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जैविक खेती से होती है फसलों की अच्छी पैदावार
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जालौन। वर्तमान में रासायनिक खादों का अधिकाधिक उपयोग किया जा रहा है। जो पहले लाभदायक रहती है और फिर मिट्टी की उर्वरा शक्ति धीरे-धीरे कम करती है। इसलिए हमें चाहिए कि जैविक खेती कर फसल की अच्छी पैदावार पाएं। यह बात जिला आजीविका प्रशिक्षक राजेंद्र सिंह भदौरिया ने महिला ग्राम समूह के लोगों से कही।
प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत आरसेटी परिसर में फार्म आजीविका सखी के पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण में महिला ग्राम समूह की 40 कार्यकर्ताओं को कृषि एवं पशुपालन के संबंध में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिला आजीविका प्रशिक्षक भदौरिया ने वर्तमान में रासायनिक खादों का अधिकाधिक उपयोग किया जा रहा है। रासायनिक खादों के इस्तेमाल से पहले कुछ साल तो अच्छी पैदावार हो सकती है।
लेकिन इसके उपरांत भूमि की उर्वरा शक्ति धीरे-धीरे कम होने लगती है। रासायनिक खादों के स्थान पर गोबर व कंपोस्ट से बनी जैविक खाद का प्रयोग कर भूमि की उर्वरा शक्ति को तो बढ़ाया ही जा सकता है। अतुल ने महिलाओं को कंपोस्ट खाद बनाने की विधि के साथ ही घर पर कम लागत में तैयार होने वाले कीटनाशकों को तैयार करने का प्रशिक्षण दिया। इस दौरान आरसेटी निदेशक विभाष कुमार साहा, स्वयं प्रकाश शुक्ला आदि मौजूद रहे।
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प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत आरसेटी परिसर में फार्म आजीविका सखी के पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण में महिला ग्राम समूह की 40 कार्यकर्ताओं को कृषि एवं पशुपालन के संबंध में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिला आजीविका प्रशिक्षक भदौरिया ने वर्तमान में रासायनिक खादों का अधिकाधिक उपयोग किया जा रहा है। रासायनिक खादों के इस्तेमाल से पहले कुछ साल तो अच्छी पैदावार हो सकती है।
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लेकिन इसके उपरांत भूमि की उर्वरा शक्ति धीरे-धीरे कम होने लगती है। रासायनिक खादों के स्थान पर गोबर व कंपोस्ट से बनी जैविक खाद का प्रयोग कर भूमि की उर्वरा शक्ति को तो बढ़ाया ही जा सकता है। अतुल ने महिलाओं को कंपोस्ट खाद बनाने की विधि के साथ ही घर पर कम लागत में तैयार होने वाले कीटनाशकों को तैयार करने का प्रशिक्षण दिया। इस दौरान आरसेटी निदेशक विभाष कुमार साहा, स्वयं प्रकाश शुक्ला आदि मौजूद रहे।
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