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Jaunpur News: एक हेक्टेयर में उगाईं आम की 140 दुर्लभ किस्में, आम महोत्सव में होंगे सम्मानित
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सूर्यभान यादव के भगीचे में तैयार हुआ आम। सूचना विभाग
जौनपुर। सिकरारा विकास खंड के विशुनपुर (लाला बाजार) निवासी प्रगतिशील कृषक सूर्यभान यादव ने एक हेक्टेयर भूमि में आम की 140 प्रजातियों का एक शानदार मॉडल बाग विकसित किया है। इस बाग से प्रतिवर्ष लगभग 200 क्विंटल आम का उत्पादन होता है, जिससे उन्हें करीब 4 लाख रुपये का शुद्ध वार्षिक लाभ मिल रहा है। जिला उद्यान अधिकारी डॉ. सीमा सिंह राणा ने बताया कि आगामी 3, 4 एवं 5 जुलाई को लखनऊ में आयोजित होने वाले ''उत्तर प्रदेश आम महोत्सव-2026'' में सूर्यभान यादव को इस उत्कृष्ट और प्रेरणादायी कार्य के लिए सम्मानित करने के लिए नामित किया गया है।
सूर्यभान यादव ने बताया कि वो वर्षों से कृषि एवं बागवानी कार्यों से जुड़े रहे हैं। उनके पास पहले आम का एक पारंपरिक बाग था, लेकिन उन्होंने इसे आधुनिक तकनीकों और दुर्लभ प्रजातियों के समावेश से एक नई पहचान देने का संकल्प लिया। इस अभिनव प्रयास को उनके पुत्र अनिल यादव की बागवानी के प्रति विशेष रुचि ने और गति प्रदान की। देश-विदेश की विभिन्न आम प्रजातियों के बारे में गहन जानकारी जुटाकर पिता-पुत्र ने अपने एक हेक्टेयर क्षेत्रफल के बाग में विभिन्न दुर्लभ किस्मों का संग्रह एवं संरक्षण शुरू किया।
दुनिया के सबसे महंगे आमों में शुमार ''मियाजाकी'' भी इनके बाग में
आज उनके बाग में दुनिया के सबसे महंगे आमों में शुमार जापान का ''मियाजाकी'', ''कियो सैतो कप्पात'', ''रेड आइवरी'', ''ब्लूई किंग'', ''एप्पल मैंगो'' और ''ताइवानी रेड'' सहित लगभग 140 उन्नत एवं दुर्लभ प्रजातियां सफलतापूर्वक फल दे रही हैं। यह बाग आज जैव-विविधता संरक्षण और आधुनिक बागवानी का एक उत्कृष्ट मॉडल बन चुका है। सूर्यभान यादव ने अपनी कड़ी मेहनत और उद्यान विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन से क्षेत्र में सफलता की एक अनूठी मिसाल पेश की है। यही कारण है कि उनका यह आम का बाग आज जनपद ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा का एक बड़ा केंद्र बन चुका है।
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उद्यान विभाग के तकनीकी सहयोग से मिली नई उड़ान
इस आधुनिक बाग को तैयार करने में उद्यान विभाग ने भी सराहनीय तकनीकी सहयोग दिया है। विभाग द्वारा उन्हें भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान से विकसित विशेष आम प्रजातियों के पौधे उपलब्ध कराए गए। इसके अतिरिक्त, बाग में ड्रिप सिंचाई प्रणाली (टपक सिंचाई) स्थापित कराई गई, जिससे जल संरक्षण के साथ-साथ पौधों की बेहतर वृद्धि सुनिश्चित हुई। जैविक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभागीय सहायता से वर्मी कम्पोस्ट बेड की स्थापना भी कराई गई, जिससे कृषक अब स्वयं जैविक खाद तैयार कर पौधों को भरपूर पोषण प्रदान कर रहे हैं। साथ ही, उद्यान विशेषज्ञों द्वारा समय-समय पर बाग का निरीक्षण कर वैज्ञानिक छंटाई (प्रूनिंग), कीट एवं रोग प्रबंधन तथा ''अल्ट्रा हाई डेंसिटी प्लांटेशन'' (सघन बागवानी) जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण भी दिया गया है।
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सूर्यभान यादव ने बताया कि वो वर्षों से कृषि एवं बागवानी कार्यों से जुड़े रहे हैं। उनके पास पहले आम का एक पारंपरिक बाग था, लेकिन उन्होंने इसे आधुनिक तकनीकों और दुर्लभ प्रजातियों के समावेश से एक नई पहचान देने का संकल्प लिया। इस अभिनव प्रयास को उनके पुत्र अनिल यादव की बागवानी के प्रति विशेष रुचि ने और गति प्रदान की। देश-विदेश की विभिन्न आम प्रजातियों के बारे में गहन जानकारी जुटाकर पिता-पुत्र ने अपने एक हेक्टेयर क्षेत्रफल के बाग में विभिन्न दुर्लभ किस्मों का संग्रह एवं संरक्षण शुरू किया।
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दुनिया के सबसे महंगे आमों में शुमार ''मियाजाकी'' भी इनके बाग में
आज उनके बाग में दुनिया के सबसे महंगे आमों में शुमार जापान का ''मियाजाकी'', ''कियो सैतो कप्पात'', ''रेड आइवरी'', ''ब्लूई किंग'', ''एप्पल मैंगो'' और ''ताइवानी रेड'' सहित लगभग 140 उन्नत एवं दुर्लभ प्रजातियां सफलतापूर्वक फल दे रही हैं। यह बाग आज जैव-विविधता संरक्षण और आधुनिक बागवानी का एक उत्कृष्ट मॉडल बन चुका है। सूर्यभान यादव ने अपनी कड़ी मेहनत और उद्यान विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन से क्षेत्र में सफलता की एक अनूठी मिसाल पेश की है। यही कारण है कि उनका यह आम का बाग आज जनपद ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा का एक बड़ा केंद्र बन चुका है।
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उद्यान विभाग के तकनीकी सहयोग से मिली नई उड़ान
इस आधुनिक बाग को तैयार करने में उद्यान विभाग ने भी सराहनीय तकनीकी सहयोग दिया है। विभाग द्वारा उन्हें भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान से विकसित विशेष आम प्रजातियों के पौधे उपलब्ध कराए गए। इसके अतिरिक्त, बाग में ड्रिप सिंचाई प्रणाली (टपक सिंचाई) स्थापित कराई गई, जिससे जल संरक्षण के साथ-साथ पौधों की बेहतर वृद्धि सुनिश्चित हुई। जैविक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभागीय सहायता से वर्मी कम्पोस्ट बेड की स्थापना भी कराई गई, जिससे कृषक अब स्वयं जैविक खाद तैयार कर पौधों को भरपूर पोषण प्रदान कर रहे हैं। साथ ही, उद्यान विशेषज्ञों द्वारा समय-समय पर बाग का निरीक्षण कर वैज्ञानिक छंटाई (प्रूनिंग), कीट एवं रोग प्रबंधन तथा ''अल्ट्रा हाई डेंसिटी प्लांटेशन'' (सघन बागवानी) जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण भी दिया गया है।