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36 अफसर 72 गांवों को गोद लेकर बनाएंगे कुपोषण मुक्त गांव
Updated Fri, 06 Apr 2018 11:56 PM IST
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जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों पर जनवरी से पोषाहार का वितरण बंद है। यह स्थिति तब है जबकि जिले में कुपोषित बच्चों की संख्या 29 और अति कुपोषित बच्चों की तादाद आठ प्रतिशत है। पोषाहार बंद होने के तीन महीने बाद अब शबरी संकल्प योजना के तहत 72 गांवों को कुपोषण मुक्त बनाने का अभियान शुरू किया जा रहा है। जिले के 36 अफसरों को इन गांवों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। गर्भवती महिलाओं को भी पोषाहार, आयरन, फोलिक एसिड और कैल्शियम की गोलियां नहीं मिल पा रही हैं, लिहाजा उनमें 50 फीसदी एनीमिया से पीड़ित हैं।
जिले में पांच साल से कम उम्र के कुल पांच लाख 19 हजार 680 बच्चे हैं। इसमें एक लाख 51 हजार 468 बच्चे कुपोषित हैं। इसमें 41 हजार 979 बच्चे अति कुपोषित हैं, जिनके पोषण की एक दिन भी अनदेखी नहीं की जा सकती है। इसके बावजूद जनवरी से आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार का वितरण बंद है। ये आंकड़े पुराने हैं। पांच साल तक के बच्चों का नए सिरे से वजन किया जाना है। शबरी संकल्प योजना के प्रथम चरण में दिसंबर 2018 तक शून्य से तीन वर्ष की आयु के बच्चों में कुपोषण की दर में दो प्रतिशत की कमी लाना है। डीएम, सीडीओ सहित 36 अफसरों ने 72 गांवों को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए गोद लिया है और वे इन गांवों को कुपोषण मुक्त बनाएंगे।
डीएम अरविंद मलप्पा बंगारी ने सिकरारा, धर्मापुर, सीडीओ आलोक कुमार मुफ्तीगंज विकास खंड के महमदपुर, हनुआडीह, सीएमओ जलालपुर के छातीडीह, खालिसपुर खुर्द की जिम्मेदारी संभालेंगे। डीएफओ, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महाप्रबंधक उद्योग केंद्र, डीआईओएस, जिला कृषि अधिकारी, रेशम अधिकारी, बीएसए, पीडी नेडा, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी मत्स्य, अल्पसंख्यक अधिकारी, प्रोबेशन, गन्ना, युवा कल्याण, पीडी डूडा, उपायुक्त मनरेगा, डीएसटीओ, उप निदेशक कृषि प्रसार, डीपीआरओ सहित 36 अफसर राज्य पोषण मिशन ने दो-दो गांव गोद लेने को कहा है। इस गांवों में गर्भवती महिलाओं आयरन, फोलिक एसिड की गोलियां ती जाएंगी ताकि एनीमिया में कमी लाई जा सके। गर्भवती महिलाओं में एनीमिया 50 फीसदी में एनीमिया पाई जाती है जिसे 25 प्रतिशत तक करना है। इन गांवों में डब्लूएचओ ग्रोथ चार्ट के अनुसार पांच साल तक के हर बच्चे को कुपोषण से मुक्त करना है।
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इनसेट
बंद हो गई है हौसला पोषण, हाटकुक्ड योजनाएं
जौनपुर। जिले में 5321 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। यहां बच्चों को तीन किलो प्रति माह पंजीरी मिलता था। पोषाहार जनवरी 2018 एवं हाटकुक्ड मार्च 17 से ही बंद हो गया है। ऐसी स्थिति में लाखों बच्चों को कुपोषण से मुक्त करने की कवायद शुरू हुई है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताला ही नहीं खुलता। तीन माह तक आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ता अपनी मांगों को लेकर पिछले दिनों हड़ताल पर थीं।
कोट:
शबरी संकल्प अभियान के तहत जिले का चयन हुआ है। इसके प्रथम चरण में 72 गांवों को दिसंबर तक कुपोषण मुक्त गांव बनाया जाना है। इसके लिए 36 अधिकारियों को दो-दो गांवों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। - गोविंद दयाल यादव, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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जिले में पांच साल से कम उम्र के कुल पांच लाख 19 हजार 680 बच्चे हैं। इसमें एक लाख 51 हजार 468 बच्चे कुपोषित हैं। इसमें 41 हजार 979 बच्चे अति कुपोषित हैं, जिनके पोषण की एक दिन भी अनदेखी नहीं की जा सकती है। इसके बावजूद जनवरी से आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार का वितरण बंद है। ये आंकड़े पुराने हैं। पांच साल तक के बच्चों का नए सिरे से वजन किया जाना है। शबरी संकल्प योजना के प्रथम चरण में दिसंबर 2018 तक शून्य से तीन वर्ष की आयु के बच्चों में कुपोषण की दर में दो प्रतिशत की कमी लाना है। डीएम, सीडीओ सहित 36 अफसरों ने 72 गांवों को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए गोद लिया है और वे इन गांवों को कुपोषण मुक्त बनाएंगे।
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डीएम अरविंद मलप्पा बंगारी ने सिकरारा, धर्मापुर, सीडीओ आलोक कुमार मुफ्तीगंज विकास खंड के महमदपुर, हनुआडीह, सीएमओ जलालपुर के छातीडीह, खालिसपुर खुर्द की जिम्मेदारी संभालेंगे। डीएफओ, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महाप्रबंधक उद्योग केंद्र, डीआईओएस, जिला कृषि अधिकारी, रेशम अधिकारी, बीएसए, पीडी नेडा, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी मत्स्य, अल्पसंख्यक अधिकारी, प्रोबेशन, गन्ना, युवा कल्याण, पीडी डूडा, उपायुक्त मनरेगा, डीएसटीओ, उप निदेशक कृषि प्रसार, डीपीआरओ सहित 36 अफसर राज्य पोषण मिशन ने दो-दो गांव गोद लेने को कहा है। इस गांवों में गर्भवती महिलाओं आयरन, फोलिक एसिड की गोलियां ती जाएंगी ताकि एनीमिया में कमी लाई जा सके। गर्भवती महिलाओं में एनीमिया 50 फीसदी में एनीमिया पाई जाती है जिसे 25 प्रतिशत तक करना है। इन गांवों में डब्लूएचओ ग्रोथ चार्ट के अनुसार पांच साल तक के हर बच्चे को कुपोषण से मुक्त करना है।
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बंद हो गई है हौसला पोषण, हाटकुक्ड योजनाएं
जौनपुर। जिले में 5321 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। यहां बच्चों को तीन किलो प्रति माह पंजीरी मिलता था। पोषाहार जनवरी 2018 एवं हाटकुक्ड मार्च 17 से ही बंद हो गया है। ऐसी स्थिति में लाखों बच्चों को कुपोषण से मुक्त करने की कवायद शुरू हुई है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताला ही नहीं खुलता। तीन माह तक आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ता अपनी मांगों को लेकर पिछले दिनों हड़ताल पर थीं।
कोट:
शबरी संकल्प अभियान के तहत जिले का चयन हुआ है। इसके प्रथम चरण में 72 गांवों को दिसंबर तक कुपोषण मुक्त गांव बनाया जाना है। इसके लिए 36 अधिकारियों को दो-दो गांवों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। - गोविंद दयाल यादव, जिला कार्यक्रम अधिकारी