{"_id":"59f22efa4f1c1b76678b7974","slug":"15090440428-jaunpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के लिए घाटों पर उमड़ी भीड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के लिए घाटों पर उमड़ी भीड़
Updated Fri, 27 Oct 2017 12:34 AM IST
विज्ञापन
हनुमान घाट पर छठ पूजा के दौरान अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देती महिलाएं
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जौनपुर। सूर्योपासना के महापर्व छठ पर गुरुवार को व्रती महिलाओं ने आस्था के साथ नदियों, सरोवरों के घाटों पर पुत्रों और परिवार के सदस्यों के साथ पहुंच कर पूजा की। स्नान - पूजन के बाद व्रती महिलाओं ने शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर सुख समृद्धि की कामना की। इस दौरान दीप प्रज्ज्वलित किया जिससे घाट रोशन हो उठे। व्रती महिलाओं के अलावा बड़ी संख्या में लोग पूजा का मनोहारी दृश्य देखने और मत्था टेकने के लिए पहुंचे थे। सड़कों से लेकर नदियों और सरोवरों के घाटों छठ पर्व की धूम रही।
जिले में गोमती, सई, बसुई, वरुणा नदी सहित ग्रामीण अंचल के तालाबों के घाटों पर बनाई गई वेदियों पर व्रती महिलाओं ने अपनी मनौती को पूरा करने के लिए दीप जलाकर पूजा किया। व्रती महिलाओं ने कमर तक जल में खड़ा होकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया। गुरुवार को हर तरफ मंगल गीत गूंज रहा था। शहर में गोमती के घाट पर मेले जैसा माहौल रहा। सिर पर दउरा लेकर पहुंची व्रती महिलाओं ने षष्ठी माता की वेदी पर साष्टांग दंडवत कर दीप जलाया तो किसी ने आंचल से रास्तों की धूल बटोर कर अपनी श्रद्धा से दीप प्रज्वलित किया। गोमती नदी नदी के सूरज घाट, गोकुल घाट, हनुमान घाट, विसर्जन घाट, स्वच्छ गोमती घाट पर तो मेले जैसा माहौल रहा। व्रती महिलाओं के साथ परिवार के लोग भी सिर पर दउरा लेकर पूजा के लिए घाटों पर पहुंचे। ढोलक की धुन पर मंगल गीत गाते हुए महिलाओं की टोली घाटों की तरफ बंढ़ रही थी। शाम तीन बजे से ही घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। सभी ने विधि विधान से छठ माता की पूजा। हर व्रती महिलाओं ने सिंदूर का लंबा टीका लगाकर पूजन अर्चन किया। आदि गंगा गोमती में खड़ी होकर महिलाओं ने भगवान को अघर्य दिया। अर्घ्य देने के बाद घाट से जलता हुआ दीपर लेकर घर वापस लौंटी। छठ माता की पूजा के लिए सुबह से घरों में तैयारी चल रही थी। दउरा फल और पूजा सामग्री सजाने के साथ सामानों को जुटाने में महिलाएं जुटी रहीं। भगावन भाष्कर को अर्घ्य देने के लिए दोपर तीन बजे से ही भीड़ जुटने लगी थी। छठ पूजा के चलते देर शाम तक गोमती नदी के घाट गुलजार रहे। शुक्रवार को सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देेने के साथ व्रत का समापन होगा। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था में सादे वेश में महिला सिपाही एवं अन्य पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था।
छठ पूजा से दैहिक, दैविक और भौतिक तापों से मुक्ति मिलती है। सूर्य पूजा से सौभाग्यवती महिलाओं को मिलने वाली शक्ति को सुरक्षा चक्र कहा जा सकता है। यह जानकारी देते हुए टीपी त्रिपाठी ने बताया कि महिलाएं जो स्वर्णाभूषण पहनती हैं उसमें अग्नि तत्व का वास होता है। इसलिए सूर्य पूजा के माध्यम से इन आभूषणों पर सूर्य के किरणें विभिन्न तरह से पड़कर उसे रिचार्ज करती है। पं. जितेंद्र शुक्ला ने कहा कि षष्ठी पर्व पर गुरुवार को डूबते सूर्य और शुक्रवार को उगते सूर्य की पूजा कर अर्घ्य देने का तात्पर्य है कि जो जन्म लेता है वह अस्त होता है और जो अस्त होता है वह उदित भी होता है। ज्योतिषी डा. शैलेश मोदनवाल ने बताया कि अस्ताचल सूर्य को नाभि तक पानी में खड़े होकर 12 बार डुबकी लगा कर अर्घ्य दिया जाता है। अर्घ्य देते समय दाहिनी एड़ी को उठाए रखना चाहिए। पं. मुरारी श्याम पांडेय ने बताया कि सप्तमी को व्रत उद्यापन के पूर्व अर्घ्य देकर यदि संभव हो तो घर के आठों दिशाओं में तांबे के सूर्य को स्थापित कर देना चाहिए। यदि तांबे के सूर्य न स्थापित कर सके तो लाल चंदन से सूर्य का चित्र बना कर प्रतिदिन प्रणाम करना चाहिए। इससे सुख समृद्धि आती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
जिले में गोमती, सई, बसुई, वरुणा नदी सहित ग्रामीण अंचल के तालाबों के घाटों पर बनाई गई वेदियों पर व्रती महिलाओं ने अपनी मनौती को पूरा करने के लिए दीप जलाकर पूजा किया। व्रती महिलाओं ने कमर तक जल में खड़ा होकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया। गुरुवार को हर तरफ मंगल गीत गूंज रहा था। शहर में गोमती के घाट पर मेले जैसा माहौल रहा। सिर पर दउरा लेकर पहुंची व्रती महिलाओं ने षष्ठी माता की वेदी पर साष्टांग दंडवत कर दीप जलाया तो किसी ने आंचल से रास्तों की धूल बटोर कर अपनी श्रद्धा से दीप प्रज्वलित किया। गोमती नदी नदी के सूरज घाट, गोकुल घाट, हनुमान घाट, विसर्जन घाट, स्वच्छ गोमती घाट पर तो मेले जैसा माहौल रहा। व्रती महिलाओं के साथ परिवार के लोग भी सिर पर दउरा लेकर पूजा के लिए घाटों पर पहुंचे। ढोलक की धुन पर मंगल गीत गाते हुए महिलाओं की टोली घाटों की तरफ बंढ़ रही थी। शाम तीन बजे से ही घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। सभी ने विधि विधान से छठ माता की पूजा। हर व्रती महिलाओं ने सिंदूर का लंबा टीका लगाकर पूजन अर्चन किया। आदि गंगा गोमती में खड़ी होकर महिलाओं ने भगवान को अघर्य दिया। अर्घ्य देने के बाद घाट से जलता हुआ दीपर लेकर घर वापस लौंटी। छठ माता की पूजा के लिए सुबह से घरों में तैयारी चल रही थी। दउरा फल और पूजा सामग्री सजाने के साथ सामानों को जुटाने में महिलाएं जुटी रहीं। भगावन भाष्कर को अर्घ्य देने के लिए दोपर तीन बजे से ही भीड़ जुटने लगी थी। छठ पूजा के चलते देर शाम तक गोमती नदी के घाट गुलजार रहे। शुक्रवार को सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देेने के साथ व्रत का समापन होगा। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था में सादे वेश में महिला सिपाही एवं अन्य पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था।
विज्ञापन
छठ पूजा से दैहिक, दैविक और भौतिक तापों से मुक्ति मिलती है। सूर्य पूजा से सौभाग्यवती महिलाओं को मिलने वाली शक्ति को सुरक्षा चक्र कहा जा सकता है। यह जानकारी देते हुए टीपी त्रिपाठी ने बताया कि महिलाएं जो स्वर्णाभूषण पहनती हैं उसमें अग्नि तत्व का वास होता है। इसलिए सूर्य पूजा के माध्यम से इन आभूषणों पर सूर्य के किरणें विभिन्न तरह से पड़कर उसे रिचार्ज करती है। पं. जितेंद्र शुक्ला ने कहा कि षष्ठी पर्व पर गुरुवार को डूबते सूर्य और शुक्रवार को उगते सूर्य की पूजा कर अर्घ्य देने का तात्पर्य है कि जो जन्म लेता है वह अस्त होता है और जो अस्त होता है वह उदित भी होता है। ज्योतिषी डा. शैलेश मोदनवाल ने बताया कि अस्ताचल सूर्य को नाभि तक पानी में खड़े होकर 12 बार डुबकी लगा कर अर्घ्य दिया जाता है। अर्घ्य देते समय दाहिनी एड़ी को उठाए रखना चाहिए। पं. मुरारी श्याम पांडेय ने बताया कि सप्तमी को व्रत उद्यापन के पूर्व अर्घ्य देकर यदि संभव हो तो घर के आठों दिशाओं में तांबे के सूर्य को स्थापित कर देना चाहिए। यदि तांबे के सूर्य न स्थापित कर सके तो लाल चंदन से सूर्य का चित्र बना कर प्रतिदिन प्रणाम करना चाहिए। इससे सुख समृद्धि आती है।
विज्ञापन