फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jaunpur News ›   कल्याणकारी मंत्र है श्री राम नाम कीर्तन-

कल्याणकारी मंत्र है श्री राम नाम कीर्तन-

Wed, 23 May 2018 11:48 PM IST
Updated Wed, 23 May 2018 11:48 PM IST
विज्ञापन
कल्याणकारी मंत्र है श्री राम नाम कीर्तन-
सतहरिया। मानव जीवन के सारे कष्टों के निवारण में श्री राम नाम कीर्तन व भजन ही कल्याणकारी मंत्र है। श्री राम कथा कोई साधारण वस्तु नहीं है । बल्कि जीवन रुपी नइया का खेवइया है। जब भक्त समर्पण भाव से भगवान को पुकारता है तो प्रभू उसकी रक्षा के लिए नंगे पांव चले आते हैं।उक्त बातें कथावाचक रामेश्वरानंद महराज ने बहोरिकपुर गांव में चल रहे श्रीराम कथा के अंतिम दिन बुधवार को कहा।
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि जब दरबार में खुलेआम द्रोपदी का चीर हरण कौरवों पक्ष की तरफ से किया जा रहा था तो उस वक्त भरे दरबार में बैठे बड़े- बड़े योद्धा उनकी लाज बचाने में असहाय नजर आए।इसके बाद द्रोपदी ने भगवान कृष्ण को भाव भक्ति के साथ पुकारा। जिस पर भगवान कृष्ण ने पहुंच कर उनकी लाज बचाई। सद् गुरु के माध्यम से ही प्राणी परमात्मा तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि नारियों को पहनावे पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उनकी वाह्रय नही आंतरिक श्रृंगार ही भारतीय नारी की पहचान होती है। कार्यक्रम का संचालन दिनेश ने किया। इस अवसर पर चंद्रशेखर, मानिक चंद्र, बब्बू महराज, रिंकु, मंटु , रमानाथ, राजेंद्र, वीरेंद्र, ज्ञान चंद्र, दुर्गा प्रसाद,शिवम्, सुंदरम, आदि उपस्थित रहे।
विज्ञापन


बदलापुर/घनश्यामपुर। अयोध्या के संत स्वामी प्रेमदास रामायणी महराज ने कहा कि प्रभु की भक्ति की राह में रोड़ा बनने वाले का परित्याग कर देना चाहिए। चवरी सलामतपुर गांव में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन बुधवार को श्रोताओं के बीच प्रवचन के दौरान उन्होंने उदहारण देते हुए कहा कि प्रह्लाद ने पिता को, बिभीषण ने भाई को, भरत ने मां को, बलि ने गुरु शुक्राचार्य को तो गोपिकाओं ने अपने परिवार को प्रभु के पथ में बाधक बनने पर छोड़ दिया था। उन्होंने कहा कि जीव जब मां के गर्भ में रहता है तो प्रभु से भजन करता है, हे प्रभु आप हमें इस कष्ट से बाहर कर दो जीवन भर आपका भजन करूंगा। किन्तु बाहर आते ही प्रभु को भूल माया का भजन करने लगता है। जब बिभिन्न मायाबी राक्षस कृष्ण से परास्त हो गए तो कंस ने उन्हें अक्रूर के माध्यम से मथुरा बुलवाया। जहां उन्हें हाथी के आगे फेकवा दिया। मल्ल युद्ध कराया गया, किन्तु प्रभु ने सभी को परास्त कर दिया। अंत मे कंस को मोक्ष प्रदान किया। इस अवसर पर शम्भूनाथ द्विवेदी, दयाशंकर द्विवेदी, दिलीप गुप्त, अरविंद, रमाशंकर मिश्र, लालचंद्र तिवारी, शैलेन्द्र, मधुसूदन सेठ, रामकुमार यादव आदि उपस्थित रहे। आयोजक जवाहरलाल गुप्त ने आभार ज्ञापित किया।
विज्ञापन
विज्ञापन


सुजानगंज। तिलहरा के झाली भवानी मंदिर पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा में नारद और व्यास जी के संवाद का वर्णन करते हुए व्यास आशीष कृष्ण शास्त्री महाराज ने कहा कि वेदव्यास से देवर्षि नारद ने अपने पूर्व जन्म की साधना और संतों की संग की कृपा का परिणाम बताया। कहा कि मैं पूर्व जन्म में दासी पुत्र था। आज ब्रह्मा का पुत्र नारद के नाम से जाना जाता हूं। तीनों लोगों में में पूज्यनीय हो चुका हूं। भगवान ने इतनी कृपा किया कि हमें अपनी देवदत्त नाम की वीणा भी प्रदान कर दिया। इस वीणा पर मैं गोविंद का ही गुणगान करता हूं। मानव जीवन में इस कथा की व्यापकता बताते हुए महाराज ने कहा वीणा कला का प्रतीक है। भगवान ने हम सबको वाणी की वीणा प्रदान किया है। वाणी का गलत प्रयोग करके किसी को अपमानित करना भगवान की दिव्य संपदा का अपमान करने के बराबर होता है। स्वर ईश्वर के अनुरूप ही होना चाहिए। वाणी का निरर्थक प्रयोग ईश्वर की विरासत की हत्या है। इसलिए वाणी से सदैव भगवान का गुणगान ही करना चाहिए। इस अवसर पर मोहित शुक्ला, अखिलेश, घनश्याम, पिंटू शुक्ल प्रधान,गुड्डू शुक्ल आदि उपस्थित रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed