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भक्ति गीतों से गूंजता रहा मंदिर परिसर
Updated Sun, 25 Jun 2017 01:23 AM IST
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जौनपुर। गायत्री प्रज्ञा मंडल महिला मंडल जज कालोनी परिसर में आयोजित नौ कुंडीय गायत्री महायज्ञ के मौके पर मंदिर परिसर को 1051 दीपों से सजाया गया। चार दिवसीय योग और संस्कार महोत्सव में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया।
सुबह नौ कुंडीय गायत्री यज्ञ शुरू हुआ। साधकों को योग के लाभ से सिंचित किया गया। शांति कुंज हरिद्वार से आए संत अतुल द्विवेदी यज्ञ से मानव के साथ प्रकृति को भी लाभ मिलता है। यज्ञ का अर्थ सत्कर्म। गायत्री का अर्थ है सद्विवेक अर्थात जब मां की कृपा होगी तभी हमारा सद्विवेक जागृत होगा और हम सद्कर्म की तरफ प्रेरित होंगे। मानव जीवन के सार्थकता सत्य मार्ग पर चलते हुए सत्य कर्म करने से साबित होगी। अन्यथा हमारे जीवन का कोई महत्व नहीं रह जाएगा। जीवन पशु के समान रह जाएगा। भजन गायक शंभूनाथ पांडेय ने भजन प्रस्तुत कर पूरे परिसर को भक्ति रस में डूबो दिया। दीपों की शीतल आभा में पूरा मंदिर परिसर जगमगा उठा। देशबंधु पद्माकर मिश्र ने कहा कि दीप हमें तिल-तिल जलने की प्रेरणा देते हैं। दीपक से जलकर दूसरों को प्रकाश देने की सीख देते हैं। हम दीपक के समान भाव रखकर समाज के लिए कुछ करने की जरूरत है। अज्ञान रूपी अंधकार से प्रकाश की तरफ ले जाने की प्रेरणा देते हैं। इस मौके पर सत्यभान प्रताप, प्रदीप सिंह, प्रेमचंद, बच्चा राय, देवेंद्र, निर्मला, मालती, ऋचा, संतोष, शशि, पार्थ साहू, संध्या, निशा आदि मौजूद थी।
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सुबह नौ कुंडीय गायत्री यज्ञ शुरू हुआ। साधकों को योग के लाभ से सिंचित किया गया। शांति कुंज हरिद्वार से आए संत अतुल द्विवेदी यज्ञ से मानव के साथ प्रकृति को भी लाभ मिलता है। यज्ञ का अर्थ सत्कर्म। गायत्री का अर्थ है सद्विवेक अर्थात जब मां की कृपा होगी तभी हमारा सद्विवेक जागृत होगा और हम सद्कर्म की तरफ प्रेरित होंगे। मानव जीवन के सार्थकता सत्य मार्ग पर चलते हुए सत्य कर्म करने से साबित होगी। अन्यथा हमारे जीवन का कोई महत्व नहीं रह जाएगा। जीवन पशु के समान रह जाएगा। भजन गायक शंभूनाथ पांडेय ने भजन प्रस्तुत कर पूरे परिसर को भक्ति रस में डूबो दिया। दीपों की शीतल आभा में पूरा मंदिर परिसर जगमगा उठा। देशबंधु पद्माकर मिश्र ने कहा कि दीप हमें तिल-तिल जलने की प्रेरणा देते हैं। दीपक से जलकर दूसरों को प्रकाश देने की सीख देते हैं। हम दीपक के समान भाव रखकर समाज के लिए कुछ करने की जरूरत है। अज्ञान रूपी अंधकार से प्रकाश की तरफ ले जाने की प्रेरणा देते हैं। इस मौके पर सत्यभान प्रताप, प्रदीप सिंह, प्रेमचंद, बच्चा राय, देवेंद्र, निर्मला, मालती, ऋचा, संतोष, शशि, पार्थ साहू, संध्या, निशा आदि मौजूद थी।
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