{"_id":"65f5e0651a4554b3110ef08a","slug":"take-special-care-of-fasting-during-pregnancy-orai-news-c-224-1-ori1004-112269-2024-03-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jalaun News: गर्भावस्था में रोजेदार का रखें विशेष ध्यान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jalaun News: गर्भावस्था में रोजेदार का रखें विशेष ध्यान
विज्ञापन
उरई। रमजान का पाक माह शुरू हो गया है। रोजे को लेकर नन्हें बच्चों से लेकर बुजुर्ग भी काफी उत्साहित दिख रहे हैं। रोजा के साथ खूब इबादत कर रहे हैं। मस्जिदों में रौनक दिख रही है। ऐसे में गर्भवती महिलाएं अगर रोजा रखती हैं तो उसकी सेहत का विशेष ध्यान रखें।
डॉक्टर फातिहा अंसारी ने बताया कि गर्भवती को वैसे तो रोजा से बचना चाहिए। अगर रखना चाहतीं हैं तो उन्हें अपने खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। डॉक्टर की सलाह जरूर लें। सेहत के लक्षणों पर ध्यान देकर और भोजन में थोड़ी सी सावधानी बरतते हुए ये महिलाएं रोजा रख सकती हैं। इससे आपके गर्भ में पल रहे शिशु का स्वास्थ्य भी बेहतर रहेगा। सात माह से अधिक गर्भ होने पर महिलाओं को रोजा से बचना चाहिए। उस समय बच्चे को पोष्टिक भोजन की अधिक जरूरत होती है।
इस्लाम जानकार हाफिज मोहम्मद आमिर ने कहा कि अल्लाह का यह हुक्म है कि रोजा और नमाज हर किसी पर वाजिब है। अगर किसी स्थिति और गंभीर बीमारी में कोई रोजा नहीं रखना चाहता है तो नहीं भी रख सकता है। इसी के साथ मरीज और गर्भवती महिलाओं को रोजा रखने में परेशानी आ रही है तो वह रोजा नहीं रखें। लेकिन बाद में उसकी कजा (बाद में रख सकते हैं) जरूरी है। अगर किसी महिला के गोद में बच्चा है। उसको लेकर कोई डर है। डॉक्टर अगर रोजा छोड़ने की सलाह दें, तो वह मानी जा सकती है। वैसे हर किसी को रोजा रखना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
डॉक्टर फातिहा अंसारी ने बताया कि गर्भवती को वैसे तो रोजा से बचना चाहिए। अगर रखना चाहतीं हैं तो उन्हें अपने खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। डॉक्टर की सलाह जरूर लें। सेहत के लक्षणों पर ध्यान देकर और भोजन में थोड़ी सी सावधानी बरतते हुए ये महिलाएं रोजा रख सकती हैं। इससे आपके गर्भ में पल रहे शिशु का स्वास्थ्य भी बेहतर रहेगा। सात माह से अधिक गर्भ होने पर महिलाओं को रोजा से बचना चाहिए। उस समय बच्चे को पोष्टिक भोजन की अधिक जरूरत होती है।
विज्ञापन
इस्लाम जानकार हाफिज मोहम्मद आमिर ने कहा कि अल्लाह का यह हुक्म है कि रोजा और नमाज हर किसी पर वाजिब है। अगर किसी स्थिति और गंभीर बीमारी में कोई रोजा नहीं रखना चाहता है तो नहीं भी रख सकता है। इसी के साथ मरीज और गर्भवती महिलाओं को रोजा रखने में परेशानी आ रही है तो वह रोजा नहीं रखें। लेकिन बाद में उसकी कजा (बाद में रख सकते हैं) जरूरी है। अगर किसी महिला के गोद में बच्चा है। उसको लेकर कोई डर है। डॉक्टर अगर रोजा छोड़ने की सलाह दें, तो वह मानी जा सकती है। वैसे हर किसी को रोजा रखना चाहिए।
विज्ञापन