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आधा सत्र बीत गया, नहीं पहुंची किताबें
Updated Tue, 05 Sep 2017 12:32 AM IST
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जौनपुर। शिक्षण सत्र का आधा समय बीत गया लेकिन परिषदीय विद्यालयों के बच्चों के हाथों में अभी सभी विषयों की पुस्तकें नहीं पहुंच पाई हैं। जिले में पुस्तकें तो उपलब्ध हो गईं हैं लेकिन व्यवस्थित ढंग से वितरण नहीं होने के कारण यह समस्या पैदा हुई है। स्थिति यह है कि किसी बच्चे को गणित की पुस्तक मिली है तो उसे अंग्रेजी की नहीं मिल पाई है। ऐसे में आधी अधूरी किताबों के सहारे पढ़ाई की खानापूर्ति की जा रही है। बुनियादी शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए जिला प्रशासन की तरफ से की जा रही सारी कवायद फेल साबित हो रही है।
जिले में कुल 2416 प्राथमिक विद्यालयों में 4 लाख 14 हजार 575 छात्र पढ़ते हैं। जबकि 878 जूनियर हाईस्कूलों में एक लाख 26 हजार 740 छात्रों का नामांकन हुआ है। प्राइमरी और जूनियर विद्यालयों में कुल 5 लाख 413 छात्र हैं। इतने छात्रों को शिक्षित करने के लिए करीब 40 करोड़ से अधिक का बजट सिर्फ शिक्षकों के वेतन पर खर्च किया जाता है। लेकिन परिषदीय विद्यालयों में पढ़ाई करने वाले बच्चों की शिक्षा व्यवस्था बदतर हो गई है। बच्चों को स्कूल ड्रेस तो मिल गया लेकिन जिन किताबों से उन्हें पढ़ाई करनी है वह किताब ही उनके हाथ में अभी तक नहीं पहुंच सकी है। परिषदीय विद्यालयों का शिक्षण सत्र एक अप्रैल से ही शुरू हो जाता है। इस हिसाब से आधा सत्र बीत गया लेकिन अभी तक बच्चों को सभी विषयों की किताबें नहीं मिल सकीं हैं। जिले में कक्षा एक से पांच तक के लिए 1330307 किताबों की मांग की गई थी जिसमें 1330275 किताबें प्राप्त हो चुकी हैं। अभी तक करीब सात लाख ही किताबें विद्यालयों में पहुंच सकी हैं। इसी प्रकार छठवीं से आठवीं तक के लिए 1546696 किताबों की मांग गई थी जिसमें से 1515962 किताबें आ चुकी हैं। लेकिन वितरण अभी तक सिर्फ 835821 किताबों का ही वितरण हो सका है। इस हिसाब से प्राइमरी और जूनियर विद्यालयों के लिए कुल 28 लाख 46 हजार पुस्तकों में से 13 लाख 39 हजार अभी नहीं बट सकी हैं। बीएसए डा. राजेेंद्र सिंह ने बताया कि जिले में एजेंसी से किताबों की आपूर्ति देर से की गई। किताबों की आपूर्ति विद्यालयों में शुरू करा दी गई है। शीघ्र ही सभी बच्चों को सभी विषयों की किताबें मिल जाएंगी।
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जिले में कुल 2416 प्राथमिक विद्यालयों में 4 लाख 14 हजार 575 छात्र पढ़ते हैं। जबकि 878 जूनियर हाईस्कूलों में एक लाख 26 हजार 740 छात्रों का नामांकन हुआ है। प्राइमरी और जूनियर विद्यालयों में कुल 5 लाख 413 छात्र हैं। इतने छात्रों को शिक्षित करने के लिए करीब 40 करोड़ से अधिक का बजट सिर्फ शिक्षकों के वेतन पर खर्च किया जाता है। लेकिन परिषदीय विद्यालयों में पढ़ाई करने वाले बच्चों की शिक्षा व्यवस्था बदतर हो गई है। बच्चों को स्कूल ड्रेस तो मिल गया लेकिन जिन किताबों से उन्हें पढ़ाई करनी है वह किताब ही उनके हाथ में अभी तक नहीं पहुंच सकी है। परिषदीय विद्यालयों का शिक्षण सत्र एक अप्रैल से ही शुरू हो जाता है। इस हिसाब से आधा सत्र बीत गया लेकिन अभी तक बच्चों को सभी विषयों की किताबें नहीं मिल सकीं हैं। जिले में कक्षा एक से पांच तक के लिए 1330307 किताबों की मांग की गई थी जिसमें 1330275 किताबें प्राप्त हो चुकी हैं। अभी तक करीब सात लाख ही किताबें विद्यालयों में पहुंच सकी हैं। इसी प्रकार छठवीं से आठवीं तक के लिए 1546696 किताबों की मांग गई थी जिसमें से 1515962 किताबें आ चुकी हैं। लेकिन वितरण अभी तक सिर्फ 835821 किताबों का ही वितरण हो सका है। इस हिसाब से प्राइमरी और जूनियर विद्यालयों के लिए कुल 28 लाख 46 हजार पुस्तकों में से 13 लाख 39 हजार अभी नहीं बट सकी हैं। बीएसए डा. राजेेंद्र सिंह ने बताया कि जिले में एजेंसी से किताबों की आपूर्ति देर से की गई। किताबों की आपूर्ति विद्यालयों में शुरू करा दी गई है। शीघ्र ही सभी बच्चों को सभी विषयों की किताबें मिल जाएंगी।
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