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बीमारियों से जूझ रहे लोग, अस्पताल में भीड़
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
Updated Mon, 03 Oct 2016 11:15 PM IST
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जिला अस्पताल में इमरजेंसी से वार्ड में भर्ती हेतु बोतल लगाए जाता मरीज।
- फोटो : अमर उजाला
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अजब गजब मौसम के कारण पूरा जिला इन दिनों संक्रामक बीमारियों की चपेट में है। इसके चलते जिला अस्पताल में मरीजों की भारी भीड़ उमड़ रही है। हालत ये है कि हर मरीज को एक से दो घंटे तक अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। और तो और डाक्टर ब्लड जांच लिखते हैं तो मरीज को लैब से दूसरे दिन सुबह आने को कहा जाता है। मरीजों ने लैब
में चौबीस घंटे रक्त जांच सुविधा करने की मांग की है। जिले में संक्रामक बीमारियां फैलने जिला अस्पताल में मरीजों की भारी भीड़ उमड़ रही है। पर्चा काउंटर हो या दवा वितरण खिड़की, हर जगह भीड़ है। डाक्टर कई-कई घंटे मरीजों से घिरे रहते हैं। एक-दो घंटे में डाक्टर देखते हैं और फिर दवा लेने के लिए आधा घंटे तक लाइन में लगना पड़ता है।
अब तक 210 मरीजों की जांच
जिला अस्पताल में मलेरिया विभाग के कर्मचारी आर.पी वर्मा ने बताया कि अब तक 210 लोगों की जांच की गई। इसमें से चार पाजीटिव व 4 पीवी के मरीज निकले। पीवी मलेरिया की तरह की ही एक अन्य बीमारी है जो अब भारत में फैल रही है। बताया कि डाक्टर के लिखने पर मरीज की जांच की जाती है।
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इमरजेंसी का हाल भी खराब
गंभीर मरीज जब इमरजेंसी पहुंचता है तो वहां पर न तो डाक्टर मिलते हैं और न ही अन्य। फार्मासिस्ट मरीज का फौरी उपचार कर बोतल लगाकर वार्ड में भर्ती करने को कहते हैं। स्ट्रेचर भी उपलब्ध नहीं कराया जाता जिससे परिजनों को बोतल हाथ में लेकर 500 मीटर दूर वार्ड तक मरीज को पैदल ले जाना पड़ता है। सोमवार को डायरिया पीड़ित गुड्डी
इमरजेंसी में हाथ में बोतल लिए वार्ड में जा रही थी जो ठीक से चल भी नहीं पा रही थी। जांच के लिए लिखे जाने पर मरीज लैब में पहुंचते हैं तो उन्हें टरका दिया जाता है। इससे मरीज बिना दवा के दूसरे दिन तक जांच के लिए परेशान होते रहते हैं और उनका मर्ज बढ़ता जाता है। वहीं, लैब टैक्नीशियनों का कहना है कि खून जांच सिर्फ 8 बजे सुबह से 11 बजे तक
होती है। गौरतलब है कि संक्रामक बीमारियों बुखार, मलेरिया आदि के जिले में प्रकोप के चलते इस समय बड़ी संख्या में जिला अस्पताल में मरीज आ रहे हैं। इस दौरान डाक्टर रक्त जांच कराने के लिए लिख देते हैं। मरीज जब जिला अस्पताल के लैब में रक्त जांच कराने पहुंचते हैं तो उन्हें समय खत्म होने का बहाना कर वापस भेज दिया जाता है। इससे दूर दराज
के गांवों से आने वाले मरीजों की परेशानी बढ़ जाती है। संक्रमण के इस दौर में जिला अस्पताल का सहयोग न मिलने से उन्हें दूसरे दिन तक रक्त की जांच के लिए इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में उनका मर्ज बढ़ता चला जाता है। ज्ञान सिंह, राजाराम, गुड्डी, प्रमोद आदि कहा कि बिना जांच के दवाएं नहीं मिलती हैं।
जांच का समय बढ़ाने की मांग
सोमवार को अस्पताल पहुंचे संवाददाता को उमरारखेरा निवासी अन्नू शाह ने बताया कि उसके दो बच्चों की जांच नहीं हो पाई है। रामकुमार ने कहा कि उसका बच्चा आर्यन संक्रमण का शिकार है। चिकित्सकों ने उसे ब्लड की जांच को लिख दिया है। अब लैब वाले समय निकलने की बात कह रहे हैं। जरीना व दीक्षा गंभीर रूप से संक्रामक बीमारियों की चपेट में हैं।
इन्हें परिजन गोद लिए ब्लड जांच कराने को जिला अस्पताल के लैब पहुंचे मगर जांच नहीं हो पाई। लैब में मौजूद ब्रजेश द्विवेदी ने कहा कि सुबह 8 से 11 बजे तक ही जांच होती है। वहीं मरीजों ने जांच का समय चौबीस घंटे करने की मांग की।
क्या कहते है अधिकारी-
जिला अस्पताल में यदि कोई समस्या है तो उसे दिखवाया जाएगा। जांच के लिए लैब का समय बढ़ाने पर भी विचार किया जाएगा। मरीजों को स्ट्रेचर देने के स्पष्ट निर्देश हैं। पर मरीजों को इसे मांगना पड़ता है। अक्सर मरीज डाक्टरों को बताए बगैर खुद ही वार्ड तक चले जाते हैं। फिर भी चिकित्सकोें को इसके लिए आगाह कर दिया जाएगा। -जीके निगम, सीएमएस
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में चौबीस घंटे रक्त जांच सुविधा करने की मांग की है। जिले में संक्रामक बीमारियां फैलने जिला अस्पताल में मरीजों की भारी भीड़ उमड़ रही है। पर्चा काउंटर हो या दवा वितरण खिड़की, हर जगह भीड़ है। डाक्टर कई-कई घंटे मरीजों से घिरे रहते हैं। एक-दो घंटे में डाक्टर देखते हैं और फिर दवा लेने के लिए आधा घंटे तक लाइन में लगना पड़ता है।
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अब तक 210 मरीजों की जांच
जिला अस्पताल में मलेरिया विभाग के कर्मचारी आर.पी वर्मा ने बताया कि अब तक 210 लोगों की जांच की गई। इसमें से चार पाजीटिव व 4 पीवी के मरीज निकले। पीवी मलेरिया की तरह की ही एक अन्य बीमारी है जो अब भारत में फैल रही है। बताया कि डाक्टर के लिखने पर मरीज की जांच की जाती है।
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इमरजेंसी का हाल भी खराब
गंभीर मरीज जब इमरजेंसी पहुंचता है तो वहां पर न तो डाक्टर मिलते हैं और न ही अन्य। फार्मासिस्ट मरीज का फौरी उपचार कर बोतल लगाकर वार्ड में भर्ती करने को कहते हैं। स्ट्रेचर भी उपलब्ध नहीं कराया जाता जिससे परिजनों को बोतल हाथ में लेकर 500 मीटर दूर वार्ड तक मरीज को पैदल ले जाना पड़ता है। सोमवार को डायरिया पीड़ित गुड्डी
इमरजेंसी में हाथ में बोतल लिए वार्ड में जा रही थी जो ठीक से चल भी नहीं पा रही थी। जांच के लिए लिखे जाने पर मरीज लैब में पहुंचते हैं तो उन्हें टरका दिया जाता है। इससे मरीज बिना दवा के दूसरे दिन तक जांच के लिए परेशान होते रहते हैं और उनका मर्ज बढ़ता जाता है। वहीं, लैब टैक्नीशियनों का कहना है कि खून जांच सिर्फ 8 बजे सुबह से 11 बजे तक
होती है। गौरतलब है कि संक्रामक बीमारियों बुखार, मलेरिया आदि के जिले में प्रकोप के चलते इस समय बड़ी संख्या में जिला अस्पताल में मरीज आ रहे हैं। इस दौरान डाक्टर रक्त जांच कराने के लिए लिख देते हैं। मरीज जब जिला अस्पताल के लैब में रक्त जांच कराने पहुंचते हैं तो उन्हें समय खत्म होने का बहाना कर वापस भेज दिया जाता है। इससे दूर दराज
के गांवों से आने वाले मरीजों की परेशानी बढ़ जाती है। संक्रमण के इस दौर में जिला अस्पताल का सहयोग न मिलने से उन्हें दूसरे दिन तक रक्त की जांच के लिए इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में उनका मर्ज बढ़ता चला जाता है। ज्ञान सिंह, राजाराम, गुड्डी, प्रमोद आदि कहा कि बिना जांच के दवाएं नहीं मिलती हैं।
जांच का समय बढ़ाने की मांग
सोमवार को अस्पताल पहुंचे संवाददाता को उमरारखेरा निवासी अन्नू शाह ने बताया कि उसके दो बच्चों की जांच नहीं हो पाई है। रामकुमार ने कहा कि उसका बच्चा आर्यन संक्रमण का शिकार है। चिकित्सकों ने उसे ब्लड की जांच को लिख दिया है। अब लैब वाले समय निकलने की बात कह रहे हैं। जरीना व दीक्षा गंभीर रूप से संक्रामक बीमारियों की चपेट में हैं।
इन्हें परिजन गोद लिए ब्लड जांच कराने को जिला अस्पताल के लैब पहुंचे मगर जांच नहीं हो पाई। लैब में मौजूद ब्रजेश द्विवेदी ने कहा कि सुबह 8 से 11 बजे तक ही जांच होती है। वहीं मरीजों ने जांच का समय चौबीस घंटे करने की मांग की।
क्या कहते है अधिकारी-
जिला अस्पताल में यदि कोई समस्या है तो उसे दिखवाया जाएगा। जांच के लिए लैब का समय बढ़ाने पर भी विचार किया जाएगा। मरीजों को स्ट्रेचर देने के स्पष्ट निर्देश हैं। पर मरीजों को इसे मांगना पड़ता है। अक्सर मरीज डाक्टरों को बताए बगैर खुद ही वार्ड तक चले जाते हैं। फिर भी चिकित्सकोें को इसके लिए आगाह कर दिया जाएगा। -जीके निगम, सीएमएस