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नासूर बन चुकी है शहर में जाम की समस्या
Updated Fri, 08 Dec 2017 12:18 AM IST
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जौनपुर। शहर की आबादी बढ़ रही है। सड़कों पर वाहनों का दबाव भी बढ़ रहा है। ऐसे में अतिक्रमण के चलते सड़कों के सिमटने से जाम की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। शहर में घंटों जाम में फंसकर हैरान होना आम बात हो गई है। शहर के लिए नासूर बनी जाम की समस्या से निबटने के लिए प्रशासन के पास कोई प्लान नहीं है। सुबह दफ्तर जाने और शाम को दफ्तर से लौटते समय लोगों को जाम से जूझना पड़ता है। स्कूली बसें भी फंसी रहती हैं। शहर की मुख्य सड़कों के अलावा गलियों में भी जाम लग जाता है। शहर के मुख्य चौराहों पर तैनात होमगार्ड भी कुछ नहीं कर पाते। मंगलवार को शहर के कोतवाली और जेसीज चौराहे पर जाम के चलते लोग परेशान रहे।
शहर में मंगलवार को कोतवाली के पास 12 बजे जाम लग गया। जेसीज चौराहे पर दो बजे से साढ़े तीन बजे तक जाम लगा रहा जिससे लोग परेशान रहे। यह स्थिति एक दिन नहीं बल्कि प्रतिदिन पैदा होती है। शहर और आस पास के 25 से अधिक निजी विद्यालयों के वाहन सुबह बच्चों को लेने के लिए शहर में प्रवेश करते हैं। इनमें कुछ स्कूलों की छोटी वैन तो कुछ बड़ी बसें भी होती हैं। शाम को अधिकतर विद्यालयों में एक साथ छुट्टी होती है और स्कूल वाहन बच्चों को उनके घर पहुंचाने के लिए शहर में प्रवेश करते हैं जिससे जगह जगहं जाम लगता है। नगरपालिका के कूड़ा उठाने वाले वाहन भी उसी वक्त शहर की सड़कों से कूड़ा उठाने के लिए निकलते हैं जब लोगों के दफ्तर का समय होता है। सकरी सड़कों पर जेसीबी मशीन के साथ कूड़ा वाहन जिधर से गुजरता है उधर जाम लग जाता है। कई बार लोगों ने नगर पालिका प्रशासन से इस बात की मांग की कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए कि सुबह आठ बजे तक शहर का कूड़ा उठा लिया जाए। इससे जहां लोगों को गंदगी से निजात मिल जाएगी वहीं जाम से भी लोगों राहत मिल जाएगी। जाम की समस्या से निबटने के लिए ही शहर में जिन सड़कों पर बड़े वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा है। इसके बाद भी वाहन धड़ल्ले से प्रवेश करते हैं। ट्रैफिक व्यवस्था के लिए नगर के जेसीज चौराहा, ओलंदगंज, पालिटेक्निक चौराहा, कोतवाली चौराहा, सिपाह आदि प्रमुख स्थानों पर पुलिस और होमगार्ड की तैनाती की गई है लेकिन जाम लगने की दशा में गार्ड भी बेबस दिखते हैं।
शहर की सड़कों पर ई-रिक्शा की भरमार होना भी जाम का कारण बन गया है। पालीटेक्निक चौराहे से ओलंदगंज, कोतवाली, स्टेशन तक और बदलापुर पड़ाव से होकर ओलंदगंज होते हुए कचहरी तक की सड़क पर ई-रिक्शा का दबाव अधिक हो गया है। खास बात यह कि ई-रिक्शा 12 से 15 साल की उम्र वाले किशोर चलाते हैं। उन्हें ट्रैफिक नियमों का ठीक से पता भी नहीं होता। सड़क पर सही दिशा से जाम लगने की दशा में अपनी कतार में इंतजार करने के बजाय जिधर रास्ता मिलता है वे उधर ही गाड़ी लेकर चल देते हैं जिससे जाम की स्थिति पैदा होती है।
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क्षेत्राधिकारी नगर नृपेंद्र कहते ने जाम के लिए लोगों को खुद जिम्मेदार बताया है। उन्होंने कहा कि सड़क पर चलने वाले दो पहिया, तीन पहिया और चार पहिया वाहन सवार चालक जल्दबाजी के चलते जाम में फंसते हैं। किसी को अपनी कतार में खड़ाकर इंतजार करने की आदत नहीं हैं। अक्सर देखा जाता है कि जरा भी जाम लगने पर लोग सड़क पर अगल बगल वाहन लगा देते हैं। ऐसा दोनों तरफ से आने जाने वाले वाहन चालक करते हैं जिससे जाम लग जाता है। अगर लोग ट्रैफिक नियमों का ठीक से पालन करें तो जाम की समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है।
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शहर में मंगलवार को कोतवाली के पास 12 बजे जाम लग गया। जेसीज चौराहे पर दो बजे से साढ़े तीन बजे तक जाम लगा रहा जिससे लोग परेशान रहे। यह स्थिति एक दिन नहीं बल्कि प्रतिदिन पैदा होती है। शहर और आस पास के 25 से अधिक निजी विद्यालयों के वाहन सुबह बच्चों को लेने के लिए शहर में प्रवेश करते हैं। इनमें कुछ स्कूलों की छोटी वैन तो कुछ बड़ी बसें भी होती हैं। शाम को अधिकतर विद्यालयों में एक साथ छुट्टी होती है और स्कूल वाहन बच्चों को उनके घर पहुंचाने के लिए शहर में प्रवेश करते हैं जिससे जगह जगहं जाम लगता है। नगरपालिका के कूड़ा उठाने वाले वाहन भी उसी वक्त शहर की सड़कों से कूड़ा उठाने के लिए निकलते हैं जब लोगों के दफ्तर का समय होता है। सकरी सड़कों पर जेसीबी मशीन के साथ कूड़ा वाहन जिधर से गुजरता है उधर जाम लग जाता है। कई बार लोगों ने नगर पालिका प्रशासन से इस बात की मांग की कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए कि सुबह आठ बजे तक शहर का कूड़ा उठा लिया जाए। इससे जहां लोगों को गंदगी से निजात मिल जाएगी वहीं जाम से भी लोगों राहत मिल जाएगी। जाम की समस्या से निबटने के लिए ही शहर में जिन सड़कों पर बड़े वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा है। इसके बाद भी वाहन धड़ल्ले से प्रवेश करते हैं। ट्रैफिक व्यवस्था के लिए नगर के जेसीज चौराहा, ओलंदगंज, पालिटेक्निक चौराहा, कोतवाली चौराहा, सिपाह आदि प्रमुख स्थानों पर पुलिस और होमगार्ड की तैनाती की गई है लेकिन जाम लगने की दशा में गार्ड भी बेबस दिखते हैं।
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शहर की सड़कों पर ई-रिक्शा की भरमार होना भी जाम का कारण बन गया है। पालीटेक्निक चौराहे से ओलंदगंज, कोतवाली, स्टेशन तक और बदलापुर पड़ाव से होकर ओलंदगंज होते हुए कचहरी तक की सड़क पर ई-रिक्शा का दबाव अधिक हो गया है। खास बात यह कि ई-रिक्शा 12 से 15 साल की उम्र वाले किशोर चलाते हैं। उन्हें ट्रैफिक नियमों का ठीक से पता भी नहीं होता। सड़क पर सही दिशा से जाम लगने की दशा में अपनी कतार में इंतजार करने के बजाय जिधर रास्ता मिलता है वे उधर ही गाड़ी लेकर चल देते हैं जिससे जाम की स्थिति पैदा होती है।
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क्षेत्राधिकारी नगर नृपेंद्र कहते ने जाम के लिए लोगों को खुद जिम्मेदार बताया है। उन्होंने कहा कि सड़क पर चलने वाले दो पहिया, तीन पहिया और चार पहिया वाहन सवार चालक जल्दबाजी के चलते जाम में फंसते हैं। किसी को अपनी कतार में खड़ाकर इंतजार करने की आदत नहीं हैं। अक्सर देखा जाता है कि जरा भी जाम लगने पर लोग सड़क पर अगल बगल वाहन लगा देते हैं। ऐसा दोनों तरफ से आने जाने वाले वाहन चालक करते हैं जिससे जाम लग जाता है। अगर लोग ट्रैफिक नियमों का ठीक से पालन करें तो जाम की समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है।