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जिसे लगाया मक्खन, तूने उसने लगा दिया चूना 19-34-43
Updated Sun, 23 Jul 2017 12:51 AM IST
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सिकरारा। बीआरसी भवन के सभागार में शुक्त्रस्वार की रात आयोजित राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में प्रदेश के कोने-कोने से आये कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओ को झुमने पर विवश किया। शायरों की एक से बढ़कर एक हंसी के छन्दों की गुदगुदी से ठहाकों की महफिल में दर्शक लोटपोट हो गए। इस दौरान कजरी, हास्य रस, बीर रस, श्रृंगार रस, करुण रसए व बारहमासा जैसी रचनाओं को सुनने के लिए श्रोता देर रात तक डटे रहे। कार्यक्त्रस्म का शुभारंभ प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष अमित कुमार सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
बूचा फिरोजाबादी ने कौन बड़ा दीवाना, कैसे तूने जाना व आने वाले बहुत से देखे आंख चुराकर चले गए दामन, जिसे थमाया अपना दाग लगाकर चले गए रचना सुनकर लोग लोट पोट हो गए। उन्ही की रचना जिसे लगाया मख्खन तूने, उसने लगा दिया चूना सुनाकर ठहाका लगाने पर विवश कर दिया। जिला संयोजक प्राख्यात कवि अमृत प्रकाश ने आते जाते लोगो से माचिस मांगता हूं, जाने क्या जलाना चाहता हूं सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। प्रतापगढ़ जिले से आये कवि लालमनी ने अपनी बारहमासा रचना सजनी. सजना जब आई गए, तब से सजना मोहि भावत है सुनाकर श्रोताओं को तालियां बजाने को मजबूर कर दिया। आचार्य राहुल राज मिश्रा ने गीतों के माध्यम से सभी को भावुक किया तो वाराणसी के कवि सार्थक उपाध्याय ने दहेज पर प्रहार करते हुए चेहरा तो मानो आंगन सुनाकर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। भोजपुरी कवि विपिन विहारी ने रिमझिम बरसे कारे बदरवा, मनवा रहि.रहि हरषे ना और प्रांतीय सह संयोजक सर्वेश कुमार मिश्र ने किसी से रूठकर मुकाम हो जाऊंगा व युवा कवि शैलेष सरोज ने बहुत दिन हो गए, आंखो में वो मंजर नहीं आते सुनाकर मंत्रमुग्ध कर दिया। वाराणसी बीएचयू के युवा कवि सर्वेश त्रिपाठी ने दरवाजे ही दरवाजे हैं, दरवाजे के अंदर ही और कवि शिव प्रताप ने दिखा रहे हो यू मुंह फेर कर तो क्या समझे सुनाकर वाहवाही लूटी। संरक्षक रामानन्द जायसवाल ने कवियों को अंगवस्त्रम व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन कवि आशुतोष पाल ने किया।
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बूचा फिरोजाबादी ने कौन बड़ा दीवाना, कैसे तूने जाना व आने वाले बहुत से देखे आंख चुराकर चले गए दामन, जिसे थमाया अपना दाग लगाकर चले गए रचना सुनकर लोग लोट पोट हो गए। उन्ही की रचना जिसे लगाया मख्खन तूने, उसने लगा दिया चूना सुनाकर ठहाका लगाने पर विवश कर दिया। जिला संयोजक प्राख्यात कवि अमृत प्रकाश ने आते जाते लोगो से माचिस मांगता हूं, जाने क्या जलाना चाहता हूं सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। प्रतापगढ़ जिले से आये कवि लालमनी ने अपनी बारहमासा रचना सजनी. सजना जब आई गए, तब से सजना मोहि भावत है सुनाकर श्रोताओं को तालियां बजाने को मजबूर कर दिया। आचार्य राहुल राज मिश्रा ने गीतों के माध्यम से सभी को भावुक किया तो वाराणसी के कवि सार्थक उपाध्याय ने दहेज पर प्रहार करते हुए चेहरा तो मानो आंगन सुनाकर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। भोजपुरी कवि विपिन विहारी ने रिमझिम बरसे कारे बदरवा, मनवा रहि.रहि हरषे ना और प्रांतीय सह संयोजक सर्वेश कुमार मिश्र ने किसी से रूठकर मुकाम हो जाऊंगा व युवा कवि शैलेष सरोज ने बहुत दिन हो गए, आंखो में वो मंजर नहीं आते सुनाकर मंत्रमुग्ध कर दिया। वाराणसी बीएचयू के युवा कवि सर्वेश त्रिपाठी ने दरवाजे ही दरवाजे हैं, दरवाजे के अंदर ही और कवि शिव प्रताप ने दिखा रहे हो यू मुंह फेर कर तो क्या समझे सुनाकर वाहवाही लूटी। संरक्षक रामानन्द जायसवाल ने कवियों को अंगवस्त्रम व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन कवि आशुतोष पाल ने किया।
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