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गोमती नदी की गोंद में बस गई कालोनी
Updated Wed, 27 Jun 2018 12:44 AM IST
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जौनपुर। गोमती नदी के जल स्तर में जिस रफ्तार से कमी आ रही उसी रफ्तार से नदी का दायरा भी सिमटता जा रहा है। शहरी इलीके में नदी की बेशकीमती जमीन पर भू माफियाओं की नजर गड़ चुकी है। यही वजह है कि नदी की गोद में कालोनियां बसने लगी हैं। ऐसे में बाढ़ के लिहाज से शहर का कटघरा इलाका सबसे संवेदनशील है। इसी मोहल्ले में नदी के उन इलाकों इमारतें बन गई हैं जहां से कभी पानी बहता था। निकट भविष्य में कभी नदी में बाढ़ आई तो उसका खामियाजा पूरे शहर को भुगतना होगा।
गोमती नदी शहर में कटघरा मोहल्ले से ही प्रवेश करती है और करीब छह से आठ किलोमीटर की दूरी तय करते हुए हरईपुर के पास शहर से बाहर प्रवेश करती है। शहर वाले इलाके में नदी के छोर पर कई स्थानों पर अतिक्रमण कर निर्माण कर लिया गया है। अभी कोई 10 से 15 साल पहले जहां से नदी के पानी का बहाव होता था वहां भी मकान बन गए हैं। इसकी रखवाली के लिए जिम्मेदार पहरुए भी चुप्पी साधे हुए हैं और भू माफिया नदी की जमीन की प्लाटिंग कर रहे हैं। गोमती नदी के दोनों छोर पर निर्माण होने से नदी का दायरा सिमट रहा है। अगर कभी नदी में बाढ़ आई तो नदी के ऊपरी इलाके के लोगों को इसका दुष्परिणाम भुगतना होगा। नदी में जब भी बाढ़ आती है तो सबसे पहले कटघरा मोहल्ले में ही पानी भरता है। और मौजूदा समय में चार से पांच साल के भीतर इस इलाके में नदी की गोंद में कालोनी बस गई है। दो से चार मंजिला तक की कई इमारतें खड़ी हो गई हैं। इस संबंध में सिटी मजिस्ट्रेट योगानंद पांडेय का कहना है कि नदी की जमीन पर अतिक्रमण कर निर्माण कराने की जानकारी उन्हें नहीं हैं। अगर ऐसा है तो जांच कराकर संबंधित को नोटिस दी जाएगी और जमीन को खाली कराया जाएगा।
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गोमती नदी शहर में कटघरा मोहल्ले से ही प्रवेश करती है और करीब छह से आठ किलोमीटर की दूरी तय करते हुए हरईपुर के पास शहर से बाहर प्रवेश करती है। शहर वाले इलाके में नदी के छोर पर कई स्थानों पर अतिक्रमण कर निर्माण कर लिया गया है। अभी कोई 10 से 15 साल पहले जहां से नदी के पानी का बहाव होता था वहां भी मकान बन गए हैं। इसकी रखवाली के लिए जिम्मेदार पहरुए भी चुप्पी साधे हुए हैं और भू माफिया नदी की जमीन की प्लाटिंग कर रहे हैं। गोमती नदी के दोनों छोर पर निर्माण होने से नदी का दायरा सिमट रहा है। अगर कभी नदी में बाढ़ आई तो नदी के ऊपरी इलाके के लोगों को इसका दुष्परिणाम भुगतना होगा। नदी में जब भी बाढ़ आती है तो सबसे पहले कटघरा मोहल्ले में ही पानी भरता है। और मौजूदा समय में चार से पांच साल के भीतर इस इलाके में नदी की गोंद में कालोनी बस गई है। दो से चार मंजिला तक की कई इमारतें खड़ी हो गई हैं। इस संबंध में सिटी मजिस्ट्रेट योगानंद पांडेय का कहना है कि नदी की जमीन पर अतिक्रमण कर निर्माण कराने की जानकारी उन्हें नहीं हैं। अगर ऐसा है तो जांच कराकर संबंधित को नोटिस दी जाएगी और जमीन को खाली कराया जाएगा।
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