{"_id":"59eb986f4f1c1b60678b6ab4","slug":"15086122815-jaunpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बहनों ने की भाई के दीर्घायु की कामना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बहनों ने की भाई के दीर्घायु की कामना
Updated Sun, 22 Oct 2017 12:44 AM IST
विज्ञापन
भगवती कालोनी में भैयादूज पर पूजा करतीं बहनें।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जौनपुर। भाई-बहन के बीच अटूट प्यार का प्रतीक पर्व भैया दूज शनिवार को जिले भर में परंपरागत ढंग से मनाया गया। सुबह बहनों ने विधान के साथ पूजन किया और भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनके दीर्घायु होने की कामना की। यम द्वितीया पर मनाए जाने वाले भाई बहन के स्नेह के इस पर्व पर खुशी का माहौल रहा। सुबह से घर में चौक बनाकर उसमें भटकइया, सुपाड़ी सहित अन्य सामग्री के साथ मूसल से सुपाड़ी फोड़कर यम देवता की पूजा की गई।
पौराणिक कथाओं के अनुसार एक भाई बहन में बड़ा प्रेम था। उसके बहनोई ने उसे संपत्ति की लालच में फंसा दिया। उसे जज ने फांसी की सजा सुनाई। जज ने पूछा की तुम्हारी अंतिम इच्छा क्या है तो उसने जवाब दिया कि मैं अपनी बहन से भैया दूज का टीका लगवाना चाहता हूं। बहनोई सब कुछ जानता था। उसने कुचक्र रच कर उसे बहन के पास जाने से मना करवा दिया। इस पर उसने मन ही मन भगवान की पूजा की। इस पर भगवान प्रकट हुए और उसे कुत्ते का रूप दे दिया। वह नाली के रास्ते अपनी बहन के पास पहुंचा तो देखा कि उसकी बहन रोचना पीस रही थी। वह उसे चाटने लगा। इतने में बहन ने उसे हाथ से मारा तो बहन का हाथ उसके माथे पर लग गया और वह अमर हो गया। फिर क्या था, उसकी सजा माफ हो गई और बदले में बहनोई को जेल हो गई। तभी से भाई बहन के इस प्रतीक पर्व को भैया दूज के रुप में जाना जाता है। ऐसी भी मान्यता है कि यम द्वितीया के दिन बहन के घर भोजन करने के बाद विश्राम करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
विज्ञापन
पौराणिक कथाओं के अनुसार एक भाई बहन में बड़ा प्रेम था। उसके बहनोई ने उसे संपत्ति की लालच में फंसा दिया। उसे जज ने फांसी की सजा सुनाई। जज ने पूछा की तुम्हारी अंतिम इच्छा क्या है तो उसने जवाब दिया कि मैं अपनी बहन से भैया दूज का टीका लगवाना चाहता हूं। बहनोई सब कुछ जानता था। उसने कुचक्र रच कर उसे बहन के पास जाने से मना करवा दिया। इस पर उसने मन ही मन भगवान की पूजा की। इस पर भगवान प्रकट हुए और उसे कुत्ते का रूप दे दिया। वह नाली के रास्ते अपनी बहन के पास पहुंचा तो देखा कि उसकी बहन रोचना पीस रही थी। वह उसे चाटने लगा। इतने में बहन ने उसे हाथ से मारा तो बहन का हाथ उसके माथे पर लग गया और वह अमर हो गया। फिर क्या था, उसकी सजा माफ हो गई और बदले में बहनोई को जेल हो गई। तभी से भाई बहन के इस प्रतीक पर्व को भैया दूज के रुप में जाना जाता है। ऐसी भी मान्यता है कि यम द्वितीया के दिन बहन के घर भोजन करने के बाद विश्राम करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
विज्ञापन