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घंटे भर तक हाईवे पर तड़पते रहे दंपति, नहीं मिली मदद
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पोस्टमार्टम हाउस में खड़े मृतक के परिजन
- फोटो : ORAI
उरई (जालौन)। बारिश और ठंड के चलते हादसे के बाद भी किसी राहगीर ने कार सवारों की कोई मदद नहीं की। पुलिस ने बताया कि उन्हें भी सूचना करीब हादसे के एक घंटे बाद मिल सकी। तब तक घायल प्रवीण और प्रीती दोनों ही हाईवे पर सड़क किनारे लहूलुहान हालत में तड़पते रहे।
सैकड़ों की संख्या में वाहन नजदीक से गुजरते रहे पर एक भी गाड़ी नहीं रुकी। अनुमान है कि कार खंदक में होने के कारण भी हाईवे से निकलने वाले लोग हादसे का अंदाजा नहीं लगा सके होंगे। जिसके चलते सभी घायल वहीं पड़े रहे। जब एक घंटे के बाद किसी तरह पुलिस को सूचना मिली, तब एंबुलेंस मौके पर पहुंची और सभी को लेकर मेडिकल कालेज उरई पहुंचाया। माना जा रहा है कि यदि सही समय पर घायलों को मदद मिल जाती तो कम से कम प्रीती की जान बचाई जा सकती थी।
घायल हालत में चिल्लाता रहा सलीम
साथी सिपाही सलीम ने बताया कि कार में जितने भी लोग सवार थे, सभी के मोबाइल फोन हादसे में चकनाचूर हो चुके थे। इस कारण वह किसी को फोन भी नहीं कर पा रहा था। घायल हालत में वह आते जाते वाहनों को रोकने के लिए शोर मचाता रहा लेकिन किसी ने एक नहीं सुनी। वर्ना भाभी की जान तो बच ही सकती थी।
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किसी को बुलाओ अंकल, अस्पताल ले चलो
हादसे के बाद प्रवीण के दोनों बच्चे अपने पापा मम्मी की हालत देखकर बदहवास से हो गए थे। कभी दोनों बच्चे पापा को जगाते तो कभी मम्मी को उठाने का प्रयास करते और जब रोते बिलखते थक जाते तो सलीम अंकल से लिपट कर रोने लगते और कहते जा रहे थे किसी को बुलाओ अंकल, पापा मम्मी को अस्पताल ले चलो।
एक साथ हुए भर्ती, बंधन में बंधे और साथ ही चले गए
सिपाही दंपति के परिजनों ने बताया कि प्रवीण और प्रीती दोनों की ही भर्ती 2004 की है और उसी साल उनकी शादी भी हुई और दोनों ने सात जन्मों तक साथ निभाने की कसम भी खाई थी। किसी को क्या पता था कि उनके सात जन्मों की कसम उन्हें एक साथ मौत की आगोश में भी ले जाएगी।
शादी समारोह में होता रहा इंतजार
कानपुर जेल में तैनात कोंच निवासी सिपाही शमशाद की बेटी की शादी में शामिल होने के लिए प्रवीण व उनका परिवार कोंच जा रहा था। शमशाद का कहना है कि शाम को समारोह में ही किसी से प्रवीण के आने की बात हुई थी। देर रात तक उनका इंतजार भी होता रहा। आखिर में वे तो नहीं आए लेकिन काफी देर बाद हादसे की मनहूस खबर जरूर आई।
एसपी और जेलर मिले परिजनों से
शनिवार की सुबह जैसे ही जनपद के अधिकारियों को मामले की जानकारी हुई तो मामला महकमे से जु़ड़ा होने पर हड़कंप मच गया। एसपी डॉ सतीश कुमार भी स्थानीय जेल अधिकारियों के साथ पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और सिपाही दंपति के परिजनों से मिलकर ढांढस बंधाया, साथ ही बाकी की कार्रवाई जल्द से जल्द निपटाने के निर्देश भी दिए।
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सैकड़ों की संख्या में वाहन नजदीक से गुजरते रहे पर एक भी गाड़ी नहीं रुकी। अनुमान है कि कार खंदक में होने के कारण भी हाईवे से निकलने वाले लोग हादसे का अंदाजा नहीं लगा सके होंगे। जिसके चलते सभी घायल वहीं पड़े रहे। जब एक घंटे के बाद किसी तरह पुलिस को सूचना मिली, तब एंबुलेंस मौके पर पहुंची और सभी को लेकर मेडिकल कालेज उरई पहुंचाया। माना जा रहा है कि यदि सही समय पर घायलों को मदद मिल जाती तो कम से कम प्रीती की जान बचाई जा सकती थी।
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घायल हालत में चिल्लाता रहा सलीम
साथी सिपाही सलीम ने बताया कि कार में जितने भी लोग सवार थे, सभी के मोबाइल फोन हादसे में चकनाचूर हो चुके थे। इस कारण वह किसी को फोन भी नहीं कर पा रहा था। घायल हालत में वह आते जाते वाहनों को रोकने के लिए शोर मचाता रहा लेकिन किसी ने एक नहीं सुनी। वर्ना भाभी की जान तो बच ही सकती थी।
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किसी को बुलाओ अंकल, अस्पताल ले चलो
हादसे के बाद प्रवीण के दोनों बच्चे अपने पापा मम्मी की हालत देखकर बदहवास से हो गए थे। कभी दोनों बच्चे पापा को जगाते तो कभी मम्मी को उठाने का प्रयास करते और जब रोते बिलखते थक जाते तो सलीम अंकल से लिपट कर रोने लगते और कहते जा रहे थे किसी को बुलाओ अंकल, पापा मम्मी को अस्पताल ले चलो।
एक साथ हुए भर्ती, बंधन में बंधे और साथ ही चले गए
सिपाही दंपति के परिजनों ने बताया कि प्रवीण और प्रीती दोनों की ही भर्ती 2004 की है और उसी साल उनकी शादी भी हुई और दोनों ने सात जन्मों तक साथ निभाने की कसम भी खाई थी। किसी को क्या पता था कि उनके सात जन्मों की कसम उन्हें एक साथ मौत की आगोश में भी ले जाएगी।
शादी समारोह में होता रहा इंतजार
कानपुर जेल में तैनात कोंच निवासी सिपाही शमशाद की बेटी की शादी में शामिल होने के लिए प्रवीण व उनका परिवार कोंच जा रहा था। शमशाद का कहना है कि शाम को समारोह में ही किसी से प्रवीण के आने की बात हुई थी। देर रात तक उनका इंतजार भी होता रहा। आखिर में वे तो नहीं आए लेकिन काफी देर बाद हादसे की मनहूस खबर जरूर आई।
एसपी और जेलर मिले परिजनों से
शनिवार की सुबह जैसे ही जनपद के अधिकारियों को मामले की जानकारी हुई तो मामला महकमे से जु़ड़ा होने पर हड़कंप मच गया। एसपी डॉ सतीश कुमार भी स्थानीय जेल अधिकारियों के साथ पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और सिपाही दंपति के परिजनों से मिलकर ढांढस बंधाया, साथ ही बाकी की कार्रवाई जल्द से जल्द निपटाने के निर्देश भी दिए।

पोस्टमार्टम हाउस में मृतक दंपति के परिजनों से बात करते एसपी सतीश कुमार- फोटो : ORAI