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Jalaun News: पीएम के लगाए पौधे भी नहीं संरक्षित कर पाया वन विभाग
Thu, 24 Apr 2025 11:53 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
Updated Thu, 24 Apr 2025 11:53 PM IST
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उरई /एट। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रोपे गए पौधे अब गायब हो चुके हैं। वन विभाग की जिम्मेदारी होने के बावजूद इनकी सुरक्षा नहीं हो सकी। जो सोलर पंप पौधों की सिंचाई के लिए लगाया गया था, वह भी अब बंद है। विभाग की लापरवाही का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कुछ सौर प्लेटें तक चोरी हो गईं और उनका कोई सुराग नहीं लग पाया।
22 जुलाई 2022 को बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आए थे। पीएम मोदी ने कैथेरी के पास 75 हरिशंकरी के पौधे लगाए थे। यह विशेष संयोजन होता है, जिसमें पीपल, पाखर और बरगद एक साथ लगाए जाते हैं। लेकिन तीन साल के भीतर यह पौधे पूरी तरह गायब हो चुके हैं। जब पहली खेप के पौधे खराब हो गए तो वन विभाग ने डेढ़ साल पहले नई पौध लगाई और उन्हें संरक्षित करने के लिए करीब ढाई लाख रुपये की लागत से सोलर पंप भी लगाया गया। कुछ दिन यह पंप चला लेकिन बाद में उसे बंद कर दिया गया। देखते-देखते प्लेटें चोरी हो गईं और अब वहां न पौधे बचे हैं न पंप। रेंज अधिकारी ओमप्रकाश का कहना है कि बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर लगे पौधों के सूखने की जानकारी हुई है। मौके पर जाकर निरीक्षण करेंगे और पौधे फिर से लगाए जाएंगे।
ऐसी स्थिति की क्या है वजह
इस पूरे मामले की मुख्य वन दरोगा की लापरवाही मानी जा रही है। उनकी जिम्मेदारी थी कि पौधों की नियमित देखरेख हो। पानी दिया जाए और कोई खराब पौधा हो तो उसे बदला जाए। साथ ही एक कर्मचारी की नियुक्ति भी होनी थी। वन दरोगा ने सब कुछ स्वयं करने का दावा कर व्यवस्था ही ढीली कर दी। अफसरों के तबादलों और लापरवाही के चलते धीरे-धीरे मामला दबता चला गया। जब पौधे खराब हो गए, तब भी किसी को जानकारी नहीं दी गई और सोलर पंप भी धीरे-धीरे अनुपयोगी होता गया।
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लाखों रुपये खर्च, लेकिन नतीजा शून्य
इन पौधों की अनुमानित लागत एक लाख रुपये थी। पूरी योजना में लाखों रुपये खर्च हुए जो अब व्यर्थ हो गए हैं। जानकारों के मुताबिक, इतने खर्च में दस हजार पौधे लगाए और सुरक्षित किए जा सकते थे। बावजूद इसके जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं। पंप, जाली और अन्य सामान लगाने के बाद भी पौधों का संरक्षण नहीं हो सका।
उरई में भी पौधरोपण में गड़बड़ी
रामेश्वर चौराहा से जालौन बाईपास तक खजूर समेत अन्य पौधे लगाए गए थे। करीब 25-30 ट्री-गार्ड और 100 पौधे लगाए गए थे, लेकिन अब मौके पर न पौधे बचे हैं और न ही ट्री-गार्ड। बावजूद इसके वन दरोगा अधिकारियों से दावा करते रहे कि पौधे लगे हैं। जबकि मौके पर धूल उड़ती देखी जा सकती है। कहा जा रहा है कि पानी देने के नाम पर लाखों रुपये खर्च दिखाए गए, जो दरअसल हजम कर लिए गए।
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22 जुलाई 2022 को बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आए थे। पीएम मोदी ने कैथेरी के पास 75 हरिशंकरी के पौधे लगाए थे। यह विशेष संयोजन होता है, जिसमें पीपल, पाखर और बरगद एक साथ लगाए जाते हैं। लेकिन तीन साल के भीतर यह पौधे पूरी तरह गायब हो चुके हैं। जब पहली खेप के पौधे खराब हो गए तो वन विभाग ने डेढ़ साल पहले नई पौध लगाई और उन्हें संरक्षित करने के लिए करीब ढाई लाख रुपये की लागत से सोलर पंप भी लगाया गया। कुछ दिन यह पंप चला लेकिन बाद में उसे बंद कर दिया गया। देखते-देखते प्लेटें चोरी हो गईं और अब वहां न पौधे बचे हैं न पंप। रेंज अधिकारी ओमप्रकाश का कहना है कि बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर लगे पौधों के सूखने की जानकारी हुई है। मौके पर जाकर निरीक्षण करेंगे और पौधे फिर से लगाए जाएंगे।
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ऐसी स्थिति की क्या है वजह
इस पूरे मामले की मुख्य वन दरोगा की लापरवाही मानी जा रही है। उनकी जिम्मेदारी थी कि पौधों की नियमित देखरेख हो। पानी दिया जाए और कोई खराब पौधा हो तो उसे बदला जाए। साथ ही एक कर्मचारी की नियुक्ति भी होनी थी। वन दरोगा ने सब कुछ स्वयं करने का दावा कर व्यवस्था ही ढीली कर दी। अफसरों के तबादलों और लापरवाही के चलते धीरे-धीरे मामला दबता चला गया। जब पौधे खराब हो गए, तब भी किसी को जानकारी नहीं दी गई और सोलर पंप भी धीरे-धीरे अनुपयोगी होता गया।
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लाखों रुपये खर्च, लेकिन नतीजा शून्य
इन पौधों की अनुमानित लागत एक लाख रुपये थी। पूरी योजना में लाखों रुपये खर्च हुए जो अब व्यर्थ हो गए हैं। जानकारों के मुताबिक, इतने खर्च में दस हजार पौधे लगाए और सुरक्षित किए जा सकते थे। बावजूद इसके जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं। पंप, जाली और अन्य सामान लगाने के बाद भी पौधों का संरक्षण नहीं हो सका।
उरई में भी पौधरोपण में गड़बड़ी
रामेश्वर चौराहा से जालौन बाईपास तक खजूर समेत अन्य पौधे लगाए गए थे। करीब 25-30 ट्री-गार्ड और 100 पौधे लगाए गए थे, लेकिन अब मौके पर न पौधे बचे हैं और न ही ट्री-गार्ड। बावजूद इसके वन दरोगा अधिकारियों से दावा करते रहे कि पौधे लगे हैं। जबकि मौके पर धूल उड़ती देखी जा सकती है। कहा जा रहा है कि पानी देने के नाम पर लाखों रुपये खर्च दिखाए गए, जो दरअसल हजम कर लिए गए।