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Jalaun News: पक्की सड़क के आश्वासन में बीत रहे साल
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फोटो 2- कच्ची सड़क से निककतें कुइयाझोर के ग्रामीण। संवाद
- फोटो : samvad
आटा। परासन के मजरा कुइयाझोर गांव की 400 की आबादी बारिश के दिनों में हर साल दलदल और कीचड़ के बीच से निकलती है। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतों के बाद उन्हें सालों से बस आश्वासन ही दिया जा रहा है।
कदौरा ब्लॉक के परासन ग्राम पंचायत के मजरा कुइयाझोर गांव में दर्दनाक घटना 12 सितंबर 2024 को हुई, जब वृद्ध अच्छेलाल की इलाज के अभाव में मौत हो गई। रास्ता डूबा होने के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी। ग्रामीणों ने उन्हें चारपाई पर लादकर बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन रास्ते में ही उनकी जान चली गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इलाज मिल जाता तो अच्छेलाल की जान बचाई जा सकती थी।
इसके बाद प्रशासन हरकत में आया और कच्चे रास्तों से होते हुए अधिकारियों का अमला गांव तक पहुंचा और ग्रामीणों की समस्याओं को अपनी आंखों से देखा। इसके बाद पीडब्ल्यूडी ने शासन को रिपोर्ट बनाकर भेजी। इधर, प्रस्ताव तकनीकी खामियों के चलते निरस्त हो गया।
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ग्रामीणों की वर्षों पुरानी सड़क बनने की आस धरी रह गई। अभी बारिश का मौसम है। गांव को जोड़ने वाले दोनों कच्चे रास्ते कीचड़ और पानी में डूब चुके हैं। ग्रामीण चंद्रभान, ओमनारायण, हरिनारायण, माखन, हरिशंकर, राम निषाद, चंद्रपाल व त्रिवेंद्र ने बताया कि 50 वर्षों बाद उन्हें एक उम्मीद जगी थी, वह धरी रह गई। एक ओर परासन सोलर प्लांट की ओर जाने वाले रास्ते पर कमर तक पानी भरा है, वहीं दूसरी ओर राठ मार्ग की ओर जाने वाला रास्ता दलदल में तब्दील है।
गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और मरीजों को इलाज के लिए गांव से बाहर जाना मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि शीघ्र ही गांव का निरीक्षण कर स्थायी समाधान के तहत पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए।
पीडब्ल्यूडी खंड 3 के अधिशासी अभियंता महेंद्र कुमार ने बताया कि 150 से अधिक आबादी वाले इस गांव का सड़क निर्माण के लिए चयन हुआ है। प्रस्ताव भेजने की कार्रवाई की जा रही है।
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कदौरा ब्लॉक के परासन ग्राम पंचायत के मजरा कुइयाझोर गांव में दर्दनाक घटना 12 सितंबर 2024 को हुई, जब वृद्ध अच्छेलाल की इलाज के अभाव में मौत हो गई। रास्ता डूबा होने के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी। ग्रामीणों ने उन्हें चारपाई पर लादकर बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन रास्ते में ही उनकी जान चली गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इलाज मिल जाता तो अच्छेलाल की जान बचाई जा सकती थी।
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इसके बाद प्रशासन हरकत में आया और कच्चे रास्तों से होते हुए अधिकारियों का अमला गांव तक पहुंचा और ग्रामीणों की समस्याओं को अपनी आंखों से देखा। इसके बाद पीडब्ल्यूडी ने शासन को रिपोर्ट बनाकर भेजी। इधर, प्रस्ताव तकनीकी खामियों के चलते निरस्त हो गया।
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ग्रामीणों की वर्षों पुरानी सड़क बनने की आस धरी रह गई। अभी बारिश का मौसम है। गांव को जोड़ने वाले दोनों कच्चे रास्ते कीचड़ और पानी में डूब चुके हैं। ग्रामीण चंद्रभान, ओमनारायण, हरिनारायण, माखन, हरिशंकर, राम निषाद, चंद्रपाल व त्रिवेंद्र ने बताया कि 50 वर्षों बाद उन्हें एक उम्मीद जगी थी, वह धरी रह गई। एक ओर परासन सोलर प्लांट की ओर जाने वाले रास्ते पर कमर तक पानी भरा है, वहीं दूसरी ओर राठ मार्ग की ओर जाने वाला रास्ता दलदल में तब्दील है।
गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और मरीजों को इलाज के लिए गांव से बाहर जाना मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि शीघ्र ही गांव का निरीक्षण कर स्थायी समाधान के तहत पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए।
पीडब्ल्यूडी खंड 3 के अधिशासी अभियंता महेंद्र कुमार ने बताया कि 150 से अधिक आबादी वाले इस गांव का सड़क निर्माण के लिए चयन हुआ है। प्रस्ताव भेजने की कार्रवाई की जा रही है।