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बजट के बावजूद जिला अस्पताल में दवाओं की कमी
Updated Wed, 06 Jun 2018 12:07 AM IST
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जौनपुर। बजट बावजूद भी जिला अस्पताल में दवाओं की कमी है। मरीजों को बुखार. पेट दर्द. उल्टी दस्त, सांस, मधुमेह और रक्तचाप की दवाएं तक नहीं मिल रही हैं। मजबूरी में गरीब मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ रही है। जिला अस्पताल में पर्ची काउंटर पर मरीजों की भीड़ लगी रहती है लेकिन आजकल दवा काउंटर पर सन्नाटा पसरा रहता है।
जिला अस्पताल में अप्रैल, मई व जून माह में दवा के लिए 25 लाख रुपये का बजट जारी हुआ है। इसमें सात लाख रुपये दवा का लोकल पर्चेज और 18 लाख रुपये शासन से निर्धारित दवा सप्लाई करने वाले वेंडर से लेनी है। वेंडर दवाओं की आपूर्ति समय से नहीं कर रहा है, जिसके चलते तमाम दवाओं की कमी हो गई है। मौजूदा समय में जिला अस्पताल में इस समय कुल 77 दवाएं नहीं हैं, जिसमें जेंटामाइसिन, पैरासेटामाल, ओआरएस, थीयोफाइलिन, एमलोडिपीन, डोमपेरीडोन, मेटफारमीन, डाक्सीसाइक्लिन, डेक्सामेथासोन, टोबरामाइसिन आई ड्राप, एक्सीक्लोफिनेक, सिप्रोफ्लाक्सिन व सेफट्रीयाक्सोन जैसी रोजमर्रा उपयोग में आने वाली औषधियां और एंटीबायोटिक शामिल हैं। पैरासेटामाल बुखार में काम आती है जबकि ओआरएस की जरूरत डायरिया के रोगियों को होती है, जो इन दिनों की सामान्य बीमारी है।
जिला अस्पताल में ग्रामीण क्षेत्रों से मरीज अपना इलाज कराने आते हैं। वहीं सभी सीएचसी व पीएचसी पर भी भर्ती गंभीर मरीज जिला अस्पताल रेफर होकर आते हैं। जिला अस्पताल में चार दिनों तक मरीजों के आने का आंकड़ों पर गौर किया जाए तो एक जून को 907, दो जून को 901, चार जून को 1286 और पांच जून को 1400 मरीज ओपीडी में अपना पंजीकरण कराए। दवा नहीं रहने से चिकित्सक मरीजों को बाहर से दवाएं लिख रहे हैं। गंभीर अवस्था में भी भर्ती मरीजों के परिजनों को कई दवाएं बाहर से ही खरीदना होता है। ऐसे में जिला अस्पताल प्राइवेट अस्पताल जैसा हो गया है। सीएमएस डा. एसके पांडेय ने बताया कि अप्रैल माह से लेकर अब तक पांच लाख रुपये की दवा लोकल पर्चेज की गई है। इसमें से अधिकांश दवाएं इमरजेंसी मरीजों के इलाज के लिए चली जाती है।
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बोले मरीज, नहीं मिलती दवाएं
जौनपुर। नसीफ सराय निवासी सिकंदर यादव ने बताया कि पैर में दर्द हो रहा था। जिसे दिखाने के लिए जिला अस्पताल आया था। सभी दवाएं बाहर से लिख दी गई हैं। मेहरावां निवासिनी शिखा सिंह ने कहा कि आंख दिखाने के लिए जिला अस्पताल आए थे। दवा बाहर से खरीदना पड़ा। लाइन बजार निवासिनी मधु ने बताया कि पेट में दिक्कत थी। जिसे चिकित्सक को दिखाया। लेकिन दवा नहीं रहने की बात कहते हुए बाहर से दवा लिख दिए हैं। फत्तूपुर अजोशी निवासी प्रमोद यादव ने कहा कि सीने में दर्द थै। जिसे चिकित्सक को दिखाया। लेकिन उनके द्वारा बाहर से दवा लिख दी गई।
शासन से निर्धारित दवा के वेंडर को अप्रैल माह में आन लाइन पत्र भेजकर 77 दवाओं की मांग गई है। लेकिन अभी तक उसके द्वारा दवा नहीं भेजी गई है। जिसके कारण मरीजों को दवा बाहर से लिखी जा रही है। इसकी सूचना पत्र के माध्यम से मुख्यालय पर दे दी गई है। हालांकि लोकल पर्चेज द्वारा आवश्यक कुछ दवाएं मंगाई जा रही हैं।-डा.एसके पांडेय, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
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जिला अस्पताल में अप्रैल, मई व जून माह में दवा के लिए 25 लाख रुपये का बजट जारी हुआ है। इसमें सात लाख रुपये दवा का लोकल पर्चेज और 18 लाख रुपये शासन से निर्धारित दवा सप्लाई करने वाले वेंडर से लेनी है। वेंडर दवाओं की आपूर्ति समय से नहीं कर रहा है, जिसके चलते तमाम दवाओं की कमी हो गई है। मौजूदा समय में जिला अस्पताल में इस समय कुल 77 दवाएं नहीं हैं, जिसमें जेंटामाइसिन, पैरासेटामाल, ओआरएस, थीयोफाइलिन, एमलोडिपीन, डोमपेरीडोन, मेटफारमीन, डाक्सीसाइक्लिन, डेक्सामेथासोन, टोबरामाइसिन आई ड्राप, एक्सीक्लोफिनेक, सिप्रोफ्लाक्सिन व सेफट्रीयाक्सोन जैसी रोजमर्रा उपयोग में आने वाली औषधियां और एंटीबायोटिक शामिल हैं। पैरासेटामाल बुखार में काम आती है जबकि ओआरएस की जरूरत डायरिया के रोगियों को होती है, जो इन दिनों की सामान्य बीमारी है।
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जिला अस्पताल में ग्रामीण क्षेत्रों से मरीज अपना इलाज कराने आते हैं। वहीं सभी सीएचसी व पीएचसी पर भी भर्ती गंभीर मरीज जिला अस्पताल रेफर होकर आते हैं। जिला अस्पताल में चार दिनों तक मरीजों के आने का आंकड़ों पर गौर किया जाए तो एक जून को 907, दो जून को 901, चार जून को 1286 और पांच जून को 1400 मरीज ओपीडी में अपना पंजीकरण कराए। दवा नहीं रहने से चिकित्सक मरीजों को बाहर से दवाएं लिख रहे हैं। गंभीर अवस्था में भी भर्ती मरीजों के परिजनों को कई दवाएं बाहर से ही खरीदना होता है। ऐसे में जिला अस्पताल प्राइवेट अस्पताल जैसा हो गया है। सीएमएस डा. एसके पांडेय ने बताया कि अप्रैल माह से लेकर अब तक पांच लाख रुपये की दवा लोकल पर्चेज की गई है। इसमें से अधिकांश दवाएं इमरजेंसी मरीजों के इलाज के लिए चली जाती है।
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बोले मरीज, नहीं मिलती दवाएं
जौनपुर। नसीफ सराय निवासी सिकंदर यादव ने बताया कि पैर में दर्द हो रहा था। जिसे दिखाने के लिए जिला अस्पताल आया था। सभी दवाएं बाहर से लिख दी गई हैं। मेहरावां निवासिनी शिखा सिंह ने कहा कि आंख दिखाने के लिए जिला अस्पताल आए थे। दवा बाहर से खरीदना पड़ा। लाइन बजार निवासिनी मधु ने बताया कि पेट में दिक्कत थी। जिसे चिकित्सक को दिखाया। लेकिन दवा नहीं रहने की बात कहते हुए बाहर से दवा लिख दिए हैं। फत्तूपुर अजोशी निवासी प्रमोद यादव ने कहा कि सीने में दर्द थै। जिसे चिकित्सक को दिखाया। लेकिन उनके द्वारा बाहर से दवा लिख दी गई।
शासन से निर्धारित दवा के वेंडर को अप्रैल माह में आन लाइन पत्र भेजकर 77 दवाओं की मांग गई है। लेकिन अभी तक उसके द्वारा दवा नहीं भेजी गई है। जिसके कारण मरीजों को दवा बाहर से लिखी जा रही है। इसकी सूचना पत्र के माध्यम से मुख्यालय पर दे दी गई है। हालांकि लोकल पर्चेज द्वारा आवश्यक कुछ दवाएं मंगाई जा रही हैं।-डा.एसके पांडेय, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक