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ढाई हजार आबादी पर पानी का संकट
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
Updated Fri, 20 May 2016 11:23 PM IST
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कुआ से साइकिल व हाथों में डिब्बे से पानी ले जाते प्रहलाद, भीम प्रताप व अन्य
- फोटो : अमर उजाला
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सूखे के दौर से गुजर रहे जनपद में इस समय चहुंओर बस पानी-पानी की पुकार मची है। पेयजल परियोजनाओं के संचालन में लापरवाही ने हालात बदतर कर दिए हैं। यही वजह है कि तपती दुपहरी में लोगों को पानी के लिए परेशान हो पड़ रहा है। बच्चे-बूढ़े और जवान पानी के इंतजाम में सुबह से ही जुट जाते हैं। कोई साइकिल से पानी ढो रहा है तो कोई हाथों में
बाल्टी-घड़े लिए कुएं पर अपनी बारी का इंतजार करता है। ये हालात डकोर ब्लाक क्षेत्र के गांव गिरथान के हैं। यहां पर बस एक कुआं है जो आधे गांव की प्यास बुझा रहा है। गांव की आधी करीब ढाई हजार की आबादी पानी के संकट से जूझ रही है। जिले में पानी का संकट तो कई इलाकों में गहराया हुआ है। शहर के ही नया पटेल नगर व बघौरा इलाके में प्रशासन को
टैंकर से पानी की आपूर्ति करानी पड़ रही है। इसके अलावा खुटमिली, नरछा, बंधौली, मड़ोरी गांवों में टैंकर से पानी के इंतजाम किए गए हैं। डकोर ब्लाक के गिरथान गांव में भी पेयजल संकट गहराया हुआ है। यूं तो भुआ में गिरथना गांव के नाम से पेयजल परियोजना संचालित हो रही है। बावजूद इसके गिरथान के लोगों की प्यास पूरी तरह नहीं बुझ पा रही
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है। इस परियोजना की टंकी से गिरथान के अलावा भुआ गांव को भी पानी की सप्लाई दी गई। अधिकारियों की लापरवाही रही कि उस समय पूरे गिरथान गांव में पाइप लाइन नहीं बिछाई गई जिससे आज लोगों को पानी के संकट का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा गांव में स्थापित अधिकांश हैंडपंप खारा पानी दे रहे हैं तो कुछ ने पानी देना ही छोड़
दिया है। गांव की आधी आबादी इस समय पेयजल संकट सो जूझ रही है। हालात यह हैं कि भोर होते ही लोगों को पानी के इंतजाम करने में जुटना पड़ता है। गांव के बाहर जो एक
कुआं है बस वही एक सहारा बना हुआ है। वहां से लोग बड़े जतन करके पानी घर तक ले जाते हैं। सुबह से ही कुएं पर भीड़ जमा हो जाती है। तपती दुपहरी में भी लोग हाथों में बाल्टी लिए कुएं पर खड़े नजर आते हैं।
नहीं सुन रहे अफसर
गिरथान गांव के प्रहलाद का कहना है कि पानी का संकट तो यहां रोज का है। सूखा पड़ने से स्थिति और खराब हुई है। गांव के बाहर जो कुआं है उसमें भी पानी कम हो रहा है। स्थिति यही रही तो अगले माह तक कुआं भी सूख जाएगा और फिर लोगों को एक बूंद पानी के लिए तड़पना पड़ेगा। इस बात को अफसर भी नहीं सुन रहे हैं।
पूरे दिन पानी की चिंता
गांव में कुएं से दो डिब्बो में पानी ले जा रहे भीम प्रताप ने कहा कि यह तो रोज का काम है और अब तो आदत पड़ गई है। यहां पर तो लंबे अर्से से कुएं से ही पानी लोगों के घरों तक पहुंचता है। कुआं पर पानी के लिए अक्सर लाइन लगानी पड़ती है। कुआ पर ही दो घाट रह गए है। इससे लोगों को एक बाल्टी पानी के लिए घंटो इंतजार करना पड़ता है।
बोले जिम्मेदार
गिरथान में पानी संकट का फिलहाल मेरे सामने कोई मामला नहीं आया है। अगर गांव के आधे हिस्से में पानी का संकट है तो इसे दूर कराने का प्रयास किया जाएगा। पाइप लाइन की क्या स्थिति है इसकी जांच कराएंगे। इसके आलावा जो कुआं है उसका जीणोद्धार कराकर उसको संरक्षित करने का काम किया जाएगा।
आरएस गौतम
जिला विकास अधिकारी जालौन
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बाल्टी-घड़े लिए कुएं पर अपनी बारी का इंतजार करता है। ये हालात डकोर ब्लाक क्षेत्र के गांव गिरथान के हैं। यहां पर बस एक कुआं है जो आधे गांव की प्यास बुझा रहा है। गांव की आधी करीब ढाई हजार की आबादी पानी के संकट से जूझ रही है। जिले में पानी का संकट तो कई इलाकों में गहराया हुआ है। शहर के ही नया पटेल नगर व बघौरा इलाके में प्रशासन को
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टैंकर से पानी की आपूर्ति करानी पड़ रही है। इसके अलावा खुटमिली, नरछा, बंधौली, मड़ोरी गांवों में टैंकर से पानी के इंतजाम किए गए हैं। डकोर ब्लाक के गिरथान गांव में भी पेयजल संकट गहराया हुआ है। यूं तो भुआ में गिरथना गांव के नाम से पेयजल परियोजना संचालित हो रही है। बावजूद इसके गिरथान के लोगों की प्यास पूरी तरह नहीं बुझ पा रही
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है। इस परियोजना की टंकी से गिरथान के अलावा भुआ गांव को भी पानी की सप्लाई दी गई। अधिकारियों की लापरवाही रही कि उस समय पूरे गिरथान गांव में पाइप लाइन नहीं बिछाई गई जिससे आज लोगों को पानी के संकट का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा गांव में स्थापित अधिकांश हैंडपंप खारा पानी दे रहे हैं तो कुछ ने पानी देना ही छोड़
दिया है। गांव की आधी आबादी इस समय पेयजल संकट सो जूझ रही है। हालात यह हैं कि भोर होते ही लोगों को पानी के इंतजाम करने में जुटना पड़ता है। गांव के बाहर जो एक
कुआं है बस वही एक सहारा बना हुआ है। वहां से लोग बड़े जतन करके पानी घर तक ले जाते हैं। सुबह से ही कुएं पर भीड़ जमा हो जाती है। तपती दुपहरी में भी लोग हाथों में बाल्टी लिए कुएं पर खड़े नजर आते हैं।
नहीं सुन रहे अफसर
गिरथान गांव के प्रहलाद का कहना है कि पानी का संकट तो यहां रोज का है। सूखा पड़ने से स्थिति और खराब हुई है। गांव के बाहर जो कुआं है उसमें भी पानी कम हो रहा है। स्थिति यही रही तो अगले माह तक कुआं भी सूख जाएगा और फिर लोगों को एक बूंद पानी के लिए तड़पना पड़ेगा। इस बात को अफसर भी नहीं सुन रहे हैं।
पूरे दिन पानी की चिंता
गांव में कुएं से दो डिब्बो में पानी ले जा रहे भीम प्रताप ने कहा कि यह तो रोज का काम है और अब तो आदत पड़ गई है। यहां पर तो लंबे अर्से से कुएं से ही पानी लोगों के घरों तक पहुंचता है। कुआं पर पानी के लिए अक्सर लाइन लगानी पड़ती है। कुआ पर ही दो घाट रह गए है। इससे लोगों को एक बाल्टी पानी के लिए घंटो इंतजार करना पड़ता है।
बोले जिम्मेदार
गिरथान में पानी संकट का फिलहाल मेरे सामने कोई मामला नहीं आया है। अगर गांव के आधे हिस्से में पानी का संकट है तो इसे दूर कराने का प्रयास किया जाएगा। पाइप लाइन की क्या स्थिति है इसकी जांच कराएंगे। इसके आलावा जो कुआं है उसका जीणोद्धार कराकर उसको संरक्षित करने का काम किया जाएगा।
आरएस गौतम
जिला विकास अधिकारी जालौन