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बच्चों के भोजन पर भी सूखे की मार
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
Updated Tue, 26 Apr 2016 10:56 PM IST
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घर से बोतल ला कर स्कूल में पानी पीते छात्र-छात्राएं।
- फोटो : अमर उजाला
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बुंदेलखंड में सूखे का दंश न केवल किसानों के लिए बल्कि उनके बच्चों के लिए भी मुसीबत बना है। सूखा पीड़ित किसान अपने बच्चों को स्कूल भेजकर निश्चिंत हो जाते थे कि एक वक्त का भोजन तो उनके बच्चों को मिल पाएगा। सूखे काली छाया इस सरकारी योजना पर भी पड़ गई है। हैंडपंपों के सूखने और पानी न मिलने से जिले के कई स्कूलों में मिड-डे मील बनना ही बंद
हो गया। कुछ परिषदीय विद्यालयों में विद्यालय का स्टाफ बच्चों से ही दूर दराज के इलाकों से पानी मंगाकर किसी तरह खाना बनवा पा रहा है। इस बार सूखे ने जिला ही नहीं समूचे बुंदेलखंड को झुलसा दिया है। जहां एक ओर किसानों के पास परिवार के पेट पालने को लेकर अन्न का एक दाना भी नहीं बचा है, वहीं पानी का भी बड़ा संकट भी पैदा हो गया है। जिले के
माधौगढ़, कदौरा समेत करीब एक दर्जन इलाकों में लोग मीलों दूर से पीने का पानी भर कर ला रहे हैं। पुराने कुएं, तालाब और हैंडपंप-ट्यूबवेल आदि भी सूख गए हैं। ऐसे में बीहड़ के इलाकों में स्थित कई परिषदीय विद्यालयों में पानी की कमी के चलते एमडीएम पूरी तरह बंद कर दिया गया है। माधौगढ़ के कुछ इलाके जहां पानी का संकट थोड़ा कम हैं, वहां बच्चों को
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पीने का पानी अनिवार्य रूप से लाने की हिदायत दी गई है। इसके साथ ही बच्चों से ही स्कूल के मिडडे मील के लिए आस पास के गांवों से पानी भी भरवाया जा रहा है। हालांकि इस संबंध में शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पानी की समस्या के बावजूद मिडडे मील बंद नहीं किया जाना चाहिए। वहीं बच्चों से पानी भरवाना अपराध है।
हैंडपंप खराब कहां से मिले पानी
स्कूलों में लगे 50 प्रतिशत से अधिक हैंडपंप खराब पड़े हैं, वहीं 70 फीसदी ने पानी छोड़ दिया है। शिकायत के बावजूद विभागीय अधिकारी इनकी मरम्मत की जहमत नहीं उठाते। स्कूलों में पानी की किल्लत के चलते शिक्षक से लेकर छात्र/छात्राएं तक बोतलों व डब्बों में पानी लेकर विद्यालय आ रहे हैं। उरई से सटे मुहम्मदाबाद, कुसमिलिया, रमपुरा-ऐरी, कुठौंदा, डकोर आदि क्षेत्रों के स्कूलों में लगे हैंडपंप खराब पड़े हैं। विद्यालय प्रशासन ने बाकायदा इसकी सूची तैयार कर उच्चाधिकारियों को सौंप दी है। अभी तक इन्हें ठीक नहीं करवाया गया है।
बच्चे ला रहे पानी
मिड डे मील पर आए संकट को दूर करने के लिए अब खुद छात्र रसोइयों के साथ पानी भरवा रहे हैं। हर रोज रसोइये और छात्रों को एक साथ दूरदराज के इलाकों से पानी की बाल्टी थामे देखा जा सकता है। कहीं-कहीं तो हैंडपंप खराब होने से स्कूल बिजली से चलने वाले नलों पर ही निर्भर होते हैं। बिजली नहीं आती है तो पानी न मिलने से स्कूलों में मिड-डे मील का खाना ही नहीं बन पाता है।
वर्जन
विद्यालयों में खराब पड़े हैंडपंपों की सूची बीएसए राजेश कुमार वर्मा को सौंप दी गई है सूची में स्कूलों के 38 हैंडपंप रीबोर की स्थिति में हैं तो वहीं नौ हैंडपंप जलस्तर गिरने से बंद पड़े हैं। इसके बाद छह स्कूलों में लगे हैंडपंपों का तो पीने योग्य पानी नहीं है। इनको ठीक कराने की कवायद की जा रही है। - राजेंद्र कुमार कुशवाहा, एबीएसए डकोर
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हो गया। कुछ परिषदीय विद्यालयों में विद्यालय का स्टाफ बच्चों से ही दूर दराज के इलाकों से पानी मंगाकर किसी तरह खाना बनवा पा रहा है। इस बार सूखे ने जिला ही नहीं समूचे बुंदेलखंड को झुलसा दिया है। जहां एक ओर किसानों के पास परिवार के पेट पालने को लेकर अन्न का एक दाना भी नहीं बचा है, वहीं पानी का भी बड़ा संकट भी पैदा हो गया है। जिले के
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माधौगढ़, कदौरा समेत करीब एक दर्जन इलाकों में लोग मीलों दूर से पीने का पानी भर कर ला रहे हैं। पुराने कुएं, तालाब और हैंडपंप-ट्यूबवेल आदि भी सूख गए हैं। ऐसे में बीहड़ के इलाकों में स्थित कई परिषदीय विद्यालयों में पानी की कमी के चलते एमडीएम पूरी तरह बंद कर दिया गया है। माधौगढ़ के कुछ इलाके जहां पानी का संकट थोड़ा कम हैं, वहां बच्चों को
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पीने का पानी अनिवार्य रूप से लाने की हिदायत दी गई है। इसके साथ ही बच्चों से ही स्कूल के मिडडे मील के लिए आस पास के गांवों से पानी भी भरवाया जा रहा है। हालांकि इस संबंध में शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पानी की समस्या के बावजूद मिडडे मील बंद नहीं किया जाना चाहिए। वहीं बच्चों से पानी भरवाना अपराध है।
हैंडपंप खराब कहां से मिले पानी
स्कूलों में लगे 50 प्रतिशत से अधिक हैंडपंप खराब पड़े हैं, वहीं 70 फीसदी ने पानी छोड़ दिया है। शिकायत के बावजूद विभागीय अधिकारी इनकी मरम्मत की जहमत नहीं उठाते। स्कूलों में पानी की किल्लत के चलते शिक्षक से लेकर छात्र/छात्राएं तक बोतलों व डब्बों में पानी लेकर विद्यालय आ रहे हैं। उरई से सटे मुहम्मदाबाद, कुसमिलिया, रमपुरा-ऐरी, कुठौंदा, डकोर आदि क्षेत्रों के स्कूलों में लगे हैंडपंप खराब पड़े हैं। विद्यालय प्रशासन ने बाकायदा इसकी सूची तैयार कर उच्चाधिकारियों को सौंप दी है। अभी तक इन्हें ठीक नहीं करवाया गया है।
बच्चे ला रहे पानी
मिड डे मील पर आए संकट को दूर करने के लिए अब खुद छात्र रसोइयों के साथ पानी भरवा रहे हैं। हर रोज रसोइये और छात्रों को एक साथ दूरदराज के इलाकों से पानी की बाल्टी थामे देखा जा सकता है। कहीं-कहीं तो हैंडपंप खराब होने से स्कूल बिजली से चलने वाले नलों पर ही निर्भर होते हैं। बिजली नहीं आती है तो पानी न मिलने से स्कूलों में मिड-डे मील का खाना ही नहीं बन पाता है।
वर्जन
विद्यालयों में खराब पड़े हैंडपंपों की सूची बीएसए राजेश कुमार वर्मा को सौंप दी गई है सूची में स्कूलों के 38 हैंडपंप रीबोर की स्थिति में हैं तो वहीं नौ हैंडपंप जलस्तर गिरने से बंद पड़े हैं। इसके बाद छह स्कूलों में लगे हैंडपंपों का तो पीने योग्य पानी नहीं है। इनको ठीक कराने की कवायद की जा रही है। - राजेंद्र कुमार कुशवाहा, एबीएसए डकोर