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बुजुर्ग की हत्या में दो भाइयों को उम्रकैद
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उरई (जालौन)। जमीन के विवाद में पारिवारिक रिश्ते में बाबा लगने वाले बुजुर्ग की हत्या करने के मामले में दो सगे भाइयों को दोष साबित होने पर अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम अमित पाल सिंह ने आजीवन कारावास और दस-दस हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई। मामला 12 साल पुराना है।
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता रामलखन सिंह ने बताया कि कुठौंद थाना क्षेत्र के जमलापुर निवासी अविवाहित जागेश्वर दयाल (70) उरई के मोहल्ला राजेंद्रनगर बंबी रोड पर रहते थे। जागेश्वर के भतीजे रामप्रकाश की बेटी सौम्या ने 25 सितंबर 2007 को उरई कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसके बाबा जागेश्वर उसके पिता के साथ ही रहते थे और अपने हिस्से की आठ बीघा जमीन भी उन्होंने पिता के नाम कर दी थी। इससे गांव में रहने वाले परिवार के ही महेश और मुन्नीलाल पुत्र कामता प्रसाद निवासी जमलापुर उनसे रंजिश मानने लगे।
24 सितंबर को दोनों भाई उरई आए और जागेश्वर पर जमीन अपने नाम करने का दबाव बनाने लगे। बाबा जागेश्वर ने जब इंकार किया तो महेश और मुन्नीलाल ने उनके साथ मारपीट कर उन्हें लहूलुहान कर दिया। घरवाले दौड़े तो दोनों भाई भाग निकले। मारपीट में जागेश्वर के सीने में गंभीर चोटें आईं। इस कारण अगले ही दिन यानी 25 सितंबर को इलाज के दौरान जागेश्वर की मौत हो गई थी।
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इसके बाद रिपोर्ट दर्ज कराई गई और फिर कुछ दिनों बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भी भेज दिया था। शुक्रवार को अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम अमित पाल सिंह ने दोष साबित होने पर महेश व मुन्नीलाल को आजीवन कारावास व दस-दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। दोनों भाई इस समय जमानत पर चल रहे थे। सजा होने के बाद दोनों को जेल भेज दिया गया।
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अपर जिला शासकीय अधिवक्ता रामलखन सिंह ने बताया कि कुठौंद थाना क्षेत्र के जमलापुर निवासी अविवाहित जागेश्वर दयाल (70) उरई के मोहल्ला राजेंद्रनगर बंबी रोड पर रहते थे। जागेश्वर के भतीजे रामप्रकाश की बेटी सौम्या ने 25 सितंबर 2007 को उरई कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसके बाबा जागेश्वर उसके पिता के साथ ही रहते थे और अपने हिस्से की आठ बीघा जमीन भी उन्होंने पिता के नाम कर दी थी। इससे गांव में रहने वाले परिवार के ही महेश और मुन्नीलाल पुत्र कामता प्रसाद निवासी जमलापुर उनसे रंजिश मानने लगे।
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24 सितंबर को दोनों भाई उरई आए और जागेश्वर पर जमीन अपने नाम करने का दबाव बनाने लगे। बाबा जागेश्वर ने जब इंकार किया तो महेश और मुन्नीलाल ने उनके साथ मारपीट कर उन्हें लहूलुहान कर दिया। घरवाले दौड़े तो दोनों भाई भाग निकले। मारपीट में जागेश्वर के सीने में गंभीर चोटें आईं। इस कारण अगले ही दिन यानी 25 सितंबर को इलाज के दौरान जागेश्वर की मौत हो गई थी।
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इसके बाद रिपोर्ट दर्ज कराई गई और फिर कुछ दिनों बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भी भेज दिया था। शुक्रवार को अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम अमित पाल सिंह ने दोष साबित होने पर महेश व मुन्नीलाल को आजीवन कारावास व दस-दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। दोनों भाई इस समय जमानत पर चल रहे थे। सजा होने के बाद दोनों को जेल भेज दिया गया।