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Jalaun News: कार्यकर्ता सम्मेलन में हुई कथित अभद्रता के बाद निषाद पार्टी के प्रदेश सचिव का इस्तीफा
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फोटो - 21 भारत सिंह निषाद।
- फोटो : 1
कालपी (उरई)। निषाद पार्टी के प्रदेश सचिव एवं पूर्व जिलाध्यक्ष भरत सिंह निषाद ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और अपने पद से इस्तीफा देते हुए कहा है कि वह सार्वजनिक अपमान से आहत होकर संगठन छोड़ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस व्यक्ति (संजय निषाद) को उन्होंने वर्षों तक अपना गुरु, पिता तुल्य और भगवान का दर्जा दिया, उसी के व्यवहार ने उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया।
कालपी के एक गेस्ट हाउस में दो जुलाई को निषाद पार्टी का कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया गया था। इसमें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व कैबिनेट मंत्री संजय निषाद मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष की तीखी नोकझोंक प्रदेश सचिव व पूर्व जिलाध्यक्ष भारत सिंह निषाद से हुई थी। कार्यक्रम के दौरान हुई कथित टिप्पणी के बाद से कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के बीच नाराजगी की चर्चा बनी हुई है। मंगलवार को भारत सिंह निषाद ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया।
भारत सिंह ने बताया कि वह वर्ष 2014 में निषाद पार्टी से जुड़े थे, तब क्षेत्र में पार्टी का संगठन लगभग न के बराबर था। उन्होंने गांव-गांव जाकर संगठन को खड़ा करने का काम किया और बाद में जिलाध्यक्ष से लेकर झांसी मंडल की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी संभालीं। उनका कहना है कि उन्होंने पार्टी को केवल एक राजनीतिक संगठन नहीं, बल्कि परिवार की तरह माना।
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उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल की ताकत उसके कार्यकर्ता होते हैं और कार्यकर्ता सम्मान के लिए ही दिन-रात मेहनत करता है। यदि उसके सम्मान को ठेस पहुंचती है तो उसके लिए संगठन में बने रहना कठिन हो जाता है।
भारत सिंह के अनुसार उन्होंने अपनी बेटी की शादी के संबंध में मंत्री संजय निषाद से चर्चा की थी। इसी दौरान विवाद की स्थिति बनी और उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया। उनका आरोप है कि सम्मेलन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की मौजूदगी में उन्हें अपमानित किया गया। उन्होंने कहा कि यह घटना उनके आत्मसम्मान को गहरी चोट पहुंचाने वाली थी।
उन्होंने कहा, मैंने डॉ. संजय निषाद को हमेशा अपना गुरु माना। कई मंचों से उन्हें भगवान का दर्जा दिया, लेकिन जिस तरह की भाषा मेरे लिए इस्तेमाल की गई, उसे मैं कभी नहीं भूल सकता। आत्मसम्मान से बड़ा कोई पद नहीं होता।
भारत सिंह ने राष्ट्रीय अध्यक्ष को भेजे अपने इस्तीफे में व्यक्तिगत कारणों का उल्लेख किया है, लेकिन मीडिया से बातचीत में उन्होंने साफ कहा कि सार्वजनिक अपमान उनके फैसले की सबसे बड़ी वजह बना। उन्होंने कहा कि वह संगठन के खिलाफ कोई अभियान नहीं चलाएंगे, लेकिन कार्यकर्ताओं के सम्मान की अनदेखी किसी भी पार्टी के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है।
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कालपी के एक गेस्ट हाउस में दो जुलाई को निषाद पार्टी का कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया गया था। इसमें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व कैबिनेट मंत्री संजय निषाद मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष की तीखी नोकझोंक प्रदेश सचिव व पूर्व जिलाध्यक्ष भारत सिंह निषाद से हुई थी। कार्यक्रम के दौरान हुई कथित टिप्पणी के बाद से कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के बीच नाराजगी की चर्चा बनी हुई है। मंगलवार को भारत सिंह निषाद ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया।
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भारत सिंह ने बताया कि वह वर्ष 2014 में निषाद पार्टी से जुड़े थे, तब क्षेत्र में पार्टी का संगठन लगभग न के बराबर था। उन्होंने गांव-गांव जाकर संगठन को खड़ा करने का काम किया और बाद में जिलाध्यक्ष से लेकर झांसी मंडल की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी संभालीं। उनका कहना है कि उन्होंने पार्टी को केवल एक राजनीतिक संगठन नहीं, बल्कि परिवार की तरह माना।
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उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल की ताकत उसके कार्यकर्ता होते हैं और कार्यकर्ता सम्मान के लिए ही दिन-रात मेहनत करता है। यदि उसके सम्मान को ठेस पहुंचती है तो उसके लिए संगठन में बने रहना कठिन हो जाता है।
भारत सिंह के अनुसार उन्होंने अपनी बेटी की शादी के संबंध में मंत्री संजय निषाद से चर्चा की थी। इसी दौरान विवाद की स्थिति बनी और उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया। उनका आरोप है कि सम्मेलन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की मौजूदगी में उन्हें अपमानित किया गया। उन्होंने कहा कि यह घटना उनके आत्मसम्मान को गहरी चोट पहुंचाने वाली थी।
उन्होंने कहा, मैंने डॉ. संजय निषाद को हमेशा अपना गुरु माना। कई मंचों से उन्हें भगवान का दर्जा दिया, लेकिन जिस तरह की भाषा मेरे लिए इस्तेमाल की गई, उसे मैं कभी नहीं भूल सकता। आत्मसम्मान से बड़ा कोई पद नहीं होता।
भारत सिंह ने राष्ट्रीय अध्यक्ष को भेजे अपने इस्तीफे में व्यक्तिगत कारणों का उल्लेख किया है, लेकिन मीडिया से बातचीत में उन्होंने साफ कहा कि सार्वजनिक अपमान उनके फैसले की सबसे बड़ी वजह बना। उन्होंने कहा कि वह संगठन के खिलाफ कोई अभियान नहीं चलाएंगे, लेकिन कार्यकर्ताओं के सम्मान की अनदेखी किसी भी पार्टी के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है।