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कार्यालय का चक्कर लगाने वाले शिक्षकों पर नकेल की तैयारी
Updated Fri, 28 Jul 2017 12:42 AM IST
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जौनपुर। प्राथमिक शिक्षा को पटरी पर लाने के लिए शिक्षकों पर नकेल कसने की तैयारी डीएम ने शुरू कर दी है। डीएम के निर्देश पर बीएसए दफ़्तर को चक्कर लगाने वाले शिक्षकों पर न केवल कार्यवाही होगी बल्कि ऐसे शिक्षकों को स्कूल जाने के लिए मजबूर भी किया जाएगा। बीएसए ने ऐसे शिक्षकों की सूची सभी खंड शिक्षा अधिकारियों से मांगी है।
जिले में 2416 प्राथमिक और 878 जूनियर विद्यालय हैं। वैसे तो शिक्षकों की संख्या 4000 से अधिक है। जिसमें 500 से अधिक ऐसे शिक्षक हैं जो कभी कभार ही स्कूल जाते हैं। इसमें से कुछ संगठन के नाम पर कार्यालय पर मडराते रहते हैं। तो कुछ नेताओं की परिक्रमा के अलावा ठेकेदारी एवं जमीन के काम के चक्कर में स्कूल कम ही जाते हैं। ऐसे में प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था चौपट हो गई है। डीएम सर्वज्ञ राम मिश्रा ने तकरीबन 200 प्राथमिक स्कूलों को माडल बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके साथ ही उन्होंने स्कूल न जाने वाले शिक्षकों की सूची तैयार करने का निर्देश बीएसए को दिया है। जिस पर ऐसे शिक्षकों की सूची तैयार की जा रही है। वैसे खंड शिक्षा अधिकारी भी किसी से कम नही हैं वह भी शिक्षकों से अपना निजी कार्य कराते हैं। उन्हीं की गाड़ियों में बैठ कर ड्यूटी पर जाते हैं। कुछ शिक्षकों ने तो अपने जगह पर तीन से पांच हजार रुपये देकर बेरोजगार लड़कों को पढ़ाने के लिए रख लिया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डा. राजेंद्र सिंह का कहना है कि शिक्षकों पर नकेल कसी जाएगी। स्कूल न जाने वाले शिक्षकों को चिन्हित किया जा रहा है। (ब्यूरो)
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जिले में 2416 प्राथमिक और 878 जूनियर विद्यालय हैं। वैसे तो शिक्षकों की संख्या 4000 से अधिक है। जिसमें 500 से अधिक ऐसे शिक्षक हैं जो कभी कभार ही स्कूल जाते हैं। इसमें से कुछ संगठन के नाम पर कार्यालय पर मडराते रहते हैं। तो कुछ नेताओं की परिक्रमा के अलावा ठेकेदारी एवं जमीन के काम के चक्कर में स्कूल कम ही जाते हैं। ऐसे में प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था चौपट हो गई है। डीएम सर्वज्ञ राम मिश्रा ने तकरीबन 200 प्राथमिक स्कूलों को माडल बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके साथ ही उन्होंने स्कूल न जाने वाले शिक्षकों की सूची तैयार करने का निर्देश बीएसए को दिया है। जिस पर ऐसे शिक्षकों की सूची तैयार की जा रही है। वैसे खंड शिक्षा अधिकारी भी किसी से कम नही हैं वह भी शिक्षकों से अपना निजी कार्य कराते हैं। उन्हीं की गाड़ियों में बैठ कर ड्यूटी पर जाते हैं। कुछ शिक्षकों ने तो अपने जगह पर तीन से पांच हजार रुपये देकर बेरोजगार लड़कों को पढ़ाने के लिए रख लिया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डा. राजेंद्र सिंह का कहना है कि शिक्षकों पर नकेल कसी जाएगी। स्कूल न जाने वाले शिक्षकों को चिन्हित किया जा रहा है। (ब्यूरो)
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