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स्टोर खाली,मरीज खरीद रहे बाहर से दवा
Updated Tue, 06 Mar 2018 12:44 AM IST
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जौनपुर। जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह से चरमरा गई हैं। अस्पताल में न तो दवाएं है और न ही डाक्टर मरीजों का ठीक से इलाज कर रहे है। इस वजह से मरीज प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराने के लिए बाध्य हो रहे है, जहां उनका इलाज तो हो रहा लेकिन आर्थिक बोझ से मरीजों के परिवारीजनों की कमर टूट जा रही है।
मरीजों की मानें तो जिला चिकित्सालय सिर्फ कहने का सरकारी अस्पताल रह गया है। यहां धड़ल्ले से बाहर की दवाएं लिखी जा रही है। अस्पताल का स्टोर भी खाली हो गया है। जनरेटर नहीं चलने से मरीजों को बाहर से अल्ट्रासाउंड व एक्सरे आदि की जांच करानी पड़ रही है। सुविधाएं नहीं मिलने से मरीजों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। वहीं उनको आर्थिक चपत भी लग रही है। हालत यह है कि मरीजों के परिवार वाले बाहर से दवा खरीदकर या तो उपचार करा रहे या प्राइवेट अस्पतालों की तरफ रुख कर रहे हैं। इसके बाद भी अस्पताल प्रशासन चुप्पी साधे है। जिला अस्पताल में उपचार संबंधी छोटी-छोटी सुविधाएं भी नहीं हैं। स्टोर में पर्याप्त दवाएं नहीं हैं। एंटी बायोटिक दवाओं की काफी कमी है। वहीं डिप, बीबी सेट व पट्टी आदि भी नदारद है, जिससे मरीजों को चिकित्सकों द्वारा बाहर से दवाएं लिखी जा रही है। अल्ट्रासाउंड व एक्सरे सहित अन्य जांच की सुविधाएं तो है लेकिन उसका लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल में भर्ती सिद्दीकपुर निवासिनी तनु के परिवार वालों का कहना है कि अस्पताल में दवाएं बाहर से लिखी जा रही है। डाक्टर इलाज कराने की बजाय प्राइवेट में ले जाने की सलाह दे रहे हैं।
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मरीजों की मानें तो जिला चिकित्सालय सिर्फ कहने का सरकारी अस्पताल रह गया है। यहां धड़ल्ले से बाहर की दवाएं लिखी जा रही है। अस्पताल का स्टोर भी खाली हो गया है। जनरेटर नहीं चलने से मरीजों को बाहर से अल्ट्रासाउंड व एक्सरे आदि की जांच करानी पड़ रही है। सुविधाएं नहीं मिलने से मरीजों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। वहीं उनको आर्थिक चपत भी लग रही है। हालत यह है कि मरीजों के परिवार वाले बाहर से दवा खरीदकर या तो उपचार करा रहे या प्राइवेट अस्पतालों की तरफ रुख कर रहे हैं। इसके बाद भी अस्पताल प्रशासन चुप्पी साधे है। जिला अस्पताल में उपचार संबंधी छोटी-छोटी सुविधाएं भी नहीं हैं। स्टोर में पर्याप्त दवाएं नहीं हैं। एंटी बायोटिक दवाओं की काफी कमी है। वहीं डिप, बीबी सेट व पट्टी आदि भी नदारद है, जिससे मरीजों को चिकित्सकों द्वारा बाहर से दवाएं लिखी जा रही है। अल्ट्रासाउंड व एक्सरे सहित अन्य जांच की सुविधाएं तो है लेकिन उसका लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल में भर्ती सिद्दीकपुर निवासिनी तनु के परिवार वालों का कहना है कि अस्पताल में दवाएं बाहर से लिखी जा रही है। डाक्टर इलाज कराने की बजाय प्राइवेट में ले जाने की सलाह दे रहे हैं।
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