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Jalaun News: एक साल से न्यायिक मजिस्ट्रेट का पद खाली, भटक रहे 250 गांवों के वादकारी

Sun, 08 Dec 2024 10:36 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 08 Dec 2024 10:36 PM IST
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The post of Judicial Magistrate is vacant since last one year, litigants from 250 villages are wandering
माधौगढ़। तहसील परिसर में बने ग्राम न्यायालय में एक साल से न्यायिक मजिस्ट्रेट का पद रिक्त होने से क्षेत्र के करीब 250 गांवों के वादकारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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बता दें कि व्यापारियों व जनता की मांग पर शासन ने सन 1995 में माधौगढ़ को तहसील का दर्जा दिया। इसमें लगभग 256 गांवों को संबंद्ध किया गया। अधिवक्ताओं की अनवरत मांग को लेकर जिला जज के प्रयास के चलते माधौगढ़ में ग्राम न्यायालय की स्थापना की गई। न्यायालय के शुरू होने से 256 गांव के वादकारियों को काफी सुविधा मिलने की उम्मीद थी।
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वादकारियों को लगा था कि वादों की पैरवी करने के लिए उरई, जालौन नहीं जाना पड़ेगा, जिससे समय व धन की भी बचत होगी। ग्राम न्यायालय में न्यायिक मजिस्ट्रेट श्वेता यादव की नियुक्ति की गई। इससे छोटे-छोटे मामले जुआ, शराब, घरेलू हिंसा, झगड़ा जैसे मामलों की सुनवाई के बाद त्वरित निराकरण किया गया। न्यायिक मजिस्ट्रेट के जाने के बाद न्यायालय में ताला लगा है। बाद में ग्राम न्यायालय में आईं फाइलें जालौन, उरई व कोंच तहसील भेज दी गईं। वादकारियों को मुकदमे की जानकारी के लिए परेशान होना पड़ रहा हैं।
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जज के न होने से बढ़ी समस्या
फोटो-4-धर्मेंद्र सिंह। संवाद
माधौगढ़। अधिवक्ता धर्मेंद्र सिंह का कहना है कि ग्राम न्यायालय की स्थापना होने से उरई, जालौन, कोंच में चल रही मुकदमों की फाइलें माधौगढ़ आ गई थीं। वादकारियों को त्वरित न्याय मिलने लगा था। न्यायिक मजिस्ट्रेट न होने से वादकारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा हैं।




फाइलों का पता लगाने में हो रही दिक्कत
फोटो-5-रवि सिंह। संवाद
माधौगढ़। अधिवक्ता रवि सिंह का कहना है कि एक साल से न्यायिक मजिस्ट्रेट न होने से वादकारियों को मुकदमे की फाइलों के लिए भटक रहे हैं। वादकारियों का कहना है कि तारीखों की जानकारी के लिए फाइलों का पता नहीं लग पा रहा है कि फाइल उरई, जालौन या कोंच में है। इससे क्षेत्र के वादकारियों के लिए समस्या खड़ी हो गई है।
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