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मुश्किलों में भी अडिग रहीं सावित्रीबाई फूले
Updated Thu, 04 Jan 2018 01:01 AM IST
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खुटहन। माता सावित्री बाई फूले दलित संघर्ष मोर्चा की प्रदेश प्रभारी ऊषा देवी ने कहा कि सावित्री बाई फूले अपने जीवन में कभी भी हताश नहीं हुई। तमाम सामाजिक मुश्किलों में भी वे अडिग होकर दलित महिलाओं को शिक्षित करने का काम करती रहीं। आज भी उन्हें मराठी काव्य की अग्रदूत माना जाता है। टिकरीकला गांव में मयाराम प्रधान के आवास पर माता सावित्री बाई फूले के तस्वीर पर माल्यार्पण करके 187 वां जन्म दिवस मनाया।
इस मौके पर ऊषा देवी आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि सावित्री बाई फूले ने विधवा विवाह करवाने तथा छूआछूत मिटाने के लिए एक मिशन की तरह काम किया था। वह देश की प्रथम कन्या विद्यालय की प्रथम महिला शिक्षिका भी थीं। उन्होंने अपने पति क्रांतिकारी नेता ज्योतिवाराव फूले के साथ मिलकर लडकियों के लिए 18 स्कूल खोला था। अपने देश में जिस समय लडकियों की शिक्षा पर सामाजिक पाबंदी थी उस दौर में भी माता सावित्री बाई फूले ने पुणे जैसे शहर में रहकर खुद पढ़ाई की तथा दूसरी लड़कियों के पढने का भी बंदोबस्त किया। ऐसी महिला को हमे कभी भी भूलना नहीं चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता चमेला देवी तथा संचालन निशा देवी ने किया। इस मौके पर विमला, चिन्ता, आशा, जगदीश, मख्खन राम,आधार, बेचन, संतोष, राजेंदर आदि मौजूद रहे।
इस मौके पर ऊषा देवी आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि सावित्री बाई फूले ने विधवा विवाह करवाने तथा छूआछूत मिटाने के लिए एक मिशन की तरह काम किया था। वह देश की प्रथम कन्या विद्यालय की प्रथम महिला शिक्षिका भी थीं। उन्होंने अपने पति क्रांतिकारी नेता ज्योतिवाराव फूले के साथ मिलकर लडकियों के लिए 18 स्कूल खोला था। अपने देश में जिस समय लडकियों की शिक्षा पर सामाजिक पाबंदी थी उस दौर में भी माता सावित्री बाई फूले ने पुणे जैसे शहर में रहकर खुद पढ़ाई की तथा दूसरी लड़कियों के पढने का भी बंदोबस्त किया। ऐसी महिला को हमे कभी भी भूलना नहीं चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता चमेला देवी तथा संचालन निशा देवी ने किया। इस मौके पर विमला, चिन्ता, आशा, जगदीश, मख्खन राम,आधार, बेचन, संतोष, राजेंदर आदि मौजूद रहे।
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