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सिद्धि प्राप्ति का महापर्व है गुप्त नवरात्र
Updated Sat, 14 Jul 2018 12:29 AM IST
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मछलीशहर। पौराणिक मान्यताओं के आधार पर अषाढ़ शुक्ला प्रतिपदा से नवमी तक की तिथि ‘गुप्त नवरात्र’ के रूप में जानी जाती है। इन तिथियों में देवी के उपासक सिद्धि प्राप्त करने के लिए गुप्त रूप से भगवती का अनुष्ठान व पूजन कर मां की कृपा प्राप्त करते है। इसीलिए इसे ‘गुप्त नवरात्र’ कहते है। मां की कृपा और सिद्धि-प्राप्त करने के लिए यह महापर्व है। उक्त बातें नगर स्थित कालीमाता मन्दिर प्रांगण में आयोजित एक धार्मिक गोष्ठी के द्वौरान विद्वानों ने कही। गोष्ठी में गुप्त नवरात्रि में देवीपूजा से होने वाले लाभ की जानकारी उपस्थित लोगों को दी गयी। ज्योतिषविद डा. शैलेश मोदनवाल ने बताया कि आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्र का संयोग 13 से 21 जुलाई तक मिल रहा है।
गुप्त नवरात्रि में श्रद्धा भक्ति संग शक्ति की अधिष्ठात्री देवी मां दुर्गा की कृपा प्राप्ति के लिए की जाने वाली अर्चना विशेष फलीभूत है। नवरात्र की प्रत्येक तिथि मां को समर्पित होने के कारण अत्यधिक पावन मानी जाती है। डा. टीपी त्रिपाठी ने देवी के अथर्व शीर्ष के महत्व के विषय में उपस्थित लोगों को बताया कि देवी का अथर्व शीर्ष पुण्यदायी है। इसका जाप करने से पांचों अथर्व शीर्ष के जाप का फल मिल जाता है और दस बार इसका पाठ करने पर याचक उसी क्षण पापों से मुक्त हो जाता हैं। अर्चासिद्धि, वाकसिद्धि, स्वत: प्राप्त होने लगती है। जो व्यक्ति अमृत सिद्धियोग में इसका जाप करता है वह महामृत्यु से तर जाता है। पं. मुरारीश्याम पांडेय ने कहा कि सहस्त्रनाम स्तोत्र के द्वारा पूजित मां दुर्गा भक्तों को भय से मुक्त कर देती है। उन्होंने अढ़उल, गुलाब, बेला व लाल रंग के पुष्प, दौने की माला, बिल्वपत्र, लालचुनरी, नारियल, लालचन्दन, कुमकुम, सुगंधित इत्र व घृत-गुग्गुल का धूपादि अर्पित कर मां की अर्चना को विशेष फलीभूत होने की बात कही। इस दौरान राजेश अग्रहरि, पं. देवीप्रसाद मिश्र, पं. कपिलदेव मिश्र, पं. जयनारायण पांडेय, पं. जयानन्द आदि रहे।
गुप्त नवरात्रि में श्रद्धा भक्ति संग शक्ति की अधिष्ठात्री देवी मां दुर्गा की कृपा प्राप्ति के लिए की जाने वाली अर्चना विशेष फलीभूत है। नवरात्र की प्रत्येक तिथि मां को समर्पित होने के कारण अत्यधिक पावन मानी जाती है। डा. टीपी त्रिपाठी ने देवी के अथर्व शीर्ष के महत्व के विषय में उपस्थित लोगों को बताया कि देवी का अथर्व शीर्ष पुण्यदायी है। इसका जाप करने से पांचों अथर्व शीर्ष के जाप का फल मिल जाता है और दस बार इसका पाठ करने पर याचक उसी क्षण पापों से मुक्त हो जाता हैं। अर्चासिद्धि, वाकसिद्धि, स्वत: प्राप्त होने लगती है। जो व्यक्ति अमृत सिद्धियोग में इसका जाप करता है वह महामृत्यु से तर जाता है। पं. मुरारीश्याम पांडेय ने कहा कि सहस्त्रनाम स्तोत्र के द्वारा पूजित मां दुर्गा भक्तों को भय से मुक्त कर देती है। उन्होंने अढ़उल, गुलाब, बेला व लाल रंग के पुष्प, दौने की माला, बिल्वपत्र, लालचुनरी, नारियल, लालचन्दन, कुमकुम, सुगंधित इत्र व घृत-गुग्गुल का धूपादि अर्पित कर मां की अर्चना को विशेष फलीभूत होने की बात कही। इस दौरान राजेश अग्रहरि, पं. देवीप्रसाद मिश्र, पं. कपिलदेव मिश्र, पं. जयनारायण पांडेय, पं. जयानन्द आदि रहे।
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