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मरीज परेशान, सरकारी अस्पतालों में नहीं है दवाओं का इंतजाम
Updated Sat, 05 May 2018 12:44 AM IST
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जौनपुर। सरकारी अस्पतालों में दवा का इंतजाम नहीं है। सामान्य से लेकर गंभीर बीमारी से ग्रसित मरीजों को बाहर से दवा खरीदनी पड़ रही है। डॉक्टर मरीजों को देखने के बाद उन्हें दवा का पर्चा पकड़ा दे रहे हैं। मरीज और उनके तीमारदारों को यह भी बता दिया जाता है कि दवा कहां मिलेगी। दवा के नाम पर सरकार करोड़ों का बजट खर्च करती है। लेकिन उन करोड़ों रुपए का लाभ कहां और किसको मिलता है किसी को पता नहीं है। कायदे से जांच की जाए तो दवा खरीद में भी भ्रष्टाचार उजागर हो सकता है। बुधवार की रात सुजानगंज थाना क्षेत्र में आई एक बारात में दूषित मिठाई खाने से 41 लोगों की तबीयत बिगड़ गई जब वह सुजानगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गए तो उनसे बाहर से दवाएं खरीदवाई गई। जबकि उल्टी और दस्त में सामान्य दवा ही मरीज को दी जाती है। लेकिन यह दवाएं भी अस्पताल में नहीं थी।
जिले में जिला चिकित्सालय और महिला चिकित्सालय, 22 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और पीएचसी एवं अन्य उपकेंद्र हैं। पीएचसी उपकेंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तो दूर जिला चिकित्सालय और महिला चिकित्सालय में भी दवाएं नहीं हैं। जबकि स्थिति यह है कि सरकार दे से तीन करोड़ रुपये दवाओं पर प्रति वर्ष खर्च कर रही है। मार्च 2018 तक 41 डेंगू के मरीज आए जिसमें तीन की मौत हो गई। जेई से भी एक मरीज पीड़ित पाया गया। और तो और हर रोज तीन से चार सौ मरीज जिला अस्पताल और महिला अस्पताल में आते हैं। लेकिन उनसे बाहर की ही दवाएं डाक्टर लिखते हैं। जिससे मरीजों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. ओपी सिंह ने बताया कि जिला अस्पताल में शीघ्र ही दवाएं उपलब्ध हो जाएगी। प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर सामान्य दवाओं की कोई कमी नहीं है। सुजानगंज में अगर बाहर से दवाएं मंगाई गई है तो इसकी जांच कराकर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई होगी। कहा कि एंबुलेंस सेवा मरीजों के लिए लाभकारी सिद्घ हो रही है। आंकड़ों पर गौर करें तो जिले के 86 एंबुलेंस को जिसमें 102 नंबर की 50, 108 नंबर की 36 और दो एएलएस एंबुलेंस के पास 17993 काल प्राप्त हुआ। इसमें 17868 मरीजों को अस्पताल पहुंचाया गया। कहने को तो 86 एंबुलेंस में दवाईयां भी हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि किसी भी एंबुलेंस में दवाएं नहीं हैं।
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जिले में जिला चिकित्सालय और महिला चिकित्सालय, 22 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और पीएचसी एवं अन्य उपकेंद्र हैं। पीएचसी उपकेंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तो दूर जिला चिकित्सालय और महिला चिकित्सालय में भी दवाएं नहीं हैं। जबकि स्थिति यह है कि सरकार दे से तीन करोड़ रुपये दवाओं पर प्रति वर्ष खर्च कर रही है। मार्च 2018 तक 41 डेंगू के मरीज आए जिसमें तीन की मौत हो गई। जेई से भी एक मरीज पीड़ित पाया गया। और तो और हर रोज तीन से चार सौ मरीज जिला अस्पताल और महिला अस्पताल में आते हैं। लेकिन उनसे बाहर की ही दवाएं डाक्टर लिखते हैं। जिससे मरीजों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. ओपी सिंह ने बताया कि जिला अस्पताल में शीघ्र ही दवाएं उपलब्ध हो जाएगी। प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर सामान्य दवाओं की कोई कमी नहीं है। सुजानगंज में अगर बाहर से दवाएं मंगाई गई है तो इसकी जांच कराकर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई होगी। कहा कि एंबुलेंस सेवा मरीजों के लिए लाभकारी सिद्घ हो रही है। आंकड़ों पर गौर करें तो जिले के 86 एंबुलेंस को जिसमें 102 नंबर की 50, 108 नंबर की 36 और दो एएलएस एंबुलेंस के पास 17993 काल प्राप्त हुआ। इसमें 17868 मरीजों को अस्पताल पहुंचाया गया। कहने को तो 86 एंबुलेंस में दवाईयां भी हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि किसी भी एंबुलेंस में दवाएं नहीं हैं।
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