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अध्यक्ष की कुर्सी पाने को भाजपा, बसपा में लग रहा गुणा भाग
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उरई/ कालपी। जिला पंचायत सदस्यों के नतीजे आने के बाद अब जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए रस्साकशी शुरू हो गई है। जिसमें सात सीटें जीतने वाली बसपा व छह सीटों वाली भाजपा में सीधा मुकाबला माना जा रहा है। दोनों ही दलों के बड़े नेताओं ने रणनीति भी बनानी शुरू कर दी है। इस रस्साकसी में निर्दलीय निर्णायक माने जा रहे हैं क्योंकि उनके पास भी छह सीटें हैं। ऐसे में मुकाबला रोचक होने की संभावना है।
बता दें कि जिला पंचायत अध्यक्ष के पद को पाना बसपा के लिए अभी तक सपना ही रहा है। इस पद पर भाजपा व सपा का ही कब्जा रहा है। इस बार जरूर 25 में से सर्वाधिक सात सदस्य चुने जाने से बसपा नेतृत्व उत्साहित है। बसपा नेताओं ने दावा भी किया है कि इस बार उनके ही दल का जिला पंचायत अध्यक्ष कुर्सी पर बैठेगा, पर मुकाबला सत्ताधारी दल से होने के कारण इतना आसान भी नहीं माना जा रहा है।
भाजपा के छह सदस्य चुनकर आए हैं और पिछले 15 साल से भाजपा का भी जिला पंचायत अध्यक्ष नही बना है। निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष सुमन निरंजन ने भी निर्दलीय चुनाव जीता था। इस बार सूबे में सरकार होने के चलते भाजपा का पूरा प्रयास है कि अध्यक्ष भी पार्टी का ही रहे।
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इस बार यह सीट भी अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित है। लिहाजा जिताऊ नेता की तलाश शुरू हो गई है। इसके अलावा भाजपा और बसपा दोनों ही दलों के नेता अब अपने-अपने सपने पूरे करने के लिए निर्दलीयों को अपना बनाने की कवायद में जुटे हैं। इसके साथ ही 4 सीटों वाले दल सपा को भी हल्के में नही लिया जा सकता क्योंकि सपा का वर्ष 2005 से लगातार तीन बार जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर कब्जा भी रहा है। ऐसे में राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सपा भी इस चुनाव में कोई बड़ा खेल कर सकती है।
दमखम से चुनाव लड़ने का दावा
उरई। बसपा की बैठक जिलाध्यक्ष संजय गौतम की अध्यक्षता में हुई। इसमें मुख्य अतिथि बुंदेलखंड के मुख्य सेक्टर प्रभारी लालाराम अहिरवार ने बसपा के निर्वाचित जिला पंचायत सदस्यों को बधाई दी और कहा कि बसपा पूरे दमखम से जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव लड़ेगी। इस दौरान नवनिर्वाचित सदस्य प्रियंका गौतम, अतर सिंह पाल, मनोज याज्ञिक, कैलाश राजपूत, ज्योति पांडेय, मातावती चौहान, मीनाक्षी पटेल को सम्मानित किया गया। संजय भदौरिया, महेंद्र सोमई, संजय राय, विवेक चौधरी, मानवेंद्र भी आदि मौजूद रहे। (संवाद)
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बता दें कि जिला पंचायत अध्यक्ष के पद को पाना बसपा के लिए अभी तक सपना ही रहा है। इस पद पर भाजपा व सपा का ही कब्जा रहा है। इस बार जरूर 25 में से सर्वाधिक सात सदस्य चुने जाने से बसपा नेतृत्व उत्साहित है। बसपा नेताओं ने दावा भी किया है कि इस बार उनके ही दल का जिला पंचायत अध्यक्ष कुर्सी पर बैठेगा, पर मुकाबला सत्ताधारी दल से होने के कारण इतना आसान भी नहीं माना जा रहा है।
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भाजपा के छह सदस्य चुनकर आए हैं और पिछले 15 साल से भाजपा का भी जिला पंचायत अध्यक्ष नही बना है। निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष सुमन निरंजन ने भी निर्दलीय चुनाव जीता था। इस बार सूबे में सरकार होने के चलते भाजपा का पूरा प्रयास है कि अध्यक्ष भी पार्टी का ही रहे।
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इस बार यह सीट भी अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित है। लिहाजा जिताऊ नेता की तलाश शुरू हो गई है। इसके अलावा भाजपा और बसपा दोनों ही दलों के नेता अब अपने-अपने सपने पूरे करने के लिए निर्दलीयों को अपना बनाने की कवायद में जुटे हैं। इसके साथ ही 4 सीटों वाले दल सपा को भी हल्के में नही लिया जा सकता क्योंकि सपा का वर्ष 2005 से लगातार तीन बार जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर कब्जा भी रहा है। ऐसे में राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सपा भी इस चुनाव में कोई बड़ा खेल कर सकती है।
दमखम से चुनाव लड़ने का दावा
उरई। बसपा की बैठक जिलाध्यक्ष संजय गौतम की अध्यक्षता में हुई। इसमें मुख्य अतिथि बुंदेलखंड के मुख्य सेक्टर प्रभारी लालाराम अहिरवार ने बसपा के निर्वाचित जिला पंचायत सदस्यों को बधाई दी और कहा कि बसपा पूरे दमखम से जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव लड़ेगी। इस दौरान नवनिर्वाचित सदस्य प्रियंका गौतम, अतर सिंह पाल, मनोज याज्ञिक, कैलाश राजपूत, ज्योति पांडेय, मातावती चौहान, मीनाक्षी पटेल को सम्मानित किया गया। संजय भदौरिया, महेंद्र सोमई, संजय राय, विवेक चौधरी, मानवेंद्र भी आदि मौजूद रहे। (संवाद)