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समय रहते नहीं चेते तो बूंद-बूंद पानी के लिए तरसेगें लोग
Updated Tue, 05 Jun 2018 11:56 PM IST
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जौनपुर। विश्व पर्यावरण दिवस मंगलवार को जगह-जगह प्रदूषण जागरूकता रैली निकाल कर सभी को प्रदूषण से होने वाले नुकसान को बताया गया। गोष्ठी में प्रदूषण कम करने के उपाय पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि यदि समय रहते हम नहीं चेते तो एक-एक बूंद पानी के लिए तरस जाएंगे। भूगर्भ जल स्तर को बचाए रखने के लिए पौधरोपण करने की अपील की गई। प्राकृतिक संपदा के दोहन पर भी अंकुश लगाने पर चर्चा हुई।
कंरजाकला: वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग एवं राष्ट्रीय सेवा योजना की ओर से पर्यावरण दिवस पर प्रो. वीडी शर्मा की अध्यक्षता में गोष्ठी का आयोजन किया गया। शिक्षकों ने कहा कि हमें थ्री आर कांसेप्ट के तहत रिड्यूस, री यूज, री साइकिल पर काम करते हुए पर्यावरण को संरक्षित करने की जरूरत है। कुलसचिव सुजीत कुमार जायसवाल ने कहा कि बच्चों को बढ़ चढ़कर पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए तैयार रहना चाहिए। एनएसएस के संयोजक डा. राकेश यादव, टेक्नोलॉजी विभाग के डा. प्रदीप कुमार, डा. विवेक कुमार पांडेय, डा. सुधीर कुमार उपाध्याय, डा. अमरेंद्र सिंह, राजीव कुमार, डा. दिग्विजय सिंह राठौर आदि ने विचार व्यक्त किया। संचालन डा. विनय कुमार वर्मा ने किया।
टीडी पीजी कालेज सभागार में जागरूकता गोष्ठी में प्रबंध समिति के अध्यक्ष प्रो. श्रीप्रकाश सिंह, प्रबंधक अशोक कुमार सिंह, प्राचार्य डा. विनोद कुमार सिंह, डा. विक्रम प्रताप सिंह, डा. रजनीश सिंह ने पर्यावरण प्रदूषण के प्रति सभी को जागरूक किया। आयोजक डा. वंश, डा. विजेंद्र सिंह आदि ने विचार व्यक्त किया। वक्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण के लिए सभी से आगे आने की अपील की। गायत्री शक्तिपीठ लाइन बाजार में पौधरोपण किया गया। प्रबंधक विश्वनाथ सिंह, श्रीराम सिंह, इंद्रपति मिश्र, शिवनारायण मिश्र आदि ने विचार व्यक्त किया।
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सिंगरामऊ: गौरीशंकर मंदिर स्थित ठाकुरवाड़ी महिला विकास कल्याण समिति की ओर से विश्व पर्यावरण दिवस पर जागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया गया। संस्था की सचिव कुंवर रानी डा. अंजू सिंह ने प्लास्टिक का बहिष्कार करने की बात कही। इस अवसर पर बच्चों में स्लोगन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें सीमा, सुरेखा, पूर्णिमा, प्रज्ञा, तथा कंचन को पुरस्कृत किया गया।
बदलापुर: सल्तनत बहादुर महाविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना के छात्र-छात्राओं ने कालेज परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। प्राचार्य डा. ब्रजेंद्र सिंह, प्रबंधक विनोद कुमार सिंह, डा. राम मोहन अस्थाना, डा. पवन सिंह, डा. अशेष उपाध्याय ने पृथ्वी पर जीवन बचाने के लिए पौधरोपण किया। डोभी: श्री गणेश राय पीजी कालेज डोभी में विश्व पर्यावरण दिवस पर संगोष्ठी का आयोजन कर सभी को प्रदूषण के लिए जागरूक किया गया। वनस्पति विज्ञान के विभागाध्यक्ष डा .हर्षवर्धन सिंह नेएक हालिया रिपोर्ट के अनुसार भारत के चार बड़े शहरों बंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली और मुंबई में सुबह के समय वायु प्रदूषण सबसे अधिक होता है। नेहरू युवा केंद्र की ओर से स्वच्छता अभियान चलाकर पौधरोपण किया। समन्वयक राजीव कुमार मिश्र पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। भ्रष्टाचार मुक्ति संघर्ष ने जिलाध्यक्ष राना सिंह के नेतृत्व में पर्यावरण दिवस मनाया। इस मौके पर अंकित, विशाल, कृपा, फैजान, अर्जुन आदि मौजूद थे।
सिकरारा। जिले की पांच प्रमुख नदियों में से एक सई के सामने अस्तित्व बचाने के चुनौती खड़ी हो गई है। इस पावन नदी का वर्णन गोस्वामीजी की कालजयी रचना श्रीराम चरित मानस में भी है। इस नदी को वैदिक काल से विशेष स्थान मिला है। राम कथा में तुलसी दास जी ने श्री राम चरित मानस के राम वन गमन के प्रसंग में- सई उतरी गोमती नहाये, लिखकर यह प्रमाणित कर दिया िक सई और गोमती का अस्तित्व अवध की सरयू घाघरा के साथ काफी प्राचीन रहा है। पानी की कमी के कारण इतनी प्राचीन नदियों के जीवन के सामने संकट खड़ा हो गया है। खगोल शास्त्र में रुचि रखने वाले इण्टर कालेज शाहपुर के प्रधानाचार्य तथा सिकरारा के पूर्व प्रमुख सुधाकर उपाध्याय बताते हैं कि इस नदी का उद्गम स्थल हरदोई जिले का एक ताल है जहां से निकल कर लगभग चार सौ किमी की दूरी तय करते हुए सिरकोनी क्षेत्र के राजेपुर गॉव स्थित त्रिमुहानी में गोमती नदी में मिल जाती है। जिला पंचायत अध्यक्ष राज बहादुर यादव का कहना है कि सई नदी हमारे जनपद की ऐतिहासिक धरोहर है। इसका संरक्षण करना हम सभी का कर्तव्य है।
मछलीशहर। वनों की कटाई और खेती का दायरा शहरीकरण के कारण तेजी से सिमट रहा है। नियमों की अनदेखी कर कृषि योग्य भूमि का धड़ल्ले से व्यवसायिक उपयोग किया जा रहा है। इससे हरित पट्टी का दायरा लगातार सिकुड़ता जा रहा है जो पर्यावरण में खतरा बढ़ा रहा है। प्रशासन से बिना अनुमति लिए बिना ही प्लाटिंग कर कृषि भूमि पर मकान बनाए जा रहे हैं। अखिल भारतीय किसान मजदूर यूनियन के संयुक्त मंत्री जयलाल सरोज का कहना है कि खेती की भूमि का पूंजीपति अपने लाभ में इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे पर्यावरण का संतुलन बिगड़ रहा है। नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी धीरज सिंह का कहना है कि बिना नक्शा पास कराए ही नगर से सटी कृषि भूमि पर कुछ लोग कालोनी बसा रहे हैं। ऐसे लोगों को चिह्नित कर नोटिस भेजी जा रही है। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
बदलापुर/ घनश्यामपुर। क्षेत्र के कई गांवों के किसानों के लिए कभी वरदान कही जाने वाली पीली नदी पानी के बिना दुबली हो गई है। जिसके कारण आस पास के गांवों के लोगों के साथ पशु-पक्षियों के सामने पेयजल संकट खड़ा हो गया है। नदी सूख जाने के कारण खजुरन, पहितियापुर , रामपुर , मरगूपुर , दुगौली , कस्तूरीपुर , ऊदपुरगेल्हवा , डढ़िया आदि गांवों के हैंडपंप तथा पम्पिंग सेट भी पानी देना बंद कर दिए है। जानकारी के बाद भी सिंचाई विभाग और प्रशासन जल प्रबंधन का इंतजाम करने में नाकाम है। मछुआ समुदाय के कस्तूरीपुर गांव निवासी भूलन राम केवट, बाबूलाल केवट, लालजी केवट, दूधनाथ केवट का कहना है कि उनके सामने रोजी रोटी के लाले पड़ गए हैं।
बदलापुर/घनश्यामपुर। क्षेत्र के बरौली गांव निवासी त्रिवेणी सिंह का आम का बगीचा जिले में विशेष स्थान रखता है। 120 बीघा क्षेत्रफल में 27 सौ प्रजाति के पेड़ पौधे लगाए गए हैं। पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ लाखों रुपये का मुनाफा प्रति वर्ष इस बगीचे से होता है। उनके बड़े पुत्र अनिल कुमार सिंह ने बताया कि 1980 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी जब बदलापुर आए थे तब उन्होंने बगीचा तैयार करने की नसीहत दी थी। उन्हीें की प्रेरणा से ही बगीचे में दशहरी, लंगड़ा, फजली, सफेदा, चौसा आदि प्रजाति के आम लगाए गए हैं। बगीचे की सिंचाई हेतु चार पंपिंग सेट भी लगाए गए हैं। त्रिवेणी सिंह का बगीचा हरियाली, पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ अच्छा आय का स्रोत बना हुआ है।
मुंगराबादशाहपुर। क्षेत्र के बिझवनियां के पूरा (गौरैयाडीह) गांव निवासी पर्यावरण विद् व रिटायर शिक्षक चंद्र बहादुर सिंह बचपन से ही पेड़ लगाने में रुचि रखते हैं। गांव में उनकी डेढ सौ बीघे है भूमि है। 100 बीघे में तरह तरह के पेड़ तो 50 बीघे मे अपने दम पर खेती करते हैं। उन्होंने 2500 पेड़ लगा रखे हैं। जिसमे आम, अमरूद, आंवला, लीची, मुसम्मी, केला, संतरा, चीकू, नीबू, सेब, बेर आदि के हैं। धौरहरा, नीभापुर, सटवां, गौरैयाडीह, सोहांसा, काक्षीडीह, रामनगर सहित कई गांवों में स्वयं के खर्च से सैकड़ों आम नीम पीपल के पेड़ लगा चुके है। पर्यावरण पर वह अब तक वह दिल्ली, लखनऊ, वाराणसी, इलाहाबाद, कानपुर में व्याख्यान दे चुके हैं। उनका कहना है कि अगर पेड़ नहीं रहा तो हमारी आने वाली नस्लों का जीना दुश्वार हो जाएगा। बरसठी के परियत बाजार में बसपा प्रभारी अशोक कुमार सिंह ने पौधरोपण किया। इस मौके पर शीतला प्रसाद, टु्न्ना आदि मौजूद थे।
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कंरजाकला: वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग एवं राष्ट्रीय सेवा योजना की ओर से पर्यावरण दिवस पर प्रो. वीडी शर्मा की अध्यक्षता में गोष्ठी का आयोजन किया गया। शिक्षकों ने कहा कि हमें थ्री आर कांसेप्ट के तहत रिड्यूस, री यूज, री साइकिल पर काम करते हुए पर्यावरण को संरक्षित करने की जरूरत है। कुलसचिव सुजीत कुमार जायसवाल ने कहा कि बच्चों को बढ़ चढ़कर पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए तैयार रहना चाहिए। एनएसएस के संयोजक डा. राकेश यादव, टेक्नोलॉजी विभाग के डा. प्रदीप कुमार, डा. विवेक कुमार पांडेय, डा. सुधीर कुमार उपाध्याय, डा. अमरेंद्र सिंह, राजीव कुमार, डा. दिग्विजय सिंह राठौर आदि ने विचार व्यक्त किया। संचालन डा. विनय कुमार वर्मा ने किया।
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बदलापुर: सल्तनत बहादुर महाविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना के छात्र-छात्राओं ने कालेज परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। प्राचार्य डा. ब्रजेंद्र सिंह, प्रबंधक विनोद कुमार सिंह, डा. राम मोहन अस्थाना, डा. पवन सिंह, डा. अशेष उपाध्याय ने पृथ्वी पर जीवन बचाने के लिए पौधरोपण किया। डोभी: श्री गणेश राय पीजी कालेज डोभी में विश्व पर्यावरण दिवस पर संगोष्ठी का आयोजन कर सभी को प्रदूषण के लिए जागरूक किया गया। वनस्पति विज्ञान के विभागाध्यक्ष डा .हर्षवर्धन सिंह नेएक हालिया रिपोर्ट के अनुसार भारत के चार बड़े शहरों बंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली और मुंबई में सुबह के समय वायु प्रदूषण सबसे अधिक होता है। नेहरू युवा केंद्र की ओर से स्वच्छता अभियान चलाकर पौधरोपण किया। समन्वयक राजीव कुमार मिश्र पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। भ्रष्टाचार मुक्ति संघर्ष ने जिलाध्यक्ष राना सिंह के नेतृत्व में पर्यावरण दिवस मनाया। इस मौके पर अंकित, विशाल, कृपा, फैजान, अर्जुन आदि मौजूद थे।
सिकरारा। जिले की पांच प्रमुख नदियों में से एक सई के सामने अस्तित्व बचाने के चुनौती खड़ी हो गई है। इस पावन नदी का वर्णन गोस्वामीजी की कालजयी रचना श्रीराम चरित मानस में भी है। इस नदी को वैदिक काल से विशेष स्थान मिला है। राम कथा में तुलसी दास जी ने श्री राम चरित मानस के राम वन गमन के प्रसंग में- सई उतरी गोमती नहाये, लिखकर यह प्रमाणित कर दिया िक सई और गोमती का अस्तित्व अवध की सरयू घाघरा के साथ काफी प्राचीन रहा है। पानी की कमी के कारण इतनी प्राचीन नदियों के जीवन के सामने संकट खड़ा हो गया है। खगोल शास्त्र में रुचि रखने वाले इण्टर कालेज शाहपुर के प्रधानाचार्य तथा सिकरारा के पूर्व प्रमुख सुधाकर उपाध्याय बताते हैं कि इस नदी का उद्गम स्थल हरदोई जिले का एक ताल है जहां से निकल कर लगभग चार सौ किमी की दूरी तय करते हुए सिरकोनी क्षेत्र के राजेपुर गॉव स्थित त्रिमुहानी में गोमती नदी में मिल जाती है। जिला पंचायत अध्यक्ष राज बहादुर यादव का कहना है कि सई नदी हमारे जनपद की ऐतिहासिक धरोहर है। इसका संरक्षण करना हम सभी का कर्तव्य है।
मछलीशहर। वनों की कटाई और खेती का दायरा शहरीकरण के कारण तेजी से सिमट रहा है। नियमों की अनदेखी कर कृषि योग्य भूमि का धड़ल्ले से व्यवसायिक उपयोग किया जा रहा है। इससे हरित पट्टी का दायरा लगातार सिकुड़ता जा रहा है जो पर्यावरण में खतरा बढ़ा रहा है। प्रशासन से बिना अनुमति लिए बिना ही प्लाटिंग कर कृषि भूमि पर मकान बनाए जा रहे हैं। अखिल भारतीय किसान मजदूर यूनियन के संयुक्त मंत्री जयलाल सरोज का कहना है कि खेती की भूमि का पूंजीपति अपने लाभ में इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे पर्यावरण का संतुलन बिगड़ रहा है। नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी धीरज सिंह का कहना है कि बिना नक्शा पास कराए ही नगर से सटी कृषि भूमि पर कुछ लोग कालोनी बसा रहे हैं। ऐसे लोगों को चिह्नित कर नोटिस भेजी जा रही है। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
बदलापुर/ घनश्यामपुर। क्षेत्र के कई गांवों के किसानों के लिए कभी वरदान कही जाने वाली पीली नदी पानी के बिना दुबली हो गई है। जिसके कारण आस पास के गांवों के लोगों के साथ पशु-पक्षियों के सामने पेयजल संकट खड़ा हो गया है। नदी सूख जाने के कारण खजुरन, पहितियापुर , रामपुर , मरगूपुर , दुगौली , कस्तूरीपुर , ऊदपुरगेल्हवा , डढ़िया आदि गांवों के हैंडपंप तथा पम्पिंग सेट भी पानी देना बंद कर दिए है। जानकारी के बाद भी सिंचाई विभाग और प्रशासन जल प्रबंधन का इंतजाम करने में नाकाम है। मछुआ समुदाय के कस्तूरीपुर गांव निवासी भूलन राम केवट, बाबूलाल केवट, लालजी केवट, दूधनाथ केवट का कहना है कि उनके सामने रोजी रोटी के लाले पड़ गए हैं।
बदलापुर/घनश्यामपुर। क्षेत्र के बरौली गांव निवासी त्रिवेणी सिंह का आम का बगीचा जिले में विशेष स्थान रखता है। 120 बीघा क्षेत्रफल में 27 सौ प्रजाति के पेड़ पौधे लगाए गए हैं। पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ लाखों रुपये का मुनाफा प्रति वर्ष इस बगीचे से होता है। उनके बड़े पुत्र अनिल कुमार सिंह ने बताया कि 1980 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी जब बदलापुर आए थे तब उन्होंने बगीचा तैयार करने की नसीहत दी थी। उन्हीें की प्रेरणा से ही बगीचे में दशहरी, लंगड़ा, फजली, सफेदा, चौसा आदि प्रजाति के आम लगाए गए हैं। बगीचे की सिंचाई हेतु चार पंपिंग सेट भी लगाए गए हैं। त्रिवेणी सिंह का बगीचा हरियाली, पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ अच्छा आय का स्रोत बना हुआ है।
मुंगराबादशाहपुर। क्षेत्र के बिझवनियां के पूरा (गौरैयाडीह) गांव निवासी पर्यावरण विद् व रिटायर शिक्षक चंद्र बहादुर सिंह बचपन से ही पेड़ लगाने में रुचि रखते हैं। गांव में उनकी डेढ सौ बीघे है भूमि है। 100 बीघे में तरह तरह के पेड़ तो 50 बीघे मे अपने दम पर खेती करते हैं। उन्होंने 2500 पेड़ लगा रखे हैं। जिसमे आम, अमरूद, आंवला, लीची, मुसम्मी, केला, संतरा, चीकू, नीबू, सेब, बेर आदि के हैं। धौरहरा, नीभापुर, सटवां, गौरैयाडीह, सोहांसा, काक्षीडीह, रामनगर सहित कई गांवों में स्वयं के खर्च से सैकड़ों आम नीम पीपल के पेड़ लगा चुके है। पर्यावरण पर वह अब तक वह दिल्ली, लखनऊ, वाराणसी, इलाहाबाद, कानपुर में व्याख्यान दे चुके हैं। उनका कहना है कि अगर पेड़ नहीं रहा तो हमारी आने वाली नस्लों का जीना दुश्वार हो जाएगा। बरसठी के परियत बाजार में बसपा प्रभारी अशोक कुमार सिंह ने पौधरोपण किया। इस मौके पर शीतला प्रसाद, टु्न्ना आदि मौजूद थे।