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कार्तिक पुर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने गोमती में लगाई आस्था की डुबकी
Updated Sun, 05 Nov 2017 12:46 AM IST
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जौनपुर। स्नान पर्व कार्तिक पूर्णिमा पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने शनिवार को गोमती में डुबकी लगाकर सूर्य को अर्घ्य दिया। भोर से ही स्नान, ध्यान और दान का सिलसिला शुरू हो गया। शाम को भी लोगों ने स्नान कर दीप जलाए। खुटहन के पिलकिछा घाट पर लोगों ने स्नान के बाद पूजन अर्चन किया। गोमती नदी के सूरज घाट पर लगे मेले में लोगों ने घरेलू इस्तेमाल की वस्तुओं को प्रसिद्ध गट्टे की खरीदारी की।
कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान, पूजन और दान विशेष फलदायी माना जाता है। इस प्रमुख स्नान पर्व पर भोर में ही श्रद्धालु स्नान के लिए गोमती के घाटों पर पहुंच गए। गोमती में डूबकी लगाकर श्रद्धालुओं ने सूर्य को अर्घ्य देने के बाद मंदिर में दर्शन पूजन किया। इसके बाद दान पुण्य किया। शहर के पचहटिया स्थित गोमती नदी के सूरज घाट पर मेले का आयोजन किया गया। इसमें लोगों ने कृषि के औजार, सूप, दौरी और मिट्टी के बर्तनों समेत अन्य घरेलू इस्तेमाल की वस्तुओं की खरीदारी की। मेले में एक से पांच किलो तक के गट्टे बिकते हैं जो आकर्षण के केंद्र होता है। खुटहन के पिलकिछा तिलवारी घाट पर कार्तिक पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने स्नान दान किया। भोर में ही स्नानार्थी जुटने लगे थे। स्नान के बाद लोगों ने राम जानकी मंदिर में पूजा अर्चना की। आज से ही यहां का साप्ताहिक मेला शुरू हो गया। मान्यता है कि लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद श्रीराम पुष्पक विमान से देवी सीता, लक्ष्मण और वानरों के साथ लोटते समय कुछ देर के लिए यहां रुके थे और स्नान और पूजन किया था। उनके पल पर रुकने की वजह से ही नदी पार के गांव का नाम तिलवारी रखा गया। बाद में ग्रामीणों की मदद से यहां राम जानकी मंदिर बनाया गया। यहां का साप्ताहिक मेला प्रसिद्ध है।
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कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान, पूजन और दान विशेष फलदायी माना जाता है। इस प्रमुख स्नान पर्व पर भोर में ही श्रद्धालु स्नान के लिए गोमती के घाटों पर पहुंच गए। गोमती में डूबकी लगाकर श्रद्धालुओं ने सूर्य को अर्घ्य देने के बाद मंदिर में दर्शन पूजन किया। इसके बाद दान पुण्य किया। शहर के पचहटिया स्थित गोमती नदी के सूरज घाट पर मेले का आयोजन किया गया। इसमें लोगों ने कृषि के औजार, सूप, दौरी और मिट्टी के बर्तनों समेत अन्य घरेलू इस्तेमाल की वस्तुओं की खरीदारी की। मेले में एक से पांच किलो तक के गट्टे बिकते हैं जो आकर्षण के केंद्र होता है। खुटहन के पिलकिछा तिलवारी घाट पर कार्तिक पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने स्नान दान किया। भोर में ही स्नानार्थी जुटने लगे थे। स्नान के बाद लोगों ने राम जानकी मंदिर में पूजा अर्चना की। आज से ही यहां का साप्ताहिक मेला शुरू हो गया। मान्यता है कि लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद श्रीराम पुष्पक विमान से देवी सीता, लक्ष्मण और वानरों के साथ लोटते समय कुछ देर के लिए यहां रुके थे और स्नान और पूजन किया था। उनके पल पर रुकने की वजह से ही नदी पार के गांव का नाम तिलवारी रखा गया। बाद में ग्रामीणों की मदद से यहां राम जानकी मंदिर बनाया गया। यहां का साप्ताहिक मेला प्रसिद्ध है।
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