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भौतिकता के चकाचौंध में मानव भूल गया नैतिकता
Updated Tue, 08 May 2018 11:48 PM IST
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सुईथाकला। करुणा नंद सरस्वती महाराज ने कहा कि भौतिक सुख के पीछे आज लोग मानवता को भूल बैठे हैं। यह सुख क्षणभंगुर है। जीवन के वास्तविक उद्देश्य से बिमुख हो रहा है। यह मानव शरीर इसलिए मिला है कि हम इस जीवन में अपने ईष्ट का आत्मसात कर सके।
रुधौली बाजार में आयोजित सात दिवसीय भागवत कथा के दौरान भक्तों के बीच प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि लोग इस नश्वर शरीर के सुख के लिए उस मृग के समान भाग रहे है, जिसकी नाभि मे ही कस्तूरी है और वह सुगंध को ढूंढता रहता है। असली सुख तो सत्य की राह पर चलने पर है। जो हमें असीमित सुखो के भंडार तक ले जाता है। जहां से इस तन को परमगति की प्राप्ति भी हो जाती है। पाप के उद्यम तीन प्रकार के होते हैं पहला मन से किसी के प्रति गलत सोचना, दूसरा बाड़ी से और तीसरा कर्म से। यदि हम कोई दुर्व्यसन मात्र मन से सोच लेते हैं तो भी हम उसके करनी भरने भर के पाप कर्म के भागीदार हो जाते हैं। इसके अलावा यदि हम ऐसी कड़वी भाषा का प्रयोग करते हैं जिससे अगले को कष्ट पहुंचता हो तो भी हम पाप के भागीदार होते हैं। इसीलिए कहा गया है कि बुरा मत सोचो, बुरा मत कहो और बुरा मत करो। इस मौके विजयपति तिवारी, सूर्य नारायण तिवारी, डॉक्टर सुधांशु, शशिधर, शक्तिधर, अभिषेक, अंबिकेश, राघवेंद्र, आदित्य, अंशु, गिरजा, हिमांशु , शंखधार आदि उपस्थित रहे।
रुधौली बाजार में आयोजित सात दिवसीय भागवत कथा के दौरान भक्तों के बीच प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि लोग इस नश्वर शरीर के सुख के लिए उस मृग के समान भाग रहे है, जिसकी नाभि मे ही कस्तूरी है और वह सुगंध को ढूंढता रहता है। असली सुख तो सत्य की राह पर चलने पर है। जो हमें असीमित सुखो के भंडार तक ले जाता है। जहां से इस तन को परमगति की प्राप्ति भी हो जाती है। पाप के उद्यम तीन प्रकार के होते हैं पहला मन से किसी के प्रति गलत सोचना, दूसरा बाड़ी से और तीसरा कर्म से। यदि हम कोई दुर्व्यसन मात्र मन से सोच लेते हैं तो भी हम उसके करनी भरने भर के पाप कर्म के भागीदार हो जाते हैं। इसके अलावा यदि हम ऐसी कड़वी भाषा का प्रयोग करते हैं जिससे अगले को कष्ट पहुंचता हो तो भी हम पाप के भागीदार होते हैं। इसीलिए कहा गया है कि बुरा मत सोचो, बुरा मत कहो और बुरा मत करो। इस मौके विजयपति तिवारी, सूर्य नारायण तिवारी, डॉक्टर सुधांशु, शशिधर, शक्तिधर, अभिषेक, अंबिकेश, राघवेंद्र, आदित्य, अंशु, गिरजा, हिमांशु , शंखधार आदि उपस्थित रहे।
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