{"_id":"5a8dc4214f1c1bbb218b4630","slug":"15192404415-jaunpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अय्यामे फातिमी में उमड़ा अकीदतमंदों का हुजूम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अय्यामे फातिमी में उमड़ा अकीदतमंदों का हुजूम
Updated Thu, 22 Feb 2018 12:40 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
जौनपुर। पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब की बेटी हजरत फातिमा जहरा की शहादत की याद में शहर के नासिरिया अरबी कॉलेज में तीन दिनों तक मजलिस-मातम का सिलसिला चला। आखिरी दिन मंगलवार की रात में फातिमा जहरा का ताबूत निकाला गया, जिसमें अकीदतमंदों का हुजूम उमड़ पड़ा। आंसुओं का नजराना पेश किया गया।
अंजुमनों ने नौहाख्वानी और सीनाजनी की। शहर के मदरसा नासिरिया अरबी कॉलेज में हर वर्ष की तरह हर वर्ष की भी रसूल अल्लाह की इकलौती बेटी जनाबे फातिमा जहरा की शहादत मौके पर तीन दिवसीय मजलिस का आयोजन किया गया, जिसमें देशभर से आए उलमाए कराम ने तकरीर में रसूल अल्लाह की बेटी के जिंदगी परा रोशनी डाली। मंगलवार को हुई आखिरी मजलिस को मदरसा इमानिया नासीरिया के सरपरस्त आयतुल्लाह मौलाना महमूदुल हसन खां ने खिताब किया। उन्होंने जनाबे फातिमा जहरा कि जिंदगी पर रौशनी डालते हुए कहा कि दुनिया को जन्नत बनाना है तो फातिमा जहरा की सीरत पर अमल करना चाहिए। रसूल-ए-खुदा की वह एकलौती बेटी थीं। उनकी ताजमी में मोहम्मद साहब खड़े हो जाते थे। उन्हें अपनी जगह बैठाते थे। मसाएब पढ़ते हुए मौलाना ने कहा कि मोहम्मद साहब के बाद उनकी इस बेटी पर बहुत जुल्म हुए। जलता हुआ दरवाजा गिरा दिया गया। इससे वह कुछ दिनों के बाद शहीद हो गईं। मसाएब सुनकर वहां मौजूदा लोगों की आंखें भर आईं। उसके बाद ताबूत निकाला गया और नौहाख्ववानी व सीनाजनी का सिलसिला शुरू हुआ। देर रात तक नौहाख्वानी और सीनाजनी हुई और लोगों में तबर्रुक तक्सीम किया गया। नासिरिया अरबी कॉलेज के प्रिंसिपल मौलाना महफूजुल हसन खान तमाम लोगों का शुक्रिया अदा किया। इस मौके पर अहमद जहां खां प्रबंधक नासिरिया, मौलाना मुस्तफा खां, सैयद फजले अब्बास, मौलाना उरूज हैदर, मौलाना मरगूब आलम, मौलाना यूसुफ खां, मौलाना सैयद आमिर रजा, मसकुरुल हसन, रिजवान अहमद, मौलाना रजी बिस्वानी आदि मौजूद रहे।
अंजुमनों ने नौहाख्वानी और सीनाजनी की। शहर के मदरसा नासिरिया अरबी कॉलेज में हर वर्ष की तरह हर वर्ष की भी रसूल अल्लाह की इकलौती बेटी जनाबे फातिमा जहरा की शहादत मौके पर तीन दिवसीय मजलिस का आयोजन किया गया, जिसमें देशभर से आए उलमाए कराम ने तकरीर में रसूल अल्लाह की बेटी के जिंदगी परा रोशनी डाली। मंगलवार को हुई आखिरी मजलिस को मदरसा इमानिया नासीरिया के सरपरस्त आयतुल्लाह मौलाना महमूदुल हसन खां ने खिताब किया। उन्होंने जनाबे फातिमा जहरा कि जिंदगी पर रौशनी डालते हुए कहा कि दुनिया को जन्नत बनाना है तो फातिमा जहरा की सीरत पर अमल करना चाहिए। रसूल-ए-खुदा की वह एकलौती बेटी थीं। उनकी ताजमी में मोहम्मद साहब खड़े हो जाते थे। उन्हें अपनी जगह बैठाते थे। मसाएब पढ़ते हुए मौलाना ने कहा कि मोहम्मद साहब के बाद उनकी इस बेटी पर बहुत जुल्म हुए। जलता हुआ दरवाजा गिरा दिया गया। इससे वह कुछ दिनों के बाद शहीद हो गईं। मसाएब सुनकर वहां मौजूदा लोगों की आंखें भर आईं। उसके बाद ताबूत निकाला गया और नौहाख्ववानी व सीनाजनी का सिलसिला शुरू हुआ। देर रात तक नौहाख्वानी और सीनाजनी हुई और लोगों में तबर्रुक तक्सीम किया गया। नासिरिया अरबी कॉलेज के प्रिंसिपल मौलाना महफूजुल हसन खान तमाम लोगों का शुक्रिया अदा किया। इस मौके पर अहमद जहां खां प्रबंधक नासिरिया, मौलाना मुस्तफा खां, सैयद फजले अब्बास, मौलाना उरूज हैदर, मौलाना मरगूब आलम, मौलाना यूसुफ खां, मौलाना सैयद आमिर रजा, मसकुरुल हसन, रिजवान अहमद, मौलाना रजी बिस्वानी आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन