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अलवविदा 2018 जौनपुर

Fri, 28 Dec 2018 12:23 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 28 Dec 2018 12:23 AM IST
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अलवविदा 2018 जौनपुर
जौनपुर। नदियों के संरक्षण, पर्यावरण और स्वच्छता के लिए सरकारी और गैर सरकारी स्तर पर भी प्रयास तो खूब हुए पर धरातल पर नतीजा नहीं दिखा। स्वच्छ भारत मिशन के तहत घर-घर शौचालय बनवाने के नाम पर 4.88 अरब 40 लाख का भारीभरकम बजट खर्च किया गया लेकिन शहर में गोमती के किनारे से लेकर गांवों तक आज भी तमाम लोग शौच के लिए खुले में जाते हैं। अब एक बार फिर से हुए सर्वे में पाया गया है कि अभी 1.22 लाख 312 शौचालय बनवाने की जरूरत है। इस लक्ष्य को 31 जनवरी 2019 तक पूरा करने की तैयारी की गई है।
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पर्यावरण संरक्षण के लिए वन विभाग ने एक साल के भीतर 14 लाख पौधे लगाने का दावा किया है लेकिन इन पौधों में 60 फीसदी से अधिक पौधे सूख चुके हैं। वन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2018 में अलग अलग स्थानों से कुल सात हजार हरे पेड़ काटे गए हैं। जबकि हरे पेड़ों के कटने की संख्या विभागीय दावे से पांच गुना से भी अधिक होगा। अभी इसी महीने में प्रदेश सरकार ने जिले में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए 302 करोड़ का बजट मंजूर किया है। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगा तो गोमती नदी में प्रदूषण का स्तर काफी कम हो सकता है। संकट मोचन फाउंडेशन की स्वच्छ गंगा रिसर्च लैबोरेट्री की एक साल पहले की रिपोर्ट है कि जौनपुर में गोमती नदी के पानी में प्रदूषण का स्तर इस कदर है कि नदी का पानी हाथ धोने लायक भी नहीं है। नदी के पानी से हाथ धोने पर 14 प्रकार के चर्म रोग हो सकते हैं। जाहिर सी बात है कि इस रिपोर्ट के बाद से अब तक नदी में प्रदूषण कम करने के लिए कोई काम नहीं हुआ है। इससे प्रदूषण कम होने का अनुमान लगाया जा सके। शहर में कटघरा स्थित बारह दुअरिया के पास नगरपालिका द्वारा नदी के तट पर कूंड़ा डंप करने का काम अभी भी बंद नहीं हुआ। इससे यहां नदी के किनारे कूड़े का पहाड़ बन गया है।
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जौनपर। जिले की एक बड़ी आबादी भले ही आज भी खुले में शौच के लिए जाती है पर कागजों में जिले को इसी वर्ष गांधी जयंती पर ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) घोषित कर दिया गया है। सिर्फ गांव ही नहीं बल्कि शहर में भी बहुत से लोग खुले में शौच के लिए जाते हैं। शहर में गोमती नदी के किनारे शाही पुल से सद्भावना पुल और शास्त्री पुल के बीच सुबह से लेकर शाम तक किसी भी समय लोगों को खुले में शौच जाते देखा जा सकता है।
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जौनपुर। गोमती नदी के तट पर हुए अवैध कब्जे को भी नहीं हटाया जा सका। शहर के मध्य से होकर गुजरने वाली गोमती नदी के तट पर सद्भावना पुल और आसपास के इलाकों में नदी के तट पर लोगों ने पक्का निर्माण करा लिया है। सामाजिक संस्था स्वच्छ गोमती अभियान के गौतम गुप्ता की ओर से नदी के तट से अवैध कब्जा हटाने के लिए जिला प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री के जन सुनवाई पोर्टल पर भी शिकायत की गई है। शिकायत पर एसडीएम सदर ने मौके का निरीक्षण भी किया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।



जौनपुर। करीब 50 लाख से अधिक आबादी वाले इस जिले के बक्शा विकास खंड के काजी नेवादा, केवटली, बदलापुर का मछलीगांव और सिकरारा का इब्राहिमपुर गांव स्वच्छता के लिए मॉडल के रूप में जाना जाता है। जिला पंचायत राज अधिकारी सभाजीत कहते हैं कि इन गांवों को स्वच्छता में महत्वपूर्ण योगदान है। नेवादा काजी के ग्राम प्रधान अमित सिंह कहते हैं कि जन जागरुकता से ही ऐसा संभव हो सका है। हर घर में शौंचालय बना है और कोई भी सदस्य खुले में शौच नहंीं जाता।
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