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Jaunpur News: बीमारियों से बचाव को 11 लाख पशुओं का होगा टीकाकरण
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जौनपुर। पशुओं की लाइलाज बीमारी खुरपका व मुंहपका पर नियंत्रण पाने व बीमारी का उन्मूलन करने के लिए जिले में 10 लाख टीका मिला है। बीते साल टीका कम मिलने से सभी पशुओं को नहीं लग पाया था। हालांकि इस साल 15 दिसंबर से अभियान चलाकर सभी पशुओं को टीका लगाया जाएगा। इसकी तैयारी पशुपालन विभाग की ओर शुरू कर दी गई है।
जिले में करीब 11 लाख 21 हजार 400 पशु हैं। इन पशुओं को खुरपका व मुंहपका जैसी बीमारी से बचाव का इंतजाम शासन की ओर से शुरू कर दिया गया है। खुरपका मुंहपका रोग से पशुओं बचाने के लिए उनका टीकाकरण किया जाएगा। इसके लिए ग्रामवार रोस्टर बनाया गया है। ठंड में पशुओं को रोग होने लगते है। जिससे उन्हें पीड़ा होती है। वह घास चारा आदि भी लेना बंद कर देता है। इससे दूध आदि पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। यह टीका चार माह से कम आयु वर्ग के पशु और आठ माह से ऊपर की गर्भित मादा पशुओं को नहीं लगेगा। पशुपालन विभाग निशुल्क टीकाकरण कर रहा है। टीकाकरण से पशुओं की उत्पादन क्षमता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता, जबकि पशुओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
बीमारी के लक्षण
बीमार पशु के मुंह, खुर व थनों में बड़े फफोलों में पाए जाते हैं। रोगग्रस्त पशु को 104 से 106 डिग्री तक बुखार हो जाता है। पशु खाना पीना बंद कर देता है। मुंह से लार बहने लगती है। पशु के मुंह के अंदर, खुरों के बीच और कभी-कभी थनों पर छाले पड़ जाते हैं, जो बाद में घाव का रूप ले लेते हैं। पशु कमजोर हो जाता है।
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उपचार
- इस रोग का कोई निश्चित उपचार नहीं है, लेकिन संक्रमण रोकने के लिए पशु चिकित्सक की सलाह पर एंटीबायोटिक टीके लगाए जाते हैं। मुंह व खुरों के घावों को फिटकरी या पोटाश के पानी से धोते हैं। मुंह में बोरो ग्लिसरीन और खुरों में किसी एंटीसेप्टिक लोशन या क्रीम का प्रयोग किया जा सकता है।
पशुओं में होने वाले खुरपका व मुंहपका बीमारी से बचाव के लिए शासन की ओर से 10 लाख टीका प्राप्त हो चुका है। इसके लिए टीम गठित कर 15 दिसंबर से अभियान चलाकर टीकाकरण किया जाएगा। जिसकी तैयारी की जा रही है।
- परमहंस राय, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी
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जिले में करीब 11 लाख 21 हजार 400 पशु हैं। इन पशुओं को खुरपका व मुंहपका जैसी बीमारी से बचाव का इंतजाम शासन की ओर से शुरू कर दिया गया है। खुरपका मुंहपका रोग से पशुओं बचाने के लिए उनका टीकाकरण किया जाएगा। इसके लिए ग्रामवार रोस्टर बनाया गया है। ठंड में पशुओं को रोग होने लगते है। जिससे उन्हें पीड़ा होती है। वह घास चारा आदि भी लेना बंद कर देता है। इससे दूध आदि पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। यह टीका चार माह से कम आयु वर्ग के पशु और आठ माह से ऊपर की गर्भित मादा पशुओं को नहीं लगेगा। पशुपालन विभाग निशुल्क टीकाकरण कर रहा है। टीकाकरण से पशुओं की उत्पादन क्षमता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता, जबकि पशुओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
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बीमारी के लक्षण
बीमार पशु के मुंह, खुर व थनों में बड़े फफोलों में पाए जाते हैं। रोगग्रस्त पशु को 104 से 106 डिग्री तक बुखार हो जाता है। पशु खाना पीना बंद कर देता है। मुंह से लार बहने लगती है। पशु के मुंह के अंदर, खुरों के बीच और कभी-कभी थनों पर छाले पड़ जाते हैं, जो बाद में घाव का रूप ले लेते हैं। पशु कमजोर हो जाता है।
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उपचार
- इस रोग का कोई निश्चित उपचार नहीं है, लेकिन संक्रमण रोकने के लिए पशु चिकित्सक की सलाह पर एंटीबायोटिक टीके लगाए जाते हैं। मुंह व खुरों के घावों को फिटकरी या पोटाश के पानी से धोते हैं। मुंह में बोरो ग्लिसरीन और खुरों में किसी एंटीसेप्टिक लोशन या क्रीम का प्रयोग किया जा सकता है।
पशुओं में होने वाले खुरपका व मुंहपका बीमारी से बचाव के लिए शासन की ओर से 10 लाख टीका प्राप्त हो चुका है। इसके लिए टीम गठित कर 15 दिसंबर से अभियान चलाकर टीकाकरण किया जाएगा। जिसकी तैयारी की जा रही है।
- परमहंस राय, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी