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सामूहिक दुष्कर्म के आरोपियों को उम्र कैद

Thu, 21 Feb 2019 12:19 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 21 Feb 2019 12:19 AM IST
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सामूहिक दुष्कर्म के आरोपियों को उम्र कैद

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जौनपुर। जलालपुर थाना क्षेत्र निवासी छात्रा का स्कूल से अंकपत्र लेकर लौटते समय अपहरण कर जान से मारने की धमकी देते हुए सामूहिक दुष्कर्म करने के आरोपी सगे भाइयों समेत तीन को अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम अशोक कुमार सिंह ने आजीवन कारावास और सत्तर-सत्तर हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाया। आरोपी राजेश को कोर्ट ने धारा 328 आईपीसी में पांच वर्ष कारावास एवं दस हजार जुर्माने की सजा सुनाया। घटना जुलाई 2013 की है।
पीड़िता के पिता ने धारा 156 (3) के तहत प्रार्थना पत्र कोर्ट में दिया था। कोर्ट के आदेश पर थाना जलालपुर में मुकदमा पंजीकृत हुआ। अभियोजन के अनुसार 18 जुलाई 2013 को वादी की नाबालिग पुत्री विद्यालय से हाईस्कूल का अंक पत्र लेकर वापस घर आ रही थी। करीब डेढ़ बजे दिन में जब वह जरहिला गांव में मंदिर के पास पहुंची तभी पीछे से सगे भाई गुड्डू व बजरंगी निवासी मझगवां कला तथा वाराणसी निवासी राजेश जबरन वादी की लड़की को गाड़ी में बैठा लिए और अपहरण कर लेकर चले गए। संदेह पर आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराया। आरोपी के पिता से पूछताछ के बाद पता चला कि लड़की वाराणसी में है। 21 जुलाई 2013 को पुलिस के साथ वाराणसी पहुंचे। वहां एक मकान में लड़की मिली। आरोपी भाग गए थे। लड़की ने बताया कि आरोपी उसका अपहरण कर नशीला पदार्थ खिलाकर बेहोश कर दिए और यहां लाकर जान से मारने की धमकी देते हुए बारी-बारी से उसके साथ दुष्कर्म किया। पुलिस ने विवेचना कर तीनों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल किया। एडीजीसी रामप्रकाश सिंह व अवधेश सिंह ने गवाहों को परीक्षित कराया। कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद आरोपियों को दोषी पाते हुए सजा सुनाया।
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कोर्ट ने वाराणसी में तैनात सीओ को कस्टडी में लेने का दिया आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
जौनपुर। लाइन बाजार थाना क्षेत्र के पॉक्सो एक्ट के मुकदमें स्टेट बनाम सूरज में वारंट एवं एसएसपी को वेतन रोकने के आदेश पर गवाही देने आए वाराणसी में तैनात सीओ सत्येंद्र तिवारी को कोर्ट ने कस्टडी में लेने का आदेश दिया। सीओ के माफी मांगने एवं भविष्य में आदेश की अवहेलना न करने की बात कहने पर कोर्ट ने उन्हें छोड़ा तब उन्होंने अपना बयान दर्ज कराया। कोर्ट द्वारा कई बार सम्मन व वारंट भेजने के बावजूद वह गवाही देने नहीं आ रहे थे।
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