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सैय्यद मंसूर बाबा के मजार पर जायरीनों ने चढ़ाई चादर
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सतहरिया। मुंगराबादशाहपुर के मोहल्ला सिपाह स्थित सैय्यद मंसूर बाबा का चौथा उर्स अकीदत तथा शान शौकत के साथ मनाया गया। शुरुआत में बाबा के मजार को गुलाल व केवड़ा जल से नहलाया गया। गुलपोशी की गई।
फूल शाह बाबा सिनेमा गली से गाजेबाजे के साथ चादर-गागर का जुलूस निकाला गया। लोग सिर पर गागर लेकर चल रहे थे। जुलूस कदीमी रास्ते से होकर बाबा के माजार पर पहुंचा। जहां पर जायरीनों ने बाबा के मजार पर चादर चढ़ाई और मन्नतें मांगी। जुलूस के शक्ल में शामिल लोग बाबा के शान में नात पढ़ते हुए चल रहे थे। मजार को रंगबिरंगी झालरों से सजाया गया था। बदायूं शरीफ से आए कव्वाल जुनैद सुल्तानी मंडली द्वारा पेश किए गए नामचीन नातियां कलाम जलसे में समां बांधा। हिंदू मुस्लिम एक ही थाली में खाएं, ऐसा हिन्दूस्तान बना दे या अल्लाह, नबी से मेरा रिश्ता कल भी आज भी, इसे सुन श्रोता झूम उठे। सूफी गुलाम नबी उल्ला शाह मुगलसराय के संरक्षण में सारा कार्यक्रम संपन्न हुआ। खादिम खालिक अंसारी, शोएब, अफाक खान, बबलू, शालू ने व्यवस्था में सहयोग किया। मुख्य रूप से शबाब, विजय, नीलू, हिमांशु, राजेश, नूरू, फारुख, हनिफ, अयाज, अनम आदि रहे।
फूल शाह बाबा सिनेमा गली से गाजेबाजे के साथ चादर-गागर का जुलूस निकाला गया। लोग सिर पर गागर लेकर चल रहे थे। जुलूस कदीमी रास्ते से होकर बाबा के माजार पर पहुंचा। जहां पर जायरीनों ने बाबा के मजार पर चादर चढ़ाई और मन्नतें मांगी। जुलूस के शक्ल में शामिल लोग बाबा के शान में नात पढ़ते हुए चल रहे थे। मजार को रंगबिरंगी झालरों से सजाया गया था। बदायूं शरीफ से आए कव्वाल जुनैद सुल्तानी मंडली द्वारा पेश किए गए नामचीन नातियां कलाम जलसे में समां बांधा। हिंदू मुस्लिम एक ही थाली में खाएं, ऐसा हिन्दूस्तान बना दे या अल्लाह, नबी से मेरा रिश्ता कल भी आज भी, इसे सुन श्रोता झूम उठे। सूफी गुलाम नबी उल्ला शाह मुगलसराय के संरक्षण में सारा कार्यक्रम संपन्न हुआ। खादिम खालिक अंसारी, शोएब, अफाक खान, बबलू, शालू ने व्यवस्था में सहयोग किया। मुख्य रूप से शबाब, विजय, नीलू, हिमांशु, राजेश, नूरू, फारुख, हनिफ, अयाज, अनम आदि रहे।
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