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12 गांवों में घुसा बाढ़ का पानी
jaunpur
Updated Sun, 21 Aug 2016 12:29 AM IST
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निषाद बस्ती में शनिवार को घुसा गोमती नदी का पानी
- फोटो : jaunpur
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गोमती नदी में लगातार बढ़ रह जलस्तर से बाढ़ के पानी ने गांवों का रुख कर लिया है। पानी केराकत तहसील के चंदवक इलाके के 12 गांवों में घुस गया है। इससे जहां एक ओर पलायन करने को विवश हैं तो वहीं मवेशियों के लिए चारे का संकट पैदा हो गया है। पानी से होकर लोग निकल रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ बाढ़ को लेकर प्रशासन की सक्रियता नहीं दिख रही। अभी तक प्रशासनिक अमला गांव में नहीं पहुंचा है।
डोभी ब्लाक के बरमलपुर, बरौटी, बरईछ, रामगढ़, हरिहरपुर, चवरवर, बलुवां, पडरछा, व बाबाकाबन आदि गांवों में गोमती नदी का पानी घुस गया है। पशुओं को चारा भी नहीं मिल पा रहा है। बावजूद इसके वहां न तो बाढ़ चौकी स्थापित की गई और न ही नाविक, गोताखोर व कर्मचारी ही तैनात किए गए हैं। शनिवार की शाम तक इन गांवों में बाढ़ का जायजा लेने कोई अधिकारी भी नहीं पहुंचा। गोमती नदी के जल स्तर में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। 15 अगस्त से प्रत्येक 24 घंटे में एक फीट नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। हालांकि पिछले 24 घंटे में नदी के जलस्तर में बढ़ोत्तरी की रफ्तार कम रही। गुरुवार की शाम पांच बजे से लेकर शुक्रवार की पांच बजे तक जहां नदी का जलस्तर करीब एक फीट बढ़ा था वहीं शुक्रवार की शाम पांच बजे से शनिवार की शाम पांच बजे तक इसमें चार से पांच इंच की बढ़ोत्तरी हुई है। नदी के बढ़ते जलस्तर की वजह से तटवर्ती इलाके के लोगों की नींद उड़ गई है और लोग ठौर की तलाश में जुट गए हैं।
नदी का जलस्तर भले ही प्रतिदिन बढ़ रहा है पर अभी प्रशासन की तैयारी सिर्फ कागजों तक ही सिमित है। जिला मुख्यालय पर शनिवार को कंट्रोल रूम तो खोल दिया गया है। लेेकिन अभी तक तहसील स्तर पर कंट्रोल रूम व बाढ़ चौकी की स्थापना और कर्मचारियों की तैनाती नहीं की जा सकी है। नाविकों, गोताखोरों और नावों को भी बाढ़ वाले क्षेत्रों में तैनात नहीं किया गया है। जिले से होकर गुजरने वाली नदियों में गोमती, सई, वरुणा, पीली व बसुई नदी शामिल हैं।
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इन नदियों में बाढ़ आने से जिले के 239 गांव प्रभावित होते हैं। लगभग 6326 से लेकर 940 हेक्टेयर भूमि जल प्लावित होती है। प्रशासन का दावा है कि बाढ़ की विभिषिका से बचाने के लिए जिला मुख्यालय सहित तहसील स्तर पर कंट्रोल रुम खोलने और 147 छोटी नाव, 48बड़ी नाव व 44 मझली नाव सहित दो बोट की व्यवस्था की गई है। वहीं 33 गोताखोरों और 44 बाढ़ चौकी भी बनाने की व्यवस्था की गई है। लेकिन प्रशासन की यह तैयारी अभी तक वास्तविकता से दूर है। लगातार बढ़ रहे पानी से और सरकारी सहायता का यह हाल ग्रामीणों को परेशान किए है।
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डोभी ब्लाक के बरमलपुर, बरौटी, बरईछ, रामगढ़, हरिहरपुर, चवरवर, बलुवां, पडरछा, व बाबाकाबन आदि गांवों में गोमती नदी का पानी घुस गया है। पशुओं को चारा भी नहीं मिल पा रहा है। बावजूद इसके वहां न तो बाढ़ चौकी स्थापित की गई और न ही नाविक, गोताखोर व कर्मचारी ही तैनात किए गए हैं। शनिवार की शाम तक इन गांवों में बाढ़ का जायजा लेने कोई अधिकारी भी नहीं पहुंचा। गोमती नदी के जल स्तर में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। 15 अगस्त से प्रत्येक 24 घंटे में एक फीट नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। हालांकि पिछले 24 घंटे में नदी के जलस्तर में बढ़ोत्तरी की रफ्तार कम रही। गुरुवार की शाम पांच बजे से लेकर शुक्रवार की पांच बजे तक जहां नदी का जलस्तर करीब एक फीट बढ़ा था वहीं शुक्रवार की शाम पांच बजे से शनिवार की शाम पांच बजे तक इसमें चार से पांच इंच की बढ़ोत्तरी हुई है। नदी के बढ़ते जलस्तर की वजह से तटवर्ती इलाके के लोगों की नींद उड़ गई है और लोग ठौर की तलाश में जुट गए हैं।
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नदी का जलस्तर भले ही प्रतिदिन बढ़ रहा है पर अभी प्रशासन की तैयारी सिर्फ कागजों तक ही सिमित है। जिला मुख्यालय पर शनिवार को कंट्रोल रूम तो खोल दिया गया है। लेेकिन अभी तक तहसील स्तर पर कंट्रोल रूम व बाढ़ चौकी की स्थापना और कर्मचारियों की तैनाती नहीं की जा सकी है। नाविकों, गोताखोरों और नावों को भी बाढ़ वाले क्षेत्रों में तैनात नहीं किया गया है। जिले से होकर गुजरने वाली नदियों में गोमती, सई, वरुणा, पीली व बसुई नदी शामिल हैं।
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इन नदियों में बाढ़ आने से जिले के 239 गांव प्रभावित होते हैं। लगभग 6326 से लेकर 940 हेक्टेयर भूमि जल प्लावित होती है। प्रशासन का दावा है कि बाढ़ की विभिषिका से बचाने के लिए जिला मुख्यालय सहित तहसील स्तर पर कंट्रोल रुम खोलने और 147 छोटी नाव, 48बड़ी नाव व 44 मझली नाव सहित दो बोट की व्यवस्था की गई है। वहीं 33 गोताखोरों और 44 बाढ़ चौकी भी बनाने की व्यवस्था की गई है। लेकिन प्रशासन की यह तैयारी अभी तक वास्तविकता से दूर है। लगातार बढ़ रहे पानी से और सरकारी सहायता का यह हाल ग्रामीणों को परेशान किए है।