाम से गांजे बाजे के साथ निकाली गई। श्राद्ध कर्म हेतु गया जाने वाले लोगों से मिलते जुलते चल रहे थे और शक्ति पीठ मां काली मंदिर में माथा टेक कर दुस्टनाशक मां काली मइया का आर्शीवाद लिया। मां काली के जायकारों से मंदिर परिसर गूंज उठा। उन्हें छोड़ने के लिए नर नारियों तथा बच्चों का जनसैलाब उमड़ा था।
पितृ दोष दूर करने में पिंडदान फलदाई
सतहरिया।मुंगराबादशाहपुर के बभनौटी मोहल्ला निवासी आचार्य पंडित सिद्धार्थ त्रिपाठी ने पितृपक्ष के महत्व पर चर्चा करते हुए बताया कि पिंडदान करने व तर्पण देने से पितरों का भटकाव दूर होने और व्यक्तियों को पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। श्राद्ध कर्म पितृपक्ष अश्विन कृष्ण प्रतिपर्दा से प्रारंभ होकर पितृ विसर्जन अमावस्या तक होता है। उन्होंने कहा कि गया क्षेत्र के 54 वेदियों पर पिंडदान का विशेष महत्व होता है। यही पितृ ऋण से छुटकारा दिलाता है। विस्णु पद प्रेत शिला पर जाने से व्यक्ति के 101 कुलों का उद्धार हो जाता है।
पितृ दोष दूर करने में पिंडदान फलदाई
सतहरिया।मुंगराबादशाहपुर के बभनौटी मोहल्ला निवासी आचार्य पंडित सिद्धार्थ त्रिपाठी ने पितृपक्ष के महत्व पर चर्चा करते हुए बताया कि पिंडदान करने व तर्पण देने से पितरों का भटकाव दूर होने और व्यक्तियों को पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। श्राद्ध कर्म पितृपक्ष अश्विन कृष्ण प्रतिपर्दा से प्रारंभ होकर पितृ विसर्जन अमावस्या तक होता है। उन्होंने कहा कि गया क्षेत्र के 54 वेदियों पर पिंडदान का विशेष महत्व होता है। यही पितृ ऋण से छुटकारा दिलाता है। विस्णु पद प्रेत शिला पर जाने से व्यक्ति के 101 कुलों का उद्धार हो जाता है।
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