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आत्महत्या करना मानव जीवन में अभिशाप

Thu, 19 Jul 2018 01:32 AM IST
Updated Thu, 19 Jul 2018 01:32 AM IST
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आत्महत्या करना मानव जीवन में अभिशाप

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सुजानगंज। क्षेत्र के सुजानगंज बाजार में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन काशी से पधारे आचार्य गणेश महाराज ने कहा कि जो मानव आक्रोश में आकर आत्महत्या कर अपनी जीवन लीला समाप्त कर लेता है। उस शरीर की आत्मा प्रेत योनि में ही भटकती रहती है। इस धरती का सबसे बड़ा पापी वही है जो आत्महत्या जैसा घृणित कार्य करता है। बच्चों के संस्कार पर विशेष बल देते हुए कहा कि संस्कार से ही समाज और देश को समृद्ध बनाया जा सकता है। प्रवचन के दौरान कहा कि वह व्यक्ति अपने जीवन काल में कभी भी सुख की अनुभूति नहीं करता जो अपने माता पिता की सेवा नहीं करता। ऐसे अधर्मी पुत्र की सेवा भगवान भी स्वीकार नहीं करते। इस अवसर पर व्यवस्थापक अंशू त्रिपाठी, राजेंद्र प्रसाद त्रिपाठी, चंद्रजीत यादव, सुधीर तिवारी, दिवाकर तिवारी आदि उपस्थित रहे।
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